जनरल नरवणे की किताब का 'रहस्य': पेंगुइन ने कहा- 'नहीं छपी', राहुल ने दिखाई पहले Book फिर 2023 का ट्वीट, आखिरकार नरवणे ने तोड़ी चुप्पी
Gen MM Naravane Statement on Book: जिस किताब की चर्चा कर राहुल गांधी ने बड़ा तूफान खड़ा कर दिया, जनरल नरवणे की वो किताब 'फोर स्टार ऑफ डेस्टिनी' प्रकाशित हुई है या नहीं. यदि नहीं हुई तो राहुल गांधी के हाथों में किताब कैसे आई? खुद एमएम नरवणे और पब्लिशर ने इस पूरे मामले पर क्या कहा? पढ़ें पूरी रिपोर्ट

संसद के इस बजट सत्र में बजट पर कम पूर्व आर्मी चीफ मनोज मुकुंद नरवणे की किताब पर ज्यादा चर्चा हो रही है. चर्चा इतनी है कि संसद नहीं चल पा रहा है. शुरूआत उस किताब में डोकलाम विवाद से जुड़े एक अंश से शुरू हुआ और अब चर्चा इस बात पर है कि किताब छपी है या नहीं. इधर जिस किताब से जुड़े कुछ पन्ने राहुल गांधी सदन में ले गए उसपर सवाल उठते ही किताब लेकर पहुंच गए.
सरकार का दावा है कि किताब का अप्रूवल रक्षा मंत्रालय के पास पेंडिंग है. फिर बिना अप्रूवल के किताब छपी कैसे और कहां मिल रही है. इधर राहुल गांधी ने जैसे ही कहा कि किताब भारत में प्रकाशित होने के लिए रुकी है विदेशों में नहीं. फिर अमाजॉन का नाम लिया. इधर विवाद बढ़ने लगा तो पहले किताब का पब्लिशर पेंगुइन और अब खुद पूर्व आर्मी चीफ नरवणे का जवाब भी आ गया.
पेंगुइन का जवाब आते ही राहुल गांधी ने फिर सवाल उठा दिया- 'जनरल झूठ बोल रहे हैं या पब्लिशर?' संसद के बाहर पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए राहुल गांधी ने सीधे तौर पर जनरल नरवणे के 15 दिसंबर 2023 के एक ट्वीट का हवाला दिया. राहुल गांधी ने मोबाइल पर वह ट्वीट दिखाते हुए कहा- "हियर इज अ ट्वीट फ्रॉम मिस्टर नरवणे... यह देख लीजिए... इसमें नरवणे जी खुद लिख रहे हैं- 'हेलो फ्रेंड्स, माय बुक इज अवेलेबल नाउ, जस्ट फॉलो द लिंक.' अब आप बताइए, क्या देश का पूर्व सेना प्रमुख झूठ बोल रहा है या पब्लिशर पेंगुइन? मैं सेना प्रमुख की बात पर भरोसा करता हूं.'
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पेंगुइन का किताब प्रकाशित करने से साफ इनकार
विवाद बढ़ने पर पब्लिशर पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने सफाई दी कि किताब अभी तक प्रकाशित नहीं हुई है. न ही इसकी कोई छपी हुई कॉपी आई है और न ही डिजिटल. जो भी कॉपी बाजार में है, वह कॉपीराइट का उल्लंघन है. लेकिन सोशल मीडिया पर लोगों ने पेंगुइन की ही वेबसाइट के पुराने स्क्रीनशॉट्स साझा कर दिए, जिसमें इस किताब को 'पब्लिश्ड' दिखाया गया था. हैरानी की बात यह है कि अब वह पेज वेबसाइट से 'गायब' (Page Not Found) नजर आ रहा है.
पेंगुइन ने पब्लिश और अनपब्लिश बुक पर दिया ये तर्क
पेंगुइन ने सोशल मीडिया X पर एक पोस्ट साझा क कहा- 'एक अनाउंस्ड बुक, प्री-ऑर्डर के लिए उपलब्ध पुस्तक और एक प्रकाशित पुस्तक, ये तीनों एक ही चीज नहीं हैं.
