मिजोरम में सिर्फ 8.5 लाख वोटर, 40 विधानसभा सीट, क्या होने जा रहा यहां चुनाव में?

अभिषेक गुप्ता

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मिजोरम इलेक्शन
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मिजोरम में चुनावी बिगुल बज चुका है. प्रदेश में 7 नवंबर को मतदान है. 3 दिसंबर को रिजल्ट आएंगे. महज 40 सीटों और 8.5 लाख वोटर्स वाले इस स्टेट के चुनावी नतीजे पूरे नॉर्थ ईस्ट के लिए महत्वपूर्ण संदेश देने वाले साबित हो सकते हैं. मणिपुर में हो रही हिंसा का असर इस राज्य की चुनावी संभावनाओं पर भी पड़ता नजर आ रहा है. मिजो नेशनल फ्रंट पार्टी के वर्तमान मुख्यमंत्री जोरामथांगा आगामी चुनावों में अपनी दावेदारी मजबूत करने में लगे है. वहीं उनके विरोधी भी अपनी कमर कसे हुए हैं. आइए पहले एक नजर हालिया सर्वे पर डाल लेते हैं.

ABP C Voter के ओपेनियन पोल में MNF को 13-17, कांग्रेस को 10-14, जोरम पीपल्स मुवमेंट (ZPM) को 9-13 और अन्य को 1-3 सीटें मिलने अनुमान है. यहां बहुमत का आंकड़ा 21 सीटों का है. 2018 में MNF को 26 सीटें, कांग्रेस को 5 और ZPM को 8 सीटें मिली थीं. एक सीट पर बीजेपी को जीत मिली थी.

जोरामथांगा की MNF के सामने क्या हैं चुनौतियां?

बगल के राज्य मणिपुर में लंबे समय से चल रहे संघर्ष का असर प्रदेश के चुनावों पर होना लाजमी है. पूरा पूर्वोत्तर भारत इसके असर से अछूता नहीं है. लोग अपने अस्तित्व को लेकर आपस में ही लड़ रहे हैं. मिजोरम के लोगों में भी इसे लेकर डर है.

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प्रदेश में जोरम पीपुल्स मूवमेंट(ZPM)का बढ़ता प्रभाव

लालदुहावमा के नेतृत्व वाली ZPM ने पिछले दिनों हुए लुंगलेई के नगरपालिका चुनावों में सभी सीटों पर जीत हासिल की थी. विधानसभा चुनावों में भी पार्टी इसी प्रदर्शन को बरकरार रखना चाहेगी.

कांग्रेस भी दिख रही रेस में

सर्वे इस ओर इशारा कर रहे हैं कि मिजोरम में इस बार कांग्रेस भी रेस में है. जोरामथांगा के लिए यह बड़ी चुनौती है. कांग्रेस 2018 से पहले यहां लगातार दो बार सरकार बना चुकी है. सक्रिय राजनीति से संन्यास का ऐलान कर चुके कांग्रेस नेता और मिजोरम के पांच बार CM रह चुके ललथनहवला एक बार फिर सक्रिय दिख रहे हैं. देखना रोचक होगा कि क्या वह ZPM से मिल रही चुनौतियों से निपट क्या MNF की सरकार के विकल्प के तौर कांग्रेस को पेश कर पाएंगे या नहीं.

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