रोबोटिक डॉग से लेकर 120 करोड़ का लोन विवाद: कौन हैं ध्रुव गलगोटिया? जानिए किताब की दुकान से अरबों के साम्राज्य तक का सफर
Who is Dhruv Galgotia: Galgotias University एआई समिट विवाद के बाद सुर्खियों में है. रोबोटिक डॉग के दावे से शुरू हुआ मामला अब सीईओ Dhruv Galgotia और उनके परिवार के पुराने 120 करोड़ रुपये के लोन विवाद तक पहुंच गया है. जानिए रोबोट विवाद, 2014 की गिरफ्तारी और पूरे मामले की अंदरूनी कहानी.

एआई समिट (AI Summit) में एक 'रोबोटिक डॉग' को अपना बताकर पेश करने के बाद गलगोटिया यूनिवर्सिटी (Galgotias University) इन दिनों सुर्खियों में है. लेकिन इस विवाद ने यूनिवर्सिटी के सीईओ ध्रुव गलगोटिया और उनके परिवार के पुराने किस्सों को भी हवा दे दी हैय आखिर कौन हैं ध्रुव गलगोटिया और क्यों 2014 में उन्हें सलाखों के पीछे जाना पड़ा था? आइए जानते हैं इस एजुकेशन साम्राज्य की पूरी कहानी.
350 करोड़ का 'रोबोट' और माफीनामा
विवाद तब शुरू हुआ जब एआई समिट के दौरान यूनिवर्सिटी की एक प्रोफेसर ने दावा किया कि उन्होंने ₹350 करोड़ खर्च करके एक रोबोटिक डॉग बनाया है. बाद में पता चला कि वह रोबोट एक चीनी कंपनी का था जिसकी कीमत करीब ₹2.5 लाख है. सोशल मीडिया पर फजीहत होने के बाद यूनिवर्सिटी ने माफी मांगते हुए कहा कि प्रोफेसर ऑथराइज्ड नहीं थीं और उन्होंने गलत जानकारी दी.
कनॉट प्लेस की एक दुकान से शुरुआत
गलगोटिया परिवार का सफर दिल्ली के कनॉट प्लेस (CP) में एक छोटी सी किताब की दुकान से शुरू हुआ था. 1930 में 'ईडी गलगोटिया एंड संस' के नाम से खुली यह दुकान परीक्षा की 'कुंजियां' (गाइड बुक्स) बेचने के लिए मशहूर थी. पब्लिकेशन के बिजनेस में सफलता पाने के बाद, सुनील गलगोटिया ने 2011 में ग्रेटर नोएडा में गलगोटिया यूनिवर्सिटी की स्थापना की. आज इसके चांसलर सुनील गलगोटिया हैं और उनके बेटे ध्रुव गलगोटिया सीईओ के तौर पर पूरा कामकाज देखते हैं.
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2014 का वो किस्सा: जब ध्रुव गलगोटिया को हुई जेल
सोशल मीडिया पर इन दिनों ध्रुव गलगोटिया की गिरफ्तारी की खबरें भी वायरल हो रही हैं. मामला 2014 का है, जब उन पर ₹120 करोड़ का लोन न चुकाने का आरोप लगा था. आगरा की एक इन्वेस्टमेंट कंपनी ने आरोप लगाया था कि शकुंतला एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसाइटी (यूनिवर्सिटी की मूल संस्था) ने ₹80 करोड़ का लोन लिया था, जो ब्याज समेत ₹120 करोड़ हो गया.
इस मामले में ध्रुव गलगोटिया को 13 अक्टूबर 2014 को गुरुग्राम से गिरफ्तार किया गया था. वे करीब एक हफ्ते तक जेल में रहे, जिसके बाद उन्हें जमानत मिली और बाद में हाईकोर्ट से राहत मिली.
थर्माकोल का प्लेन और सोशल मीडिया ट्रोलिंग
रोबोटिक डॉग के अलावा, एआई समिट में पेश किया गया एक 'फाइबर/थर्माकोल' का प्लेन भी चर्चा में है. कुछ लोगों ने वीडियो साझा कर दावा किया कि यूनिवर्सिटी इसे अपना एडवांस प्रोजेक्ट बता रही थी, जबकि असलियत में वह टेप और थर्माकोल से बना एक प्रोटोटाइप मात्र था. गलगोटिया यूनिवर्सिटी भले ही अपने विजन और बड़े दावों के लिए जानी जाती हो, लेकिन फिलहाल वह अपने ही दावों के जाल में उलझती नजर आ रही है.