- पुस्तक की घोषणा (Book announced): प्रकाशक ने साझा किया है कि एक पुस्तक की योजना बनाई गई है. यह अभी तक प्रकाशित नहीं हुई है और न ही बिक्री के लिए उपलब्ध है.
- प्री-ऑर्डर के लिए उपलब्ध पुस्तक (Book available for pre-order): प्री-ऑर्डर एक मानक प्रकाशन प्रक्रिया है. यह पाठकों और खुदरा विक्रेताओं (retailers) को अग्रिम ऑर्डर देने की अनुमति देता है. पुस्तक अभी तक प्रकाशित या उपलब्ध नहीं हुई है.
- भविष्य की तारीख के लिए निर्धारित पुस्तक (Book scheduled for a future date): एक निर्धारित प्रकाशन तिथि का अर्थ है कि पुस्तक विमोचन (release) के लिए नियोजित है. इसका मतलब यह नहीं है कि पुस्तक प्रकाशित हो चुकी है.
- प्रकाशित पुस्तक (Published book): एक पुस्तक तभी प्रकाशित मानी जाती है जब वह खरीद के लिए रिटेल चैनलों पर उपलब्ध होती है.
PDF लीक हुआ तो दिल्ली पुलिस ने दर्ज की FIR
सोमवार को इस किताब के टाइटल वाली एक PDF सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगी. इसके बाद दिल्ली पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बिना रक्षा मंत्रालय (MoD) की मंजूरी वाली इस अनपब्लिश्ड किताब का कंटेंट पब्लिक डोमेन में कैसे पहुंचा.
क्या किताब के अंदर है 'विस्फोटक' कंटेंट?
संसद के बजट सत्र में राहुल गांधी ने 'The Caravan' (कारवां) मैगजीन के आर्टिकल का हवाला देते हुए किताब के कुछ हिस्सों को पढ़ना चाहा. राहुल के मुताबिक, किताब में जनरल नरवणे ने जिक्र किया है कि- ''2020 में लद्दाख में चीनी सेना भारतीय पोजीशन के बेहद करीब आ गई थी. नरवणे ने टॉप लीडरशिप से स्पष्ट आदेश (Orders) मांगे थे, लेकिन उन्हें कथित तौर पर जवाब नहीं मिला. अग्निपथ योजना को लेकर भी सेना के भीतर के संशयों का इसमें जिक्र बताया जा रहा है.''
राहुल गांधी की बात पर भड़के राजनाथ सिंह
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह ने राहुल की बात को यह कहकर काट दिया कि जो किताब पब्लिश ही नहीं हुई, उसे सदन में कोट (Quote) नहीं किया जा सकता.
खुद जनरल नरवणे ने क्या कहा था?
अगस्त 2024 न्यूज तक के कार्यक्रम 'मंच' के एक साक्षात्कार में जनरल नरवणे ने स्पष्ट किया था कि उन्होंने मैनुस्क्रिप्ट लिखकर पब्लिशर को दे दी थी. उन्होंने कहा था, "किताब छप तो गई है, लेकिन रिलीज बाकी है क्योंकि वह रक्षा मंत्रालय के पास क्लीयरेंस के लिए गई है. जैसे ही एमओडी से मंजूरी मिलेगी, वह मार्केट में आ जाएगी."
अब नरवणे ने क्या कहा?
पूर्व आर्मी चीफ मनोज मुकुंद नरवणे ने पेंगुइन का एक पोस्ट साझा लिखा- 'यह किताब का स्टेटस है.'

मीडिया रिपोर्ट्स में ये भी तर्क भी दिया गया
तमाम विवादों और तर्कों के बीच कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में ये तर्क भी दिया गया कि अक्सर पब्लिशिंग हाउस रिलीज से पहले रिव्यू के लिए कुछ कॉपियां छपवाते हैं. मुमकिन है कि उनमें से कोई कॉपी बाहर आई हो. हालांकि इस तर्क के पीछे कोई ठोस सबूत नहीं है. न ही इसकी पुष्टि की जा सकती है.
सवाल अभी भी जस का तस है कि किताब राहुल गांधी के पास कैसे पहुंची. क्या वे उस किताब के मिलने का सोर्स सार्वजनिक करेंगे? इन सारे सवालों के जवाब मिलने बाकी हैं.
यहां देखिए इस मामले पर पूरा वीडियो
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