प्रशांत किशोर की जन सुराज का कांग्रेस में होगा विलय? प्रियंका गांधी से मुलाकात के बाद पीके ने खोल दिया राज
बिहार की राजनीति में प्रशांत किशोर और प्रियंका गांधी की मुलाकात ने सियासी पारा चढ़ा दिया है. क्या जन सुराज का कांग्रेस में मर्जर होने वाला है? गोपालगंज पहुंचे प्रशांत किशोर ने इन अटकलों पर पहली बार खुलकर अपनी बात रखी है. जानिए पीके ने गठबंधन और भविष्य की रणनीति को लेकर क्या बड़ा इशारा किया है.

Prashant Kishor on Party Merger: बिहार की सियासत में इन दिनों एक ही सवाल गूंज रहा है कि क्या चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर (PK) अपनी पार्टी जन सुराज का कांग्रेस में विलय करने जा रहे हैं? दरअसल इस खबर को और हवा तब मिली जब दिल्ली में प्रियंका गांधी और प्रशांत किशोर की मुलाकात की खबरों सामने आई. सोशल मीडिया पर चल रही इन अटकलों पर खुद प्रशांत किशोर ने अपनी चुप्पी तोड़ी है. ऐसे में खबर में जानिए उन्होंने इस मामले में क्या...
प्रियंका गांधी से मुलाकात पर क्या बोले पीके?
गोपालगंज के दौरे पर पहुंचे प्रशांत किशोर से जब पत्रकारों ने प्रियंका गांधी के साथ उनकी गुप्त मुलाकात और पार्टी के मर्जर (विलय) को लेकर सवाल किया तो उन्होंने इसे सिरे से खारिज नहीं किया. पीके ने मुस्कराते हुए कहा, "सोशल मीडिया पर तो बहुत कुछ चलता रहता है. अगर मैं दिल्ली गया हूं तो वहां पुराने परिचितों और नेताओं से मिलना कोई बड़ी बात नहीं है. मुलाकातें तो होती रहती हैं." हालांकि, उन्होंने मर्जर की खबरों को 'सोशल मीडिया का दावा' बताते हुए फिलहाल टाल दिया लेकिन प्रियंका गांधी से मिलने की बात से इनकार भी नहीं किया.
क्या बिहार में बदलेगा सियासी समीकरण?
साल 2025 के विधानसभा चुनावों में जन सुराज को उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिली. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार जैसे राज्य में बिना गठबंधन के आगे बढ़ना किसी भी नई पार्टी के लिए बड़ी चुनौती है. ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या प्रशांत किशोर अब गठबंधन की राजनीति की ओर कदम बढ़ा रहे हैं? कांग्रेस और पीके का साथ आना बिहार में आरजेडी (RJD) के लिए भी चिंता का विषय बन सकता है.
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कांग्रेस और पीके का पुराना रिश्ता
प्रशांत किशोर पहले भी कांग्रेस के लिए चुनावी रणनीतिकार के तौर पर काम कर चुके हैं. हालांकि, बीच में रिश्तों में खटास आई थी, लेकिन प्रियंका गांधी के साथ उनकी हालिया बातचीत भविष्य में किसी नए 'सियासी प्रयोग' की ओर इशारा कर रही है. हलांकि, फिलहाल पीके ने पत्तों को पूरी तरह नहीं खोला है, लेकिन अब बिहार की राजनीति में इस बात की चर्चा है कि क्या ये सिर्फ एक औपचारिक मुलाकात थी या कुछ और?
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