UP Free Scooty Scheme: UP में FREE में मिलेगी स्कूटी! बस मेधावी छात्राओं कर लें ये जरूरी काम

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उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बुधवार को राज्य का बजट पेश किया. इस बजट का आकार 9 लाख 12 हजार करोड़ रुपये से भी अधिक है. इस बजट में समाज के हर वर्ग का ध्यान रखा गया है, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा मेधावी छात्राओं के लिए घोषित की गई स्कूटी योजना की हो रही है. सरकार ने बेटियों को सशक्त और हाईटेक बनाने के लिए शिक्षा और डिजिटल सुविधाओं पर विशेष जोर दिया है.

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सरकार ने मेधावी छात्राओं को तोहफा देते हुए 'रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना' के बजट में बड़ी बढ़ोतरी की है. वित्त मंत्री ने इस योजना के लिए 400 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है. इसका सीधा उद्देश्य उन छात्राओं की मदद करना है जो संसाधनों की कमी के कारण अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ देती हैं या जिन्हें कॉलेज आने-जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.

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किसे मिलेगा इस योजना का फायदा

यह योजना मुख्य रूप से उन छात्राओं के लिए तैयार की गई है जो स्नातक (Graduation) या परास्नातक (Post-Graduation) की पढ़ाई कर रही हैं और अपने शैक्षणिक करियर में बेहतरीन प्रदर्शन कर रही हैं.

 

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कैसे उठाए याेजना का लाभ?

लाभ पाने के लिए छात्रा का उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी होना जरूरी है. साथ ही, उसका किसी सरकारी कॉलेज या यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करना अनिवार्य शर्त है. हालांकि, सरकार अब निजी कॉलेजों की मेधावी छात्राओं को भी इसमें शामिल करने की योजना बना रही है.

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मेरिट के आधार पर होगा स्कूटी का वितरण

स्कूटी का लाभ किसे मिलेगा, यह पूरी तरह से छात्रा की काबिलियत और उसकी मेरिट लिस्ट पर निर्भर करेगा. चयन प्रक्रिया में 12वीं कक्षा के अंकों के साथ-साथ कॉलेज में उसके प्रदर्शन को आधार बनाया जाएगा.

 

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कुछ मामलों में सरकार स्कूटी की पूरी लागत खुद उठाएगी, तो कुछ में एक तय राशि सीधे छात्रा के बैंक खाते में सब्सिडी के तौर पर भेजी जाएगी, ताकि वह अपनी पसंद की स्कूटी खरीद सके.

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जरूरी दस्तावेज और आवेदन करने का तरीका

अगर आप इस योजना की पात्रता पूरी करती हैं, तो आपको कुछ जरूरी कागजात तैयार रखने होंगे. इसमें आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, मार्कशीट, आयु प्रमाण पत्र और बैंक पासबुक की फोटोकॉपी शामिल है.

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आवेदन की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल होगी. इच्छुक छात्राओं को उच्च शिक्षा विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर अपना ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना होगा. सरकार को उम्मीद है कि इस कदम से ग्रामीण इलाकों में छात्राओं का ड्रॉप-आउट रेट काफी कम हो जाएगा.

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