राजस्थान में अब गाय चराने पर मिलेगी सैलरी! मदन दिलावर ने किया 'गोवर्धन गांव ग्वाला' योजना का शंखनाद
Govardhan Gaon Gwala Yojana: राजस्थान सरकार की ‘गोवर्धन गांव ग्वाला’ योजना की औपचारिक शुरुआत हो गई है. शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने रामगंज मंडी से इस पहल का शुभारंभ किया. योजना के तहत अब गांवों में नियुक्त ग्वालों को गाय चराने और उनकी देखभाल के लिए मासिक वेतन दिया जाएगा. जानिए पूरी डिटेल.

राजस्थान की भजनलाल सरकार ने गोवंश संरक्षण और ग्रामीण रोजगार को जोड़ने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है. अब प्रदेश में गाय चराना केवल सेवा या संस्कार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे एक सम्मानजनक रोजगार का रूप दे दिया गया है. शिक्षा और पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने कोटा की रामगंज मंडी विधानसभा के खेरली गांव (चेचट) से 'गोवर्धन गांव ग्वाला' योजना का औपचारिक शुभारंभ किया है.
क्या है गोवर्धन गांव ग्वाला योजना?
इस योजना के तहत अब हर गांव में एक ग्वाला नियुक्त किया जाएगा. इस ग्वाले की जिम्मेदारी केवल अपनी गायों तक सीमित नहीं होगी, बल्कि वह पूरे गांव की गौ माताओं को चराने का जिम्मा संभालेगा.
कार्यप्रणाली: योजना के अनुसार, प्रतिदिन सुबह गांव की सभी गायों को एक निश्चित स्थान पर इकट्ठा किया जाएगा. इसके बाद ग्वाला उन्हें गोचर भूमि (चरने के लिए सुरक्षित स्थान) पर ले जाएगा.
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देखभाल और सुरक्षा: दिन भर गायों की देखभाल करने के बाद, शाम को ग्वाला सभी गायों को सुरक्षित उनके मालिकों के घर तक पहुंचाएगा.
मासिक वेतन: सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस सेवा के बदले सरकार की ओर से नियुक्त ग्वालों को मासिक वेतन (सैलरी) दिया जाएगा. यानी अब गायों की सेवा के साथ-साथ रोजगार का अवसर भी मिलेगा.
रामगंज मंडी के 14 गांवों से हुई शुरुआत
मंत्री मदन दिलावर ने रामगंज मंडी के 14 गांवों के नवनियुक्त ग्वालों का साफा बांधकर और माला पहनाकर सम्मान किया. इस ऐतिहासिक पल के साक्षी शाहपुरा पीठ के जगतगुरु स्वामी रामदयाल जी महाराज भी बने. मंत्री दिलावर ने कहा कि यह योजना फिलहाल एक विधानसभा क्षेत्र से शुरू की गई है, लेकिन सरकार का लक्ष्य इसे जल्द ही पूरे राजस्थान में लागू करना है.
परंपरा और आधुनिकता का संगम
राजस्थान में सदियों पुरानी 'गांव ग्वाल' परंपरा रही है, जो समय के साथ विलुप्त होती जा रही थी. भजनलाल सरकार ने अब इसे आधुनिक ढांचे में ढालकर फिर से जीवित किया है. मंत्री दिलावर ने सोशल मीडिया पर इस पहल को आध्यात्मिक तेज और सेवा का संगम बताया. उनका मानना है कि इससे न केवल आवारा पशुओं की समस्या का समाधान होगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे.
भविष्य की चुनौतियां और उम्मीदें
जानकारों का मानना है कि यह योजना गौ संवर्धन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और परंपरा के संरक्षण की दिशा में एक बड़ा सामाजिक प्रयोग है. हालांकि, योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि गांवों में पर्याप्त गोचर भूमि उपलब्ध रहे और सरकार इसके लिए स्थाई बजट का प्रबंधन कैसे करती है. यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो राजस्थान गोवंश संरक्षण के मामले में देश के सामने एक नई नजीर पेश करेगा.










