Indore Water Contamination: '200% अधिकारी जिम्मेदार', कैलाश विजयवर्गीय ने अपनी ही सरकार के सिस्टम पर उठाए सवाल
इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अधिकारियों को 200 प्रतिशत जिम्मेदार ठहराया और इसे सिस्टम की बड़ी नाकामी बताया. सरकार ने मुआवजा बढ़ाने का संकेत दिया है और नगर निगम के बड़े अफसरों को हटाकर निलंबित भी किया है.

Indore Water Contamination: इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से हुई मौतों ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया है. अब इस मामले पर राज्य सरकार के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का बड़ा और चौंकाने वाला बयान सामने आया है. उन्होंने एक इंटरव्यू में साफ कहा कि इस पूरी त्रासदी के लिए अधिकारी '200 प्रतिशत' जिम्मेदार हैं.
भागीरथपुरा में जहरीले पानी की सप्लाई से अब तक 16 लोगों की जान जाने का दावा किया जा रहा है, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में सिर्फ 4 मौतें दर्ज हैं. कई लोग अब भी अस्पताल में भर्ती हैं और 36 से ज्यादा मरीज आईसीयू में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं. विजयवर्गीय ने माना कि यह मामला पूरी तरह सिस्टम की नाकामी का है और इसकी जिम्मेदारी सरकार को लेनी होगी.
मुआवजे को लेकर क्या कहा
मुआवजे को लेकर भी उन्होंने बड़ा संकेत दिया है. उन्होंने कहा कि मौजूदा 2 लाख रुपये की सहायता राशि नाकाफी है और मुख्यमंत्री से बातचीत के बाद इसे 4 लाख रुपये तक बढ़ाया जा सकता है. हालांकि, जब उनसे मौतों के असली आंकड़ों पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने इस पर साफ जवाब देने से बचते हुए बात टाल दी.
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अफसरों पर लगाए गंभीर आरोप
विजयवर्गीय का गुस्सा सिर्फ हादसे तक सीमित नहीं रहा. उन्होंने अफसरों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे जनप्रतिनिधियों की सुनते ही नहीं हैं. इससे पहले भी वे मुख्यमंत्री मोहन यादव के सामने कह चुके हैं कि अधिकारी प्रभारी मंत्री का नाम लेकर उन्हें धमकाते हैं.
इस पूरे विवाद में पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती भी कूद पड़ी हैं. उन्होंने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए कहा कि अगर अधिकारी किसी की बात नहीं सुनते तो जनप्रतिनिधियों को पद छोड़कर जनता के बीच चले जाना चाहिए.
तीन साल से गंदा पानी पीने पर मजबूर
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि भागीरथपुरा के लोग पिछले तीन साल से गंदा पानी पीने को मजबूर थे. जनवरी 2023 में नई पाइपलाइन बिछाने के लिए बजट मंजूर हुआ था, लेकिन काम शुरू ही नहीं हो सका. अब जब मामला जानलेवा साबित हुआ तो सरकार हरकत में आई है.
राज्य सरकार ने बड़ी कार्रवाई करते हुए इंदौर नगर निगम कमिश्नर दिलीप यादव को हटा दिया है और उनकी जगह आईएएस क्षितिज सिंघल को जिम्मेदारी सौंपी गई है. साथ ही एडिशनल कमिश्नर रोहित सिसोदिया और एग्जीक्यूटिव इंजीनियर संजीव श्रीवास्तव को सस्पेंड कर दिया गया है.
यह पूरा मामला इंदौर ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए चेतावनी बनकर सामने आया है कि अगर समय रहते सिस्टम नहीं सुधरा, तो ऐसी त्रासदियां दोबारा भी हो सकती हैं.
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