बिना किसी प्रोटोकॉल के शादी समारोह में पहुंचे अखिलेश यादव, सादगी देख मुरीद हुआ परिवार, 'मठा के आलू' पर हुई चर्चा
Akhilesh Yadav Viral Video: इटावा के एक गांव में शादी समारोह के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव बिना प्रोटोकॉल पहुंचे और परिवार के साथ जमीन पर बैठकर समय बिताया. सादगी भरे इस पल में 'मठा के आलू' की चर्चा, परिवार के साथ सेल्फी और प्लास्टिक का उपयोग न करने की सीख ने इस घटना को खास बना दिया. आइए विस्तार से जानते है पूरी कहानी.

राजनीति की चकाचौंध से दूर जब कोई बड़ा नेता जमीन पर उतरकर आम आदमी के बीच बैठता है, तो वह पल उस परिवार के लिए ताउम्र की पूंजी बन जाता है. ऐसा ही कुछ हुआ इटावा के नंगला कहरी गांव के रहने वाले राजेंद्र सिंह के परिवार के साथ. 14 फरवरी की तारीख इस परिवार के लिए दोहरी खुशी लेकर आई- एक तरफ बेटे की शादी का मंडप सज रहा था, तो दूसरी तरफ सपा मुखिया अखिलेश यादव बिना किसी प्रोटोकॉल के उनके दरवाजे पर खड़े थे.
'उम्मीद नहीं थी कि इतने बड़े नेता हमारे घर आएंगे'
राजेंद्र सिंह और उनके बेटे राजीव यादव (दूल्हा) बताते हैं कि उन्होंने अखिलेश यादव को शादी का कार्ड तो भेजा था, लेकिन उन्हें यह बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि वे आएंगे. राजीव के भाई ने भावुक होकर बताया, 'हम लोग तो अक्सर उनके यहां (सैफई) खाना खाने जाते रहते हैं, लेकिन हमें कभी नहीं लगा था कि वह हमारे छोटे से घर में रुकेंगे.' जब अखिलेश यादव का काफिला अचानक रुका और वे अंदर आए, तो पूरे परिवार की आंखें फटी की फटी रह गईं. उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा था कि साक्षात पूर्व मुख्यमंत्री उनके आंगन में मौजूद हैं.
मठा के आलू का स्वाद और परिवार का खास सम्मान
परिवार ने अखिलेश यादव का स्वागत इटावा की मशहूर डिश 'मठा के आलू' से किया. राजेंद्र सिंह के परिवार ने बताया कि उनके घर की रसोइया और परिवार के लोग खुद ही खाना बना रहे थे. अखिलेश यादव ने न केवल बड़े चाव से आलू खाए, बल्कि परिवार के साथ काफी समय भी बिताया. दूल्हे के पिता ने बताया कि अखिलेश जी ने उनके और उनके पिता का नाम अपनी डायरी में नोट किया. परिवार को यह देखकर बेहद खुशी हुई कि इतना बड़ा नेता होने के बावजूद उन्होंने एक-एक सदस्य की बातों को ध्यान से सुना और बच्चों को आशीर्वाद दिया.
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'भैया, मेरी ओर देख लो': रूबी यादव का वो यादगार पल
इस मुलाकात के दौरान परिवार की बहू रूबी यादव का वीडियो सबसे ज्यादा वायरल हो रहा है. रूबी बताती हैं कि जब अखिलेश भैया आए तो वे घर के अंदर नाच-गाना कर रही थीं. जैसे ही उन्हें पता चला कि अखिलेश यादव आए हैं, वे तुरंत बाहर दौड़ीं. भीड़ इतनी थी कि फोटो लेना मुश्किल था, तब उन्होंने बड़े ही अपनेपन से आवाज लगाई, 'भैया, मेरी ओर देख लो मेरे कैमरा में'. अखिलेश यादव ने भी बिल्कुल अपनों की तरह उनकी ओर देखा और सेल्फी दी. रूबी कहती हैं कि उन्हें लगा ही नहीं कि वह कोई बड़े नेता हैं, वे तो बिल्कुल गांव के किसी अपने बड़े भाई जैसे लगे.
परिवार ने ली प्लास्टिक न इस्तेमाल करने की शपथ
मुलाकात के दौरान जब परिवार के सदस्य ने अखिलेश यादव को प्लास्टिक के डिस्पोजल गिलास में मठा के आलू दिए, तो उन्होंने बड़े ही प्यार से समझाया. अखिलेश यादव ने परिवार को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करते हुए कहा कि प्लास्टिक के बर्तनों से कैंसर जैसी बीमारियां हो सकती हैं, इसलिए गर्म चीजों के लिए हमेशा मिट्टी के कुल्हड़ का ही उपयोग करें. इस सीख का परिवार पर इतना गहरा असर हुआ कि उन्होंने अब तय किया है कि भविष्य में किसी भी शुभ कार्य में वे प्लास्टिक का उपयोग नहीं करेंगे और केवल मिट्टी के बर्तनों (कुल्हड़) को ही जगह देंगे.
नेताजी की यादें हुईं ताजा
राजेंद्र सिंह के परिवार के लिए यह मुलाकात सिर्फ एक नेता का आना नहीं था, बल्कि उन्हें इसमें 'नेताजी' (मुलायम सिंह यादव) की झलक दिखाई दी. उन्होंने कहा, 'नेताजी का स्वभाव भी ऐसा ही सरल था, लेकिन आज हमें अखिलेश भैया में उनसे भी बढ़कर सादगी दिखी.' 15 फरवरी को राजीव की बारात गई, लेकिन पूरे रास्ते और शादी में चर्चा सिर्फ उसी 14 फरवरी के उस पल की होती रही, जब अखिलेश यादव ने उनके घर कदम रखे थे.
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