शंकराचार्य मामले में सीएम ने दिखाए तीखे तेवर तो डिप्टी सीएम कर रहे डैमेज कंट्रोल? 101 बटुकों के सम्मान से साध रहे ब्राह्मण वोट बैंक?
Shankaracharya controversy update: प्रयागराज के माघ मेले से शुरू हुआ शंकराचार्य विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा. योगी आदित्यनाथ के तीखे बयान के बाद अब डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने 101 बटुकों का सम्मान कर सियासी संदेश दिया है. क्या यह ब्राह्मण वोट बैंक साधने की कोशिश है? जानिए पूरा विवाद, राजनीति और संघ प्रमुख मोहन भागवत की मुलाकातों का मतलब.

प्रयागराज में लगा माघ मेला भले ही खत्म हो गया हो लेकिन वहीं से सामने आया शंकराचार्य विवाद आज भी नहीं थमा है. शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को पवित्र स्नान करने से रोकने के बाद यह विवाद शुरू हुआ और फिलहाल ब्राह्मण बटुकों के शिखा खींचने को लेकर लगातार विपक्ष सरकार पर हमला बोल रही थी. इसी बीच अब डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने डैमेज कंट्रोल करने के लिए 101 बटुक ब्राह्मणों को अपने आवास पर बुलाया और उनकी शिखा का सम्मान कर उनसे आशीर्वाद भी लिया.
ब्रजेश पाठक के इस कदम को राज्य की राजनीति के लिए काफी अहम माना जा रहा है और कहा है कि इससे वे ब्राह्मण वोट बैंक साधने की कोशिश कर रहे. वहीं दूसरी तरफ शंकराचार्य को लेकर सीएम ने जो टिप्पणी की थी उसकी भी जोरों पर चर्चा हो रही है. आइए विस्तार से समझते हैं पूरा मामला और पॉलिटिक्स.
डिप्टी सीएम ने 101 बटुकों का किया सम्मान
आज यानी 19 फरवरी को उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ने अपने आवास पर 101 बटुक ब्राह्मणों को आमंत्रित कर बुलाया और फिर उनका सम्मान किया. ब्रजेश पाठक ने बटुकों को फूल माला पहनाया, टीका लगाया और उनकी शिखा का सम्मान करते हुए आशीर्वाद भी लिया. ब्रजेश पाठक ने इस सम्मान के माध्यम से यह संदेश देना चाहा कि उनका सम्मान करना सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति सम्मान का प्रतीक है.
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ब्रजेश पाठक ने शिखा के सम्मान की कही थी बात
इससे पहले डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का एक बयान खूब सुर्खियों में रहा. दरअसल शिखा खींचने के मामले पर उन्होंने एक प्रोग्राम में कहा कि शिखा का सम्मान होना चाहिए और परंपराओं का आदर समाज की जिम्मेदारी है. उन्होंने शिखा खींचने को महापाप भी बाया और कहा कि जो लोग इसे छूते है उन्हें पाप लगेगा. ब्रजेश पाठक ने साफ कहा है कि इसके लिए बरसों बाद भी पाप लगेगा, सब खाता-बही में लिखा जा रहा. डिप्टी सीएम के इस बयान और 101 बटुकों के सम्मान को अब डैमेज कंट्रोल की तरह देखा जा रहा है और साथ ही कहा जा रहा है कि वे इससे ब्राह्मण वोट बैंक को साधने का काम कर रहे है.
सीएम योगी ने शंकराचार्य विवाद पर क्या दिया था विवाद?
इस मामले में 13 फरवरी को सीएम योगी आदित्यनाथ ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए तल्ख तेवर दिखाए थे. विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान सीएम ने साफ कहा था कि हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं लिख सकता है. उन्होंने साफ कहा कि माघ मेले में जहां करोड़ों श्रद्धालु आए हों, वहां सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करना जरूरी है. कोई भी कानून से ऊपर नहीं हो सकता है और कानून सबके लिए बराबर है. इसके अलावा उन्होंने सपा पर तंज कसते हुए कहा कि, अगर सपा के लोगों को उन्हें पूजना है तो पूजें, लेकिन हम मर्यादित लोग और कानून शासन जानते हैं. योगी आदित्यनाथ के इस बयान ने राजनीतिक पारा और हाई कर दिया था.
क्या है शंकराचार्य विवाद?
दरअसल यह विवाद माघ मेले के मौनी अमावस्या के दिन शुरु हुआ था. प्रशासन का आरोप है कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती अपनी पालकी में बैठकर प्रतिबंधित मार्ग से संगम की ओर जाने की जिद्द कर रहे थे, लेकिन इससे सुरक्षा व्यवस्था में परेशानी आ सकती थी. इसी को लेकर प्रशासन और शंकराचार्य के बीच तीखी बहस हुई. शंकराचार्य ने आरोप लगाया है कि प्रशासन ने उनके और बटुकों के साथ मारपीट की और उनकी शिखा तक खींचकर पीटा.
संघ प्रमुख भी कर रहे सीएम और डिप्टी सीएम से मुलाकात
फिलहाल शंकराचार्य विवाद पूरी तरह गर्म है. इसी बीच संघ प्रमुख मोहन भागवत ने बीती रात सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की. इस दौरान दोनों 35 मिनट तक साथ रहे. वहीं आज सुबह दोनों डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और जी पाठक से करीब 15-15 मिनट की मुलाकात हुई.सीएम के बाद दोनों डिप्टी सीएम के साथ संघ प्रमुख की इस मुलाकात को बेहद माना जा रहा है. इन मुलाकातों और डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के बटुकों के सम्मान को अब डैमेज कंट्रोल की तरह देखा जा रहा है.










