संघ प्रमुख और योगी आदित्यनाथ के मुलाकात के क्या हैं मायने, दोनों डिप्टी सीएम से मुलाकात कहीं डैमेज कंट्रोल एक्सरसाइज तो नहीं?

यूपी में 2027 की तैयारी शुरू! संघ प्रमुख मोहन भागवत की सीएम योगी और दोनों डिप्टी सीएम के साथ गुप्त बैठक. क्या यूपी बीजेपी और मंत्रिमंडल में होने वाला है बड़ा बदलाव? जानें मणिकर्णिका घाट विवाद और ब्राह्मण डैमेज कंट्रोल पर आरएसएस की नई रणनीति.

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पहले योगी और अब दोनों डिप्टी सीएम से मिले संघ प्रमुख.
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बीती रात योगी आदित्यनाथ से संघ प्रमुख मोहन भागवत की 35 मिनट की मुलाकात के बाद आज सुबह दोनों डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और जी पाठक से करीब 15-15 मिनट की मुलाकात हुई. सीएम के बाद दोनों डिप्टी सीएम के साथ संघ प्रमुख की इस मुलाकात को बेहद माना जा रहा है. उत्तर प्रदेश के सियासी माहौल को देखते हुए माना जा रहा है कि संघ प्रमुख है देश के इन तीनों शीर्ष नेताओं से अलग-अलग मुद्दों पर फीडबैक लिया है.

यूजीसी बिल, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद विवाद और मणिकर्णिका घाट ध्वस्तीकरण मामले के बाद भाजपा और सरकार के खिलाफ बने माहौल पर फीडबैक लिया है. 2027 चुनाव के पहले संघ संगठन और सरकार की तैयारी पर भी यह बातचीत हुई है ऐसा माना जा रहा है. इसके अलावा आने वाले महीनों में यूपी बीजेपी और सरकार में होने वाले बदलाव के भी संकेत हैं. माना जा रहा है की संभावित मंत्रिमंडल विस्तार और प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में संगठन की नई टीम पर भी चर्चा हुई है. 

 चाहे आरएसएस हो या फिर भाजपा का शीर्ष नेतृत्व 2027 के विधानसभा चुनाव को वह 2024 के लोकसभा चुनाव की तरह हारते देखना नहीं चाहेगा. यही वजह है कि संघ इस बार जमीन पर हाइपरएक्टिव होगा. जिस तरीके से 2024 पार्लियामेंट चुनाव के बाद संघ ने अपनी ताकत महाराष्ट्र हरियाणा और बिहार में दिखाई है, अब संघ भी 27 को लेकर अपनी भूमिका तय कर सकता है.
हालांकि अपनी इस दौर में एक सवाल के जवाब में संघ प्रमुख ने कहा कि वह बीजेपी को रिमोट कंट्रोल से नहीं चलाते बल्कि हिंदुओं के एजेंडे पर चलने वाले सभी दल उनके लिए एक समान है.

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आरएसएस प्रमुख से मुलाकात के पहले डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने 101 बटुकों का सम्मान किया.  इसे ब्राह्मणों की नाराजगी के डैमेज कंट्रोल के तौर पर देखा जा रहा है. जिस मुद्दे पर अखिलेश यादव लगातार योगी सरकार को घर रहे हैं और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर ब्राह्मण विरोधी होने का आरोप लगा रहे हैं. बीजेपी ने कहीं ना कहीं बृजेश पाठक को इस मामले पर आगे कर अखिलेश यादव से इस मुद्दे को छीनने की कोशिश की है.

यूं कहें तो सपा इस मुद्दे का सियासी फायदा ना उठा ले जाए इसलिए यह डैमेज कंट्रोल किया गया है. माना जा रहा है इसमें बीजेपी की सहमति है और शीर्ष नेतृत्व के निर्देश पर बृजेश पाठक न सिर्फ बटुकों का सम्मान कर रहे हैं बल्कि शंकराचार्य के समर्थन में खड़े भी दिखाई दे रहे हैं. इससे पहले केशव प्रसाद मौर्य भी शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में खुलकर आ चुके हैं.  इन तीनों शीर्ष नेताओं की संघ प्रमुख से मुलाकात उत्तर प्रदेश की सियासत के लिहाज से बेहद अहम हैं और ऐसा लगता है संघ उन मुद्दों को लेकर बेहद संजीदा है जो टकराव बढ़ा रहे हैं. 

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