राजस्थान में खेजड़ी के पेड़ काटने के खिलाफ बनेंगे कानून, CM भजनलाल की घोषणा के बाद संतों का अनशन समाप्त
Khejri tree Rajasthan: राजस्थान में खेजड़ी के पेड़ों को बचाने के आंदोलन के बाद सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने घोषणा की है कि अब खेजड़ी काटना अपराध माना जाएगा और इसके लिए कड़ा कानून बनाया जाएगा. जानिए खेजड़ी संरक्षण आंदोलन, बिश्नोई समाज की भूमिका और सरकार के फैसले की पूरी कहानी.

राजस्थान में खेजड़ी के पेड़ों को बचाने के लिए चल रहा महाआंदोलन आखिरकार जीत गया है. विधानसभा में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की बड़ी घोषणा के बाद बीकानेर में चार दिनों से आमरण अनशन पर बैठे संतों और बिश्नोई समाज के लोगों ने अपना उपवास खत्म कर दिया है. मुख्यमंत्री ने ऐलान किया है कि राजस्थान के राज्य वृक्ष खेजड़ी को काटने के खिलाफ अब कड़ा कानून बनाया जाएगा. आइए विस्तार से जानते है पूरी बात.
क्यों मचा था बवाल?
दरअसल पश्चिमी राजस्थान (बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर और पाली) में सोलर प्लांट लगाने के नाम पर हजारों खेजड़ी के पेड़ काटे जा रहे थे. पर्यावरणविदों के अनुसार, अब तक करीब 50 से 60 हजार पेड़ काटे जा चुके हैं, जिससे इलाके का तापमान 4 डिग्री तक बढ़ गया है. इसी के विरोध में बिश्नोई समाज और संत समाज आर-पार की लड़ाई पर उतर आया था.
अस्पताल में तब्दील हो गया था धरना स्थल
खेजड़ी को बचाने के लिए पहले 363 लोगों को अनशन पर बैठना था, लेकिन जोश इतना था कि 420 लोग भूख हड़ताल पर बैठ गए. चौथे दिन तक करीब 20 संतों की तबीयत इतनी बिगड़ गई कि धरना स्थल पर ही अस्थायी अस्पताल बनाना पड़ा. 17 लोगों को वहां भर्ती किया गया, जबकि दो संतों की गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें ICU में शिफ्ट करना पड़ा.
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सियासी गलियारों में भी गूंजी 'खेजड़ी' की आवाज
इस मुद्दे पर राजस्थान की सियासत भी गरमा गई थी. विधानसभा में कांग्रेस नेता हरीश चौधरी और निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने यह मामला जोर-शोर से उठाया. पूर्व सीएम वसुंधरा राजे, अशोक गहलोत और सचिन पायलट ने भी खेजड़ी कटाई पर तुरंत रोक लगाने की मांग की थी. दबाव बढ़ता देख सरकार ने मंत्री के.के. बिश्नोई को वार्ता के लिए भेजा था.
बिश्नोई समाज के लिए क्यों खास है खेजड़ी?
बिश्नोई समाज में खेजड़ी को काटना महापाप माना जाता है. 1730 में अमृता देवी बिश्नोई के नेतृत्व में 363 लोगों ने पेड़ों से लिपटकर अपनी जान दे दी थी. इसके अलावा बिश्नोई समाज का नारा है कि, 'सिर सांटे रूंख रहे, तो भी सस्तो जाण' (यानी सिर कटने के बदले भी पेड़ बच जाए, तो यह सौदा सस्ता है). वहीं गुरु जम्भेश्वर भगवान के 29 नियमों में हरे पेड़ न काटना सबसे मुख्य है.
रेगिस्तान का 'कल्पवृक्ष' है खेजड़ी
खेजड़ी सिर्फ एक पेड़ नहीं, बल्कि रेगिस्तान की जीवनरेखा है. इसकी फली जिसे 'सांगरी' कहते हैं, उसकी डिमांड फाइव स्टार होटलों तक में है. अकाल के समय इसकी छाल ने लोगों का पेट भरा है. पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि रेगिस्तान के पशु-पक्षी और पूरा ईको-सिस्टम इसी पेड़ के सहारे टिका है. सरकार के इस फैसले के बाद अब उम्मीद जगी है कि सोलर प्रोजेक्ट्स के नाम पर राजस्थान के इस 'हरे सोने' की बलि नहीं दी जाएगी.










