UGC के दो नए नियम क्या हैं, जिनसे मच रहा बवाल? जानिए इससे किसे फायदा और किसे नुकसान

UGC ने जातिगत भेदभाव रोकने के लिए दो नए नियम लागू किए हैं. जिनमें भेदभाव की साफ परिभाषा और हर कॉलेज में Equal Opportunity Centre बनाना अनिवार्य किया गया है.

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देश के कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज में पढ़ने वाले छात्रों के बीच इन दिनों UGC के नए नियमों को लेकर जबरदस्त बहस चल रही है. 13 जनवरी 2026 से लागू हुए ये नियम जाति-आधारित भेदभाव को रोकने के लिए बनाए गए हैं, लेकिन इन्हें लेकर सोशल मीडिया पर विरोध भी तेज है. कई लोग इन्हें UGC का 'ब्लैक लॉ' बता रहे हैं और सोशल मीडिया पर RollbackUGC ट्रेंड कर रहा है. तो विस्तार से समझते हैं कि क्या है ये पूरा मामला और क्यों इस नए नियम का हो रहा है विरोध

आखिर UGC को नए नियम लाने की जरूरत क्यों पड़ी?

साल 2016,  हैदराबाद यूनिवर्सिटी के दलित छात्र रोहित वेमुला ने जातिगत उत्पीड़न से परेशान होकर आत्महत्या कर ली थी. एक ऐसा ही मामला आया साल 2019 में जब एक मेडिकल छात्रा पायल तडवी ने कैंपस में अपनी जान दे दी थी. उनके इस कदम उठाने की वजह भी जातिगत उत्पीड़न ही बताई गई. इन घटनाओं ने पूरे देश को झकझोर दिया. 

इसके बाद दोनों परिवारों ने 2019 में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और सख्त नियमों की मांग की. उसी साल आई एक IIT की रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ. रिपोर्ट के अनुसार भारत के 75% वंचित वर्ग के छात्र कॉलेजों में भेदभाव झेलते हैं.

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इस रिपोर्ट और तमाम मामलों के ध्यान में रखते हुए जनवरी 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने UGC को निर्देश दिया कि वह इस मुद्दे पर ठोस नियम बनाए. वहीं फरवरी 2025 में एक ड्राफ्ट आया जिस पर काफी सुझाव और आपत्तियां आईं. आखिरकार UGC ने संशोधन के बाद प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूट रेगुलेशन 2026 को लागू कर दिया. 

नए नियमों में क्या खास है?

UGC ने इस बार तीन बड़े बदलाव किए हैं:

  1. अब भेदभाव की परिभाषा साफ कर दी गई है. अगर किसी छात्र के साथ जाति, धर्म, लिंग, जन्मस्थान या दिव्यांगता के आधार पर ऐसा व्यवहार होता है जिससे उसकी पढ़ाई या सम्मान को ठेस पहुंचे तो उसे भेदभाव माना जाएगा.
  2. पहली बार OBC छात्रों को भी साफ तौर पर इन नियमों में शामिल किया गया है. पहले के नियमों में यह कमी मानी जा रही थी.
  3. ड्राफ्ट में झूठी शिकायत पर सजा का जो प्रावधान था उसे हटा दिया गया है, ताकि असली पीड़ित डरकर शिकायत करने से न रुकें.


शिकायत दर्ज कराने का नया सिस्टम

अब हर कॉलेज और यूनिवर्सिटी में एक Equal Opportunity Centre (EOC) बनाना अनिवार्य होगा. इसके तहत एक Equity Committee बनेगी जिसमें SC, ST, OBC, महिलाएं और दिव्यांग सदस्य शामिल होंगे. कॉलेज प्रमुख इसके अध्यक्ष होंगे. शिकायत आने पर 24 घंटे में कार्रवाई शुरू करनी होगी, 15 दिन में रिपोर्ट बनेगी और 7 दिन में आगे का फैसला होगा. UGC खुद भी एक राष्ट्रीय निगरानी समिति बनाएगा, नियम न मानने वाले संस्थानों पर सख्त कार्रवाई हो सकती है, यहां तक कि उनकी मान्यता भी जा सकती है.

फिर विरोध क्यों हो रहा है?

इन नियमों को लेकर जनरल कैटेगरी के छात्रों और कुछ शिक्षकों में नाराजगी है. उनका कहना है कि नियमों में जनरल कैटेगरी के छात्रों को पीड़ित के रूप में नहीं देखा गया जिससे उन्हें पहले से आरोपी जैसा महसूस हो रहा है. इसके अलावा विरोध करने वालों का कहना है कि झूठी शिकायत पर कोई सजा नहीं होने से इस नियम के गलक इस्तेमाल होने का डर बढ़ गया है. विरोध करने वालों का कहना है कि Equity Committee में भी किसी जनरल कैटेगरी का प्रतिनिधित्व नहीं है. 

क्या सरकार नियम बदल सकती है?

सोशल मीडिया और ईमेल के जरिए सरकार पर दबाव बनाया जा रहा है. कुछ नेताओं और विशेषज्ञों का कहना है कि नियमों का मकसद अच्छा है लेकिन इनके गलत इस्तेमाल से बचाने के लिए निगरानी जरूरी है. कानूनी जानकारों के अनुसार सरकार के पास इन नियमों में बदलाव करने या जरूरत पड़ने पर इन्हें वापस लेने का अधिकार है.

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