Madhya Pradesh: इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी का कहर, 6 मौतों की पुष्टि लेकिन 10 मौतों पर अब भी सस्पेंस?

इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों को लेकर प्रशासन और स्थानीय लोगों के आंकड़ों में भारी अंतर है, जहां सरकारी तौर पर 6 और स्थानीय स्तर पर 16 मौतों की बात कही जा रही है. दस्तावेज बताते हैं कि इलाके की पाइपलाइन और पानी की गंदगी की जानकारी नगर निगम को सालों पहले थी, फिर भी लापरवाही ने हालात भयावह बना दिए.

मध्य प्रदेश में दूषित पानी पीने से हुआ बड़ा हादसा
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Indore Contaminated Water: मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर का भागीरथपुरा इलाका इन दिनों एक बड़े स्वास्थ्य संकट से जूझ रहा है. दूषित पानी पीने की वजह से यहाँ मौतों का सिलसिला थम नहीं रहा है. प्रशासन जहां आधिकारिक तौर पर 6 मौतों की पुष्टि कर रहा है, वहीं स्थानीय स्तर पर मौतों का आंकड़ा 16 तक बताया जा रहा है. 'एमपी तक' की खास पेशकश 'एमपी फाइल्स' में आज हम इसी मौतों के रहस्य से पर्दा उठाने की कोशिश करेंगे.

मौतों के आंकड़ों पर भ्रम की स्थिति

भागीरथपुरा इलाके में पिछले 10 दिनों के भीतर कई लोगों की जान गई है. प्रशासन का कहना है कि 6 लोगों की मौत दूषित पानी (डायरिया/हैजा) की वजह से हुई है, लेकिन बाकी की 10 मौतों को लेकर रहस्य बरकरार है. सवाल यह उठ रहा है कि जब सभी मृतकों के इलाज का तरीका (प्रोसीजर) एक जैसा था और सभी में किडनी फेलियर और संक्रमण जैसे लक्षण थे, तो फिर आंकड़ों में यह भेदभाव क्यों? 

हाल ही में ओम प्रकाश शर्मा नाम के व्यक्ति की मौत हुई, जिसे सीएमएचओ ने यह कहकर अलग कर दिया कि वे पहले से ही किडनी की बीमारी से पीड़ित थे और धार के रहने वाले थे. 

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नगर निगम की बड़ी लापरवाही?

'एमपी तक' के हाथ लगे दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि इंदौर नगर निगम को 2022 से ही पता था कि भागीरथपुरा में पाइपलाइन दूषित हो चुकी है. साल 2022 में नई पाइपलाइन बिछाने के लिए 1 करोड़ 38 लाख का टेंडर भी जारी हुआ था, लेकिन काम 2025 तक खिंचता रहा.

इससे भी चौंकाने वाली बात यह है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 2016-17 में ही चेतावनी दी थी कि भागीरथपुरा सहित 58 इलाकों का पानी सेप्टिक टैंक से दूषित हो चुका है. पानी में ई-कोलाई और विब्रियो जैसे जानलेवा बैक्टीरिया पाए गए थे जो हैजा और डायरिया का कारण बनते हैं. 

प्रशासन और सरकार के अलग-अलग आंकड़े

मौतों को लेकर सरकार के भीतर ही तालमेल की कमी दिखी. जहां मुख्यमंत्री ने 4 मौतें बताईं वहीं महापौर ने 7 और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने 10 मौतों का जिक्र किया था. वर्तमान में प्रशासन 6 मौतों पर कायम है और बाकी मौतों के लिए 'विस्तृत रिपोर्ट' का इंतजार करने की बात कह रहा है.

भागीरथपुरा के लोग आज भी डरे हुए हैं. 25 दिसंबर से शुरू हुआ मरीजों के आने का सिलसिला 29 दिसंबर तक भयावह हो गया, जब 150 से ज्यादा लोग एक साथ बीमार पड़े. अब देखना यह है कि क्या प्रशासन इन मौतों की असली वजह स्वीकार करेगा या आंकड़े दबाने की कोशिश जारी रहेगी.

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