'गंगा स्नान नहीं करने दोगे तो...'शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर ये बाेले शंकराचार्य सदानंद सरस्वती, देखें पूरा इंटरव्यू

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा प्रवास के दौरान शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने धर्म और राजनीति के टकराव पर तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने गंगा स्नान विवाद और संत समाज की भूमिका पर खुलकर बात की. उनके बयान के बाद धार्मिक और राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है, जिससे माहौल गरमा गया है.

Swami Sadanand Saraswati statement
Swami Sadanand Saraswati statement
social share
google news

Swami Sadanand Saraswati statement: द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती शनिवार को अल्प प्रवास पर मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा पहुंचे. यहां उन्होंने न केवल अपने अनुयायियों को आशीर्वाद दिया, बल्कि वर्तमान में धर्म और राजनीति के बीच चल रहे घमासान पर भी बेबाक टिप्पणी की. विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और प्रशासन के बीच जारी गतिरोध पर उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया दी.

राजनीति और धर्म का संतुलन बिगड़ा

शंकराचार्य सदानंद सरस्वती ने कहा कि "राजनीति धर्म से नियंत्रित होना चाहिए. जब राजनीति अनियंत्रित हो जाती है तब ऐसी घटनाएं होती हैं. इसलिए नीति शब्द का जो अर्थ है उसका धर्म है. जिस राज्य को नीति पूर्वक संचालित किया जाता है उसे राजनीति कहते हैं और वही राजनीतिज्ञ है जो नीति पूर्वक राज्य का संचालन करें. नीति कहां होती है? नेता में होती है. कब होती है? जब नेता में नैतिकता होती है. तभी ना नीति का पालन करेगा. माने धर्म का पालन करेगा. तो यहां जैसे संविधान की शपथ लेकर के हमारा भारत देश चलता है तो संविधान की शपथ लेना माने संविधान में लिखे हुए मूल्यों की रक्षा करना. कर्तव्य का पालन करना.''

गंगा स्नान विवाद पर सरकार को घेरा

प्रयागराज में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को गंगा स्नान से रोकने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि "टकराव के हालात क्यों बन रहे हैं, यह सबको पता है. जब आप किसी संत को गंगा स्नान नहीं करने देंगे तो विरोध होना स्वाभाविक है." उन्होंने इसे धार्मिक आस्थाओं में अनावश्यक हस्तक्षेप करार दिया. उनके अनुसार, हिंदू होने का पहला लक्षण गौ-सेवा और धार्मिक परंपराओं का पालन है और यदि इन परंपराओं पर प्रहार होगा तो संत समाज चुप नहीं बैठेगा.

यह भी पढ़ें...

अखाड़ा परिषद के बयानों पर पलटवार

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रवींद्र पुरी द्वारा अविमुक्तेश्वरानंद पर लगाए गए 'दादागिरी' के आरोपों पर भी सदानंद सरस्वती ने कड़ी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने सवाल किया, "सिद्धांत की बात करना दादागिरी कैसे हो गई? साधु-संतों का कर्तव्य ही समाज को सन्मार्ग पर ले जाना है. हम दूसरों को सही रास्ता तभी दिखा पाएंगे जब हम खुद सिद्धांतों का कठोरता से पालन करेंगे."

यह भी पढ़ें: 'हम योगी आदित्यनाथ नहीं हैं जो...'खुद पर दर्ज हुई FIR पर भड़के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद, आया ऐसा रिएक्शन, देखें पूरा इंटरव्यू

    follow on google news