बिहार की 5 राज्यसभा सीटों पर घमासान! क्या इस बार AIMIM तय करेगी पूरा गेम? जानें NDA के संभावित उम्मीदवारों के नाम

Bihar Rajya Sabha Election 2026: बिहार राज्यसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है. 9 अप्रैल को खाली हो रही 5 सीटों पर NDA, RJD और AIMIM के बीच जबरदस्त राजनीतिक घमासान देखने को मिल सकता है. क्या AIMIM इस बार किंगमेकर बनेगी? जानें NDA के संभावित उम्मीदवारों के नाम से लेकर राज्य का पूरा गुणा-गणित?

Bihar Rajya Sabha Election 2026
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बिहार की राजनीतिक गलियारों में राज्यसभा चुनाव को लेकर सरगर्मी तेज हो चुकी है. 9 अप्रैल 2026 को राज्य की 5 राज्यसभा सीटें खाली हो रही हैं, जिसके लिए चुनाव आयोग ने 16 मार्च को चुनाव कराने का ऐलान किया है. चुनावी ऐलान के बाद एक ओर जहां NDA पांचों सीटें जीतने की जुगत में लग गई है तो दूसरी ओर राजद के लिए अपनी एक सीट बचाना भी मुश्किल लग रहा है. हालांकि NDA के खाते में 4 सीटें है लेकिन उन्हें भी 5वीं सीट के लिए जद्दोजहद करनी पड़ेगी. इसके अलावा यह सवाल भी उठ रहा है कि अगर NDA के पाले में सारी सीटें चली जाएंगी तो उम्मीदवार कौन-कौन होगा? आइए विस्तार से जानते हैं पूरा गुणा-गणित और संभावित नाम.

किनका कार्यकाल हो रहा खत्म?

राज्यसभा की जो 5 सीटें खाली हो रही है उसमें जदयू, आरएलएम और राजद कोटे के नेता है. नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड(जदयू) के दो राज्यसभा सांसद हरिवंश नारायण सिंह और रामनाथ ठाकुर का कार्यकाल खत्म हो रहा है. एनडीए की सहयोगी पार्टी और आरएलएम प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा का भी कार्यकाल समाप्त हो रहा है. वहीं राजद कोटे से प्रेमचंद गुप्ता और अमृतधारी सिंह का कार्यकाल समाप्त हो रहा है.

विधानसभा चुनाव ने पलट दिया सारा खेल

नवंबर 2025 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में इस बार पूरे खेल को ही पलट दिया क्योंकि 2020 चुनाव के मुकाबले सियासी अंकगणित ही बड़ा उल्टफेर हुआ है. हाल में हुए विधानसभा चुनाव में NDA को 202 सीटें मिली, महागठबंधन को 35, AIMIM को 5 और बसपा को 1 सीट मिली थी. अब राज्यसभा चुनाव के लिए एक उम्मीदवार को कम से कम 41 विधायकों की जरूरत है.

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ऐसे में देखा जाएं तो NDA के 202 सीटें है, जिससे उनकी 4 सीटें जीतना लगभग तय है. इसके अलावा उनके पास 38 विधायक बचते हैं. अब उन्हें 5वीं सीट के लिए 3 और विधायकों के समर्थन की जरूरत है. वहीं महागठबंधन के पास 35 सीटें है तो उन्हें अब 6 विधायकों के समर्थन की जरूरत है. अगर AIMIM के पांच विधायक और बसपा के 1 विधायक उन्हें समर्थन देते है तो महागठबंधन के खाते में एक सीट जा सकती है. 

कुशवाहा की नहीं होगी राज्यसभा में वापसी?

इस बार कहा जा रहा है कि राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा की दोबारा राज्यसभा में वापसी नहीं होगी. इस बार उनका रास्ता बिल्कुल बंद है और इसके पीछे की वजह भी साफ है विधायकों की संख्या. उपेंद्र कुशवाहा के पास कुल 4 विधायक है जिनमें से 2 बागी हो चुके है. ऐसे में उपेंद्र कुशवाहा अपने दम पर तो राज्यसभा जाने से रहें.

हालांकि उन्हें राज्यसभा जाने के लिए जदयू या बीजेपी विधायकों की सहायता की जरूरत पड़ेगी. अगर जदयू या बीजेपी चाहे की वो राज्यसभा जाएं तो यह संभव हो सकता है, लेकिन मौजूदा परिस्थिति में यह नामुमकिन लग रहा है क्योंकि उनके बेटे को एक मंत्री पद पहले ही मिल चुका है. 

आरजेडी की झोली हो जाएगी खाली?

