'इंजेक्शन के बाद नाखून पड़ गए थे हरे...', मौत से पहले कमरे से क्यों बदहवास होकर भागी थीं साध्वी? करीबी का बड़ा खुलासा
Rajasthan Sadhvi mystery: राजस्थान की प्रसिद्ध साध्वी प्रेम बाईसा की रहस्यमयी मौत को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है. इंजेक्शन के बाद नाखूनों का हरा पड़ना, ऑक्सीजन लेवल गिरना, घबराहट में कमरे से बाहर भागना और अचानक गिरकर मौत को लेकर करीबी सूत्रों ने पूरी रात की भयावह कहानी बताई है. जानिए साध्वी प्रेम बाईसा की मौत से जुड़े हर पहलू की पूरी, विस्तृत और तथ्यात्मक जानकारी.

राजस्थान की प्रसिद्ध आध्यात्मिक साध्वी प्रेम बाईसा की रहस्यमयी मौत का मामला अब एक नए मोड़ पर आकर टिक गया है. जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, उस रात की डरावनी तस्वीर साफ होती जा रही है. अब प्रेम बाईसा के एक अत्यंत करीबी सूत्र, जो उन्हें साल 2011 से जानते हैं, ने उस रात के उन आखिरी पलों का जिक्र किया है जब साध्वी की तबीयत बिगड़ी थी. उनके दावों ने न केवल इस मामले में एक नई मेडिकल थ्योरी पेश की है, बल्कि उस सवाल का जवाब भी देने की कोशिश की है कि आखिर मौत से चंद लम्हे पहले साध्वी अपने कमरे से बाहर की तरफ क्यों भागी थीं. आइए विस्तार से जानते हैं पूरी बात.
'नाखूनों का हरा होना और घबराहट'-क्या थी वजह?
साध्वी के करीबियों ने खुलासा किया कि प्रेम बाईसा को लंबे समय से अस्थमा और सांस की समस्या थी. उनके मुताबिक, उस रात जब उन्हें बुखार की शिकायत के बाद इंजेक्शन लगाया गया, तो संभवतः उनके शरीर में ऑक्सीजन का स्तर तेजी से गिर गया. चश्मदीदों के हवाले से बताया गया कि 'ऑक्सीजन की कमी होने पर नाखून हरे या नीले पड़ने लगते हैं. उस रात साध्वी के साथ भी यही हुआ. उन्हें भीषण घबराहट हुई और ऐसा लगा जैसे उनका दम घुट रहा है.'
कमरे से बाहर क्यों भागी थीं साध्वी?
साध्वी के करीबी का दावा है कि जब शरीर में ऑक्सीजन की भारी कमी हुई, तो वह ताजी हवा या मदद के लिए बदहवास होकर अपने कमरे से बाहर की तरफ दौड़ी थीं. वे बाहर बरामदे तक पहुंची ही थीं कि अचानक वे गिर पड़ीं और कुछ ही समय बाद उनकी मृत्यु हो गई. करीबी सूत्रों का मानना है कि यह कोई साजिश नहीं बल्कि एक 'नेचुरल डेथ' हो सकती है जो अस्थमा के गंभीर अटैक और शरीर के अंगों के फेल होने (Multiorgan failure due to low oxygen) के कारण हुई.
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पोस्टमार्टम को लेकर 'अपनों' और 'बाहरियों' में भिड़ंत
मिली जानकारी के मुताबिक, साध्वी के पिता वीरमनाथ जी खुद चाहते थे कि पोस्टमार्टम हो ताकि उनकी बेटी की मौत पर उठ रहे सवालों पर विराम लग सके. हालांकि, घटना के बाद कुछ लोग अपनी राजनीति चमकाने के लिए वहां पहुंच गए और हंगामा शुरू कर दिया. करीबी ने आरोप लगाया कि "रुद्र प्रताप सिंह" जैसे कुछ लोगों ने वहां पहुंचकर संतों के साथ धक्का-मुक्की की और जानबूझकर जांच में बाधा डालने की कोशिश की.
सीसीटीवी विवाद का मानसिक दबाव
साध्वी के करीबियों ने यह भी स्वीकार किया कि पिछले कुछ दिनों से एक 'तथाकथित' सीसीटीवी वीडियो को लेकर जो विवाद चल रहा था, उसने प्रेम बाईसा को मानसिक रूप से तोड़ दिया था. वह अपने चरित्र पर लग रहे लांछन से बेहद आहत थीं. उनके करीबियों का कहना है कि वे एक सरल स्वभाव की थीं जिनका सपना सनातन धर्म का विश्व स्तर पर प्रचार करना था, लेकिन इस विवाद ने उन्हें शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से कमजोर कर दिया था.
पिता का संकल्प और विसरा रिपोर्ट का इंतजार
प्रेम बाईसा की मौत के बाद उनके पिता वीरमनाथ जी ने अन्न और जल पूरी तरह त्याग दिया था. भारी मान-मनौव्वल और साधु-संतों के हस्तक्षेप के बाद उन्होंने केवल जल ग्रहण करना स्वीकार किया है. फिलहाल, सभी की निगाहें विसरा (Viscera) रिपोर्ट पर टिकी हैं. संतों का कहना है कि जब तक लैब से पुख्ता रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक किसी भी थ्योरी पर मुहर नहीं लगाई जा सकती, लेकिन उन्हें प्रशासन पर पूरा भरोसा है.










