डॉ अंबेडकर के अपमान केस में एडवोकेट अनिल मिश्रा को राहत, हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल!

मध्य प्रदेश ग्वालियर अंबेडकर अपमान केस में हाईकोर्ट ने अनिल मिश्रा गिरफ्तारी असंवैधानिक बताकर एक लाख मुचलके पर जमानत दी, अदालत ने पुलिस प्रक्रिया एफआईआर टाइमिंग और सुरक्षा लापरवाही पर कड़ी टिप्पणी कर प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया है.

Gwalior Anil Mishra Case
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Gwalior Anil Mishra Case: मध्य प्रदेश के ग्वालियर में डॉ. भीमराव अंबेडकर के अपमान से उपजा विवाद अब कानूनी गलियारों में एक नई चर्चा का विषय बन गया है. इस मामले में गिरफ्तार हुए हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अनिल मिश्रा की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने एक ऐसा फैसला सुनाया है, जिसने पुलिस प्रशासन की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा कर दिया है. 

हाईकोर्ट की डबल बेंच के सामने जब ये मामला पहुंचा तो बहस के दौरान कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं. अदालत ने इस बात पर हैरानी जताई कि जब यह पूरी घटना पुलिस के आला अधिकारियों के दफ्तर के सामने हो रही थी तब सुरक्षा बल क्या कर रहे थे? गिरफ्तारी की प्रक्रिया से लेकर एफआईआर की टाइमिंग तक, हर पहलू पर कोर्ट ने तीखी टिप्पणी की है

कोर्ट ने क्या कहा

विस्तृत सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने अनिल मिश्रा की गिरफ्तारी को गलत और असंवैधानिक करार दिया है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यद्यपि एफआईआर सही है, लेकिन जिस तरह से अनिल मिश्रा को हिरासत में लिया गया, वह प्रक्रियात्मक रूप से त्रुटिपूर्ण था. हाईकोर्ट ने कहा कि एफआईआर दर्ज होने के बाद उन्हें नोटिस देकर भी छोड़ा जा सकता था, लेकिन कस्टडी में लेना अनावश्यक था.

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अनिल मिश्रा के वकील ने कोर्ट में दलील दी कि ग्वालियर पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों और एससी-एसटी एक्ट के प्रावधानों का पालन नहीं किया. आरोप लगाया गया कि पहले उन्हें गिरफ्तार किया गया और उसके बाद कागजी कार्रवाई पूरी की गई, यहाँ तक कि उनके परिवार को भी सूचित नहीं किया गया. अदालत ने इन दलीलों को गंभीरता से लेते हुए अनिल मिश्रा को 1 लाख रुपये के मुचलके पर जमानत दे दी है.

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद तब शुरू हुआ था जब हाईकोर्ट परिसर में डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा लगाने को लेकर दो गुट आमने-सामने आ गए थे. एक पक्ष प्रतिमा के समर्थन में था जबकि दूसरा विरोध में. विवाद बढ़ता गया और नौबत गाली-गलौज और अपमानजनक कृत्यों तक पहुंच गई. अब कोर्ट के इस रुख के बाद पुलिस और प्रशासन पर लापरवाही के गंभीर आरोप लग रहे हैं. इस मामले में गिरफ्तार अन्य तीन आरोपियों को भी जल्द राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.

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