पिछले चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल के पास अधिक विधायक थे और इसी बल पर उन्होंने 2 सीटों पर अपना कब्जा जमा लिया. लेकिन 2025 विधानसभा चुनाव में सारी परिस्थितियां पलट गई और अब उनके पास पर्याप्त संख्या नहीं है. ऐसे में अगर उन्हें AIMIM के 5 और बसपा के 1 विधायक का सपोर्ट मिलता है तब जाकर संख्या 41 होगी और उन्हें 1 सीट मिल सकती है. लेकिन बीते कल ही AIMIM के बिहार प्रदेश अध्यक्ष और विधायक अख्तरुल ईमान ने साफ कर दिया है कि वो किसी की पिछलग्गू पार्टी नहीं बनेगी. यानी गेम पूरी तरह फंसा हुआ दिखाई दे रहा है.

NDA के संभावित उम्मीदवार कौन?

इन हालातों को देखते हुए यह साफ है कि इस बार NDA का ही पलड़ा भारी है और 4 सीटें पक्की है. साथ ही 5वीं सीट के लिए मंथन जारी है और प्रयास किया जा रहा है कि इस बार महागठबंधन को क्लीन स्वीप दे दिया जाए. वहीं एनडीए के भीतर भाजपा, जदयू, लोजपा सहित अन्य सहयोगी दलों के बीच सीटों को लेकर बात आखिरी चरण में है. कहा जा रहा है कि इस बार बीजेपी जातीय संतुलन, जनता के बीच प्रभाव, प्रतिनिधत्व और हाई-प्रोफाइल चेहरे वाले उम्मीदवारों को सामने लाएगी. 

इसमें पहला नाम पवन सिंह का आ रहा है क्योंकि जिस तरह से विधानसभा चुनाव में उनकी सभा में लोग पहुंच रहे थे, उससे पार्टी प्रभावित है. साथ ही पवन सिंह जनता के बीच एक चहेता चेहरा भी है. पवन सिंह के बाद संजय मयूख का नाम भी सामने आ रहा है. संजय संगठन में काफी लंबे समय से एक्टिव है और उन पर केंद्रीय नेतृ्त्व का भरोसा भी है. इसके अलावा समीकरणों को साधने के लिए वह बिहार के किसी बड़े ब्राह्मण या राजपूत नेता को उम्मीदवार बना सकते हैं. साथ ही बीजेपी एक सीट प्रोफेशनल्स को देती है तो इसके मुताबिक एक बाहरी चेहरे को भी जगह मिल सकती है.

जदयू से कौन-कौन हो सकता है मैदान में?

नीतीश कुमार अपनी पार्टी जदयू कोटे से 2 उम्मीदवार को राज्यसभा भेज सकते है. इसमें एक नाम तो रामनाथ ठाकुर का है, जिन्हें फिर से राज्यसभा भेजा जा सकता है. इसे पार्टी की सामाजिक समीकरण को साधने की रणनीति बताई जा रही है. वहीं हरिवंश नारायण सिंह को पार्टी वापस से राज्यसभा नहीं भेजेगी और इसके जगह नए चेहरे पर दांव लगा सकती है. इसलिए किसी अल्पसंख्यक चेहरे को मौके दे सकती है.

चिराग पासवान का क्या होगा?

बीजेपी और जदयू के अलावा चिराग पासवान एक राज्यसभा सीट अपने पाले में लेने की फिराक में है. चिराग पासवान की मां रीना पासवान को राज्यसभा भेजने की चर्चाएं तेज है लेकिन उन्हें इसलिए काफी मशक्कत करना पड़ सकता है. चिराग पासवान को विपक्षी विधायकों का समर्थन लेना होगा क्योंकि वे खुद अपने बल पर राज्यसभा नहीं जा सकते है.

AIMIM बनेगी किंगमेकर!

विधानसभा चुनाव में भले ही ओवैसी की पार्टी AIMIM कुछ बड़ा नहीं कर सकी हो लेकिन राज्यसभा के लिहाजे से वह दोनों ही गठबंधन NDA और महागठबंधन के लिए जरूरी है. एक ओर NDA को जहां 3 विधायक चाहिए तो वहीं महागठबंधन को 6 विधायकों की जरूरत है. 

अब AIMIM के विधायक कुछ दिन पहले ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिले थे तो कयास लगाए जा रहे है कि उन्हें ही समर्थन मिले. लेकिन AIMIM नेता अख्तरुल ईमान ने कहा है कि वह अपना उम्मीदवा उतारेगी. ऐसे में देखना यह दिलचस्प होगा कि AIMIM किसे समर्थन देती है और महागठबंधन का खाता भी खुलता है कि नहीं?

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