राजस्थान में पंचायत चुनाव नियम बदलेंगे: 3 बच्चों वाले भी बन पाएंगे सरपंच और मेयर, अनपढ़ों पर भी रोक नहीं

Rajasthan Panchayat Election: राजस्थान सरकार ने स्पष्ट किया है कि निकाय और पंचायतीराज चुनाव में शैक्षणिक योग्यता अनिवार्य नहीं होगी. साथ ही दो से ज्यादा संतान वालों पर लगी पाबंदी हटाने के लिए कानून संशोधन की प्रक्रिया चल रही है. 1994 से लागू नियमों में बदलाव के संकेत मिले हैं.

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Rajasthan Panchayat Election: राजस्थान की भजनलाल सरकार ने प्रदेश के आगामी पंचायत और निकाय चुनावों को लेकर दो बेहद महत्वपूर्ण फैसलों पर अपनी स्थिति साफ कर दी है. विधानसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में सरकार ने बताया कि राज्य में सरपंच, प्रधान या मेयर बनने के लिए अब शैक्षणिक योग्यता (पढ़ाई-लिखाई) की कोई बाध्यता नहीं रहेगी. यानी अब कम पढ़े-लिखे या अनपढ़ व्यक्ति भी चुनाव मैदान में उतर सकेंगे. इसके साथ ही, पिछले तीन दशकों से चले आ रहे दो बच्चों वाले नियम में भी ढील देने की तैयारी की जा रही है.

30 साल पुराने नियम में संशोधन की तैयारी

दरअसल, कांग्रेस विधायक पूसाराम गोदारा ने विधानसभा में सवाल किया था कि क्या सरकार चुनाव लड़ने के लिए शैक्षणिक योग्यता और संतानों की संख्या वाले नियमों में बदलाव करने जा रही है? इसके जवाब में सरकार ने बताया कि राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009 में फिलहाल शैक्षणिक योग्यता का कोई नियम नहीं है और इसे लागू करने का अभी कोई इरादा भी नहीं है.

वहीं, दो से ज्यादा संतान वाले उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने से रोकने वाले नियम को हटाने के लिए फाइल विधि विभाग (Law Department) को भेजी गई है. फिलहाल यह मामला प्रक्रिया में है.

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कब बना था यह कानून?

आपको बता दें कि राजस्थान में दो से ज्यादा बच्चे होने पर चुनाव लड़ने पर रोक लगाने का नियम साल 1994-95 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत की सरकार के दौरान बना था.

इस कानून के तहत, चुनाव जीतने के बाद भी अगर किसी प्रतिनिधि के घर तीसरी संतान होती थी तो उसे पद से हटा दिया जाता था. पिछले 30 सालों से यह नियम सख्ती से लागू है.

कर्मचारियों को पहले ही मिल चुकी है राहत

गौर करने वाली बात यह है कि सरकारी कर्मचारियों के लिए भी ऐसा ही नियम साल 2002 में लाया गया था. हालांकि, समय-समय पर इसमें राहत दी गई. साल 2018 में वसुंधरा राजे सरकार ने प्रमोशन रोकने और अनिवार्य रिटायरमेंट जैसे कड़े नियमों में काफी शिथिलता दी थी. अब जनप्रतिनिधियों के लिए भी इसी तरह की राहत की राह आसान होती दिख रही है.

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