नीतीश सरकार की पहल, जीविका दीदियां बनीं समाज सुधार की अगुवाई
नशामुक्ति, बाल विवाह रोकथाम और महिलाओं के सशक्तिकरण में जीविका समूहों की अहम भूमिका से गांव–गांव में सकारात्मक बदलाव हो रहा है.
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जीविका दीदियां बिहार की नई ताकत बन कर उभरीं हैं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में शुरू हुई ‘जीविका’ योजना की वजह से न केवल बिहार की महिलओं को आर्थिक मजबूती मिल रही है बल्कि वो बिहार के विकास की मजबूत कड़ी बन चुकी हैं. इतना ही नहीं जीविका समूहों से जुड़ी महिलाएं सामाजिक बदलाव की भी गाथा लिख रहीं हैं. जिसका नतीजा है कि सीएम नीतीश ने उनके योगदान को सराहते हुए मान देय में बढ़ोतरी की है.
सक्रीय जीविका समूहों ने समाज को दिखाई राह
बिहार सरकार के आंकड़ों की माने तो बिहार के गांवों में इनकी भूमिका काफी अहम हो गई है. गांव–गांव में जीविका की सक्रिय 60,000 से ज्यादा ग्राम संगठन हैं, जो आज नशामुक्त का संदेश और उसके अपनी सक्रीय भूमिका निभाकर समाज को राह दिखा रही हैं.
जीविका दीदियों के नेतृत्व में चलाए जा रहे अभियान
नतीजन अब महिलाओं की अगुवाई में ही जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं. जागरूकता रैलियां, नुक्कड़ नाटक और चौपाल पर बैठकें की जा रही हैं. ये सब जीविका से जुड़ी गांव की आम सी दिखने वाली महिलाएं कर रही हैं.
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कुरीतियों में सुधार
शराब के सेवन और तंबाकू के नुकसान की जो जागरूकता जीविका दीदियों ने फैलाई है, उसने सामाजिक व्यवहार की कुरीतियों पर काबू पाने में अहम भूमिका निभाई है. जिन इलाकों में कभी नशा आम बात थी, वहां अब सामाजिक दबाव और सामूहिक चेतना से सकारात्मक माहौल दिखाई दे रहा है. शराबबंदी कानून को सफल बनाने और शराब माफियाओं को कमजोर करने में भी इनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है.
समाज सुधार की मिसाल बनीं दीदियां
गौर करने वाली बात ये कि सीएम नीतीश कुमार के विजन से बाल विवाह रोकथाम और शराबबंदी नियमों के अनुपालन में भी जीविका दीदियों की सक्रिय भागीदारी निर्णायक साबित हो रही है. ग्रामीण विकास विभाग का यह अभियान अब समाज सुधार की सबसे बड़ी मिसाल बनता जा रहा है.