उत्तर प्रदेश सरकार ने असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा को किया निरस्त, जानें ऐसा क्या हुआ कि लेना पड़ा फैसला?

UP Assistant Professor exam cancelled: उत्तर प्रदेश सरकार ने असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा को निरस्त करने का बड़ा फैसला लिया है. परीक्षा में सॉल्वर गैंग, फर्जी प्रश्नपत्र, अवैध धन वसूली और पेपर लीक जैसे गंभीर मामलों के पुख्ता सबूत मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई. STF की जांच में कई आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गोपनीय जांच के बाद परीक्षा की शुचिता भंग होने की पुष्टि हुई.

UP Assistant Professor exam cancelled
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उत्तर प्रदेश सरकार ने असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने अभ्यर्थियों के हित को ध्यान में रखते हुए यह भर्ती परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया है. इस परीक्षा को लेकर कराई गई जांच में सामने आया कि परीक्षा में सॉल्वर गैंग, अवैध धन वसूली और प्रश्नपत्र लीक जैसे गंभीर अनियमितताएं हुई थीं. मामले की जानकारी यूपी एसटीएफ को पहले ही मिल चुकी थी.  एसटीएफ की कार्रवाई में महबूब अली, वैभव पाल और विशाल पाल को गिरफ्तार किया गया है. जांच में स्पष्ट संकेत मिले कि परीक्षा की शुचिता भंग हुई है. आरोप है कि फर्जी प्रश्नपत्र तैयार कर अभ्यर्थियों से मोटी रकम वसूली गई.

परीक्षा और जांच के आदेश

उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा विज्ञापन संख्या-51 के तहत असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा 16 और 17 अप्रैल 2025 को आयोजित की गई थी. लेकिन गोपनीय जांच और डेटा एनालिसिस में धांधली की पुष्टि होने के बाद सरकार ने सख्त कदम उठाया. मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोपनीय जांच के निर्देश दिए थे.

20 अप्रैल 2025 को एसटीएफ ने फर्जी प्रश्नपत्र बनाकर ठगी करने वाले गिरोह के सदस्यों को गिरफ्तार किया. इस मामले में लखनऊ के विभूतिखंड थाने में गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया है.

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पूछताछ में सामने आई ये जानकारी

पूछताछ में अभियुक्त महबूब अली ने स्वीकार किया कि उसने मॉडरेशन प्रक्रिया के दौरान ही विभिन्न विषयों के प्रश्नपत्र निकाल लिए थे और उन्हें पैसे लेकर अभ्यर्थियों तक पहुंचाया. STF की विवेचना और डेटा एनालिसिस से इस बात की पुष्टि हुई है.

जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर मुख्यमंत्री ने परीक्षा निरस्त करने के आदेश दिए हैं. उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को निर्देश दिया गया है कि नई परीक्षा शीघ्र, पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से आयोजित की जाए.

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