भगवा पहनने से कोई योगी नहीं बन जाता... अखिलेश यादव का सीएम योगी पर तीखा हमला, भड़के संतों ने दी नसीहत
अखिलेश यादव ने सीएम योगी के पहनावे और धार्मिक पहचान पर सवाल उठाते हुए कहा कि भगवा पहनने से कोई योगी नहीं बन जाता, जिस पर संत समाज ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. यह विवाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को संगम स्नान से रोके जाने और उनके पद पर उठाए गए सवालों के बाद और गहरा गया है.

उत्तर प्रदेश की राजनीति में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के मुद्दे को लेकर संग्राम छिड़ गया है. समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर सीधा और विवादित हमला बोला है. अखिलेश यादव ने सीएम योगी की धार्मिक पहचान पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल भगवा वस्त्र धारण करने या कान छिदवाने से कोई योगी नहीं बन जाता. इस बयान के बाद संत समाज ने अखिलेश यादव को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है.
अखिलेश यादव का विवादित बयान
उन्नाव में एक कार्यक्रम के दौरान अखिलेश यादव ने शंकराचार्य विवाद पर बोलते हुए मुख्यमंत्री को निशाने पर लिया. उन्होंने कहा, "हमारे हिंदू धर्म में वस्त्रों का सम्मान होता है, लेकिन हमारे मुख्यमंत्री को कोई सम्मान नहीं है. गीता और गुरु नानक जी के वचनों के अनुसार, केवल वस्त्र पहनने या कान छिदवाने से कोई योगी नहीं हो जाता. अगर आपके अंदर इच्छाएं (Desires) हैं, तो आप योगी नहीं हो सकते."
अखिलेश ने आगे कहा कि सनातनी परंपरा में पूजनीय शंकराचार्य को गंगा स्नान से रोका गया, जो कि पाप है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब पाप पड़ेगा, तो इन्हें कौन बचाएगा?
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संत समाज का पलटवार
अखिलेश यादव के इस बयान पर अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती भड़क उठे. उन्होंने अखिलेश यादव को नसीहत देते हुए कहा, "राजनीति खूब कीजिए, लेकिन भाषाई मर्यादा का ध्यान रखिए. योगी आदित्यनाथ जी को आपसे सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है. आप अपने पिता की वसीयत और विरासत पर राजनीति कर रहे होंगे, लेकिन योगी जी गोरक्षपीठ की तीन पीढ़ियों के तपस्वी नायक हैं."
क्या है पूरा विवाद?
यह पूरा विवाद माघ मेले के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को संगम स्नान के लिए जाते समय पुलिस द्वारा रोके जाने से शुरू हुआ. इसके बाद प्रशासन ने उनके 'शंकराचार्य' पद के टाइटल को लेकर सवाल उठाए और नोटिस थमा दिया. विधानसभा में सीएम योगी ने भी कहा था कि मर्यादाओं का पालन सबको करना होगा और कोई भी यूं ही शंकराचार्य नहीं लिख सकता. इसी मुद्दे पर अब अखिलेश यादव और योगी आदित्यनाथ के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है.










