9वीं मंजिल से गिरीं 3 बहनें, कमरे में मिले कोरियन गेम के 'खौफनाक कोड'; चश्मदीद की जुबानी रात 2 बजे का सच

Ghaziabad incident news: गाजियाबाद की भारत सिटी सोसाइटी में तीन सगी बहनों के 9वीं मंजिल से गिरने की दर्दनाक घटना ने सभी को झकझोर दिया है. कमरे से मिले नोटपैड, कोरियन गेम से जुड़े संकेत और चश्मदीदों के बयान ने मामले को और रहस्यमय बना दिया है. जानिए पूरी घटना, जांच और चश्मदीद ने क्या कुछ बताए.

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गाजियाबाद सोसाइटी मामले में चश्मदीद ने बताई पूरी बात
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गाजियाबाद की भारत सिटी सोसाइटी में एक ऐसी रूह कंपा देने वाली घटना घटी है, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है. एक ही परिवार की तीन सगी बहनें अपनी 9वीं मंजिल के फ्लैट से एक के बाद एक नीचे गिर गईं. रात के करीब 2:00 से 2:15 बजे के बीच हुई इस घटना ने पूरी सोसाइटी में हड़कंप मचा दिया. चश्मदीदों के मुताबिक, सन्नाटे को चीरती हुई बच्चियों के चिल्लाने की आवाजें और फिर भारी चीज के गिरने की 'धप' की आवाज ने सबको डरा दिया. आइए जानते हैं चश्मदीद ने क्या-कुछ बताया.

'मार दिया-मार दिया' चिल्ला रहे थे पिता

सोसाइटी के बी-1 टावर में रहने वाले एडवोकेट कुमार ओंकारेश्वर ने बताया कि रात 2:00 बजे अचानक उन्हें चीखने की आवाज सुनाई दी. जब वे बालकनी में आए, तो नीचे बच्चियों के पिता और महिलाएं 'बचाओ-बचाओ, मार दिया-मार दिया' चिल्ला रहे थे. उन्होंने तुरंत 112 नंबर पर फोन कर एम्बुलेंस और पुलिस को बुलाया. एडवोकेट ने बताया कि स्ट्रीट लाइट्स बंद होने के कारण नीचे कुछ भी साफ दिखाई नहीं दे रहा था, केवल चीखें सुनाई दे रही थीं.

कमरे में मिले चौंकाने वाले सुराग

जब पुलिस और एसीपी अतुल कुमार सिंह ने 9वीं मंजिल पर स्थित फ्लैट नंबर 907 का दरवाजा तोड़ा (क्योंकि कमरा अंदर से बंद था), तो अंदर का नजारा हैरान करने वाला था. कमरे के फर्श पर बच्चियों की तस्वीरें एक घेरे (Circle) में सजी हुई थीं. बालकनी में एक स्टूल लगा हुआ था, जिससे संकेत मिले कि बच्चियां वहां से कूदीं या उन्हें नीचे भेजा गया. सबसे चौंकाने वाली बात एक नोटपैड का मिलना था, जिसमें लिखा था- 'हमें कोरिया जाने से रोकोगे'.

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क्या 'ब्लू व्हेल' जैसा ही है यह खौफनाक जाल?

एडवोकेट ने एआई (AI) की मदद से इस पूरे पैटर्न को समझने की कोशिश की और पाया कि यह मामला 'डेथ चैलेंज' या 'सुसाइड गेम्स' से मिलता-जुलता है. बताया जा रहा है कि इसमें 50 दिनों के 50 टास्क होते हैं, जिसमें आखिरी टास्क सुसाइड का होता है. बच्चियों के पिता ने भी पुलिस को बताया कि पिछले दो दिनों से उनकी बेटियां उनसे जिद कर रही थीं कि 'बाबा हमें कोरिया ले चलो'. बच्चियां सोशल मीडिया और कोरियन सीरीज 'स्क्विड गेम' जैसे कंटेंट से काफी प्रभावित लग रही थीं.

परिवार की आर्थिक तंगी और 'अकेलापन'

जांच में सामने आया कि परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा था और कोरोना काल के बाद से बच्चियां स्कूल नहीं जा पा रही थीं. वे दिन भर घर में रहकर मोबाइल पर ऑनलाइन गेम्स और कोरियन ड्रामा में डूबी रहती थीं. पड़ोसियों का कहना है कि बच्चियां बहुत आइसोलेटेड (अलग-थलग) रहती थीं और बाथरूम जाने जैसे छोटे काम के लिए भी तीनों बहनें हमेशा साथ ही रहती थीं.

अर्बनाइजेशन और माचिस के डिब्बे जैसे घर

एडवोकेट ओंकारेश्वर ने इस घटना को शहरीकरण (Urbanization) के दुष्प्रभावों से जोड़ा. उन्होंने कहा कि हम 'माचिस के डिब्बों' जैसे घरों में रहते हैं जहां पड़ोसी को पड़ोसी की खबर नहीं होती. मोबाइल बच्चों के सोशलाइजेशन का विकल्प बन गया है, जो बहुत खतरनाक है. उन्होंने गूगल और एलन मस्क जैसे तकनीकी दिग्गजों से भी ऐसे खतरनाक गेम्स पर लगाम लगाने की अपील की है.

यहां देखें वीडियो

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