इंसाफ में लगे 23 साल! आजमगढ़ के चर्चित हरिलाल मर्डर केस में SHO जे.के. सिंह दोषी करार, मिली उम्रकैद की सजा
Azamgarh murder case: आजमगढ़ के चर्चित हरिलाल यादव मर्डर केस में 23 साल बाद अदालत का बड़ा फैसला आया है. पुलिस हिरासत में हुई हत्या के मामले में तत्कालीन SHO जे.के. सिंह को उम्रकैद की सजा सुनाई गई. जानिए 2003 के इस कस्टोडियल डेथ केस की पूरी कहानी, CBCID जांच, कोर्ट का फैसला और परिवार को मिले इंसाफ की पूरी डिटेल.

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में करीब 23 साल पहले पुलिस हिरासत में हुई एक व्यक्ति की हत्या के मामले में आखिरकार इंसाफ हो गया है. बुधवार को जिला एवं सत्र न्यायालय ने तत्कालीन थाना अध्यक्ष (SHO) को उम्रकैद की सजा सुनाई. इस फैसले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि कानून के हाथ लंबे होते हैं और दोषी चाहे खाकी वर्दी में ही क्यों न हो, वह बच नहीं सकता. आइए विस्तार से जानते हैं पूरा मामला.
क्या है 23 साल पुराना यह मामला?
यह घटना साल 2003 की है. आजमगढ़ के दौलतपुर निवासी हरिलाल यादव को पुलिस ने बैटरी चोरी के आरोप में 29 मार्च 2003 को रानी की सराय थाने में हिरासत में लिया था. रात में जब हरिलाल का बेटा जितेंद्र उन्हें छुड़ाने थाने पहुंचा, तो वहां पूछताछ के दौरान विवाद हो गया. आरोप है कि तत्कालीन थाना अध्यक्ष जे.के. सिंह ने ललकार लगाई, जिसके बाद दरोगा नरेंद्र बहादुर सिंह ने थाने के अंदर ही हरिलाल यादव को गोली मार दी.
बेटे को भी किया था बंद
गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हरिलाल को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. हैरान करने वाली बात यह रही कि पुलिस ने अपनी गलती छिपाने के लिए मृतक के बेटे जितेंद्र और उनके रिश्तेदार को ही रातभर थाने के हवालात में बंद रखा. अगले दिन जितेंद्र की तहरीर पर शहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया.
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लंबी कानूनी लड़ाई और CBCID जांच
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सितंबर 2003 में इसकी जांच सीबीसीआईडी को सौंप दी गई. जांच के दौरान मुख्य आरोपी दरोगा नरेंद्र बहादुर सिंह (जिसने गोली चलाई थी) की मौत हो गई, लेकिन साजिश में शामिल इंस्पेक्टर जे.के. सिंह के खिलाफ मुकदमा चलता रहा. अभियोजन पक्ष ने सात गवाह पेश किए और कड़ी दलीलों के बाद यह साबित हुआ कि यह पुलिस कस्टडी में की गई सोची-समझी हत्या थी.
कोर्ट का बड़ा फैसला: उम्रकैद और जुर्माना
जिला एवं सत्र न्यायाधीश जयप्रकाश पांडे की अदालत ने तत्कालीन इंस्पेक्टर जे.के. सिंह उर्फ जैनेंद्र कुमार सिंह को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है. साथ ही उन पर 1.15 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है. सजा सुनाए जाने के बाद अदालत परिसर में सन्नाटा पसर गया.
इंसाफ की जीत
23 साल के लंबे इंतजार के बाद हरिलाल यादव के परिवार को इंसाफ मिला है. यह फैसला उन तमाम पुलिसकर्मियों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो कानून की रक्षा के नाम पर अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करते हैं.
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