NATO नहीं होता तो मैं मर गई होती या साईबेरिया के लेंबर कैंप में होती - राजदूत डायना मिकेविसीन

रूसी आक्रमण के खतरे को देखते हुए नाटो अपने सैनिकों की तैनाती रूसी सीमा के पास वाले देशों में कर रहा है. रूस इसे उकसावा बता रहा है. भारत तक से लिथुआनिया की राजदूत डायना मिकेविसीन ने खास बातचीत की और बताया कि कैसे उनकी जान रूस से नाटो ने बचाई.

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NATO VS RUSSIA : लिथुआनिया में नाटो सैनिकों की तैनाती के बाद फिर से रूस और नाटो में शामिल यूरोपीय देशों के साथ तनाव बढ़ रहा है. रूस की बयानबाजी और क्षेत्र में हथियारों की तैनाती से लिथुआनिया को खतरा महसूस हो रहा है. लिथुआनिया की राजदूत ने अपने घर की कहानी बताते हुए कहा कि, उनके परिवार पर इस युद्ध का बुरा असर पड़ा उनका बेटा हमले से डरा रहता था और अगर नाटो नहीं होता तो वो जिंदा नहीं होती.