ब्राह्मण बनाम दलित विवाद: SC/ST एक्ट का ऐसा खौफ की गांव में नहीं बचे एक भी युवा? हरिनगर में 150 अज्ञात पर FIR होने के बाद देखे वहां का हाल
SC ST Act case Bihar: दरभंगा के हरिनगर गांव में ब्राह्मण-दलित विवाद और SC/ST एक्ट के तहत दर्ज FIR के बाद गांव के युवाओं के पलायन की खबर सामने आई है. 70 नामजद और 100-150 अज्ञात लोगों पर केस दर्ज होने के बाद गांव में डर का माहौल बना हुआ है. जानिए हरिनगर विवाद, FIR, पुलिस कार्रवाई और ग्रामीणों के डर की पूरी कहानी.

बिहार के दरभंगा जिले के हरिनगर गांव से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो कानून के खौफ और सामाजिक तनाव की पूरी कहानी बयां कर रही है. गांव के ब्राह्मण टोले में आज सन्नाटा पसरा हुआ है. जिस गांव में युवाओं की चहल-पहल हुआ करती थी, वहां अब केवल बुजुर्गों की टोलियां मोबाइल पर खबरें खंगालती नजर आती हैं. और इसके पीछे की वजह है, एससी/एसटी एक्ट के तहत दर्ज हुई एक प्राथमिकी (FIR), जिसमें गांव के दर्जनों लोगों को नामजद किया गया है.
क्या है पूरा मामला?
घटना की शुरुआत 31 जनवरी को हुई थी, जिसे बीते अब एक सप्ताह से ज्यादा का समय हो चुका है. बताया जा रहा है कि मामला दो परिवारों के बीच मजदूरी के पैसों के लेनदेन और पुराने विवाद से जुड़ा था. लेकिन इस विवाद ने तब बड़ा रूप ले लिया जब एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ. पुलिस के अनुसार, इस केस में 70 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है, जबकि 100 से 150 अज्ञात लोग भी शामिल हैं. इसी 'अज्ञात' शब्द ने गांव वालों की नींद उड़ा दी है.
'विकलांग हैं, कहां जाएंगे?' – बुजुर्गों का दर्द
बिहार तक की टीम जब गांव पहुंची, तो वहां केवल बुजुर्ग ही मिले. 80 साल के बुजुर्ग सत्यनारायण झा बताते हैं, 'पुलिस का भय तो है ही. जिनका नाम FIR में है, वे तो छुपकर रह ही रहे हैं, लेकिन अज्ञात के डर से निर्दोष भी भागे हुए हैं. हम तो विकलांग हैं, कहां जाएंगे? यहीं बैठकर समय काट रहे हैं.'
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एक अन्य बुजुर्ग अनिल कुमार झा ने अपनी बीमारी और लाचारी बताते हुए कहा कि युवाओं के न होने से खेती-बाड़ी चौपट हो रही है. फसल बर्बाद हो रही है, सिंचाई के लिए कोई नहीं है और मवेशियों को चारा देने वाला भी कोई बचा नहीं है.
गांव की स्थिति: सन्नाटा और असुरक्षा
गांव वालों का आरोप है कि इस कानूनी कार्रवाई की आड़ में निर्दोष लोगों को फंसाया जा रहा है. सिद्धार्थ शंकर झा बताते हैं, '70 नामजद और 150 अज्ञात होने के कारण हर किसी को लगता है कि कहीं उसका नाम भी न जोड़ दिया जाए. इसी डर से कोई बाहर नहीं निकल रहा.'
गांव के हालात इतने गंभीर हैं कि गिरफ्तारी के डर से गांव के अधिकांश युवा दूसरे शहरों या राज्यों में चले गए हैं. इसके अलावा खेती का नुकसान भी हो रहा है क्योंकि खाद-पानी देने वाला कोई नहीं होने से फसलें सूख रही हैं. पशुओं को चारा देने के लिए भी लोग घरों से बाहर निकलने में कतरा रहे हैं.
पुलिस का आश्वासन बनाम ग्रामीणों का डर
हालांकि, स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों (DSP और SDO) ने गांव का दौरा कर लोगों को आश्वासन दिया है कि किसी भी निर्दोष को तंग नहीं किया जाएगा. लेकिन ग्रामीणों के मन में अविश्वास इस कदर गहरा है कि वे पुलिस की बातों पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं. उनका मानना है कि जब तक पुलिस 'अज्ञात' नामों की सूची पर विराम नहीं लगाती, तब तक गांव में शांति और युवाओं की वापसी मुमकिन नहीं है. फिलहाल, हरिनगर का यह टोला सिर्फ शांति की अपील कर रहा है ताकि गांव की रौनक वापस लौट सके और निर्दोष लोगों को इस कानूनी प्रक्रिया से राहत मिल सके.










