Charchit Chehra: 'तू जानता है तेरा बाप कौन है'…स्कूल में फेल होने से लेकर IIT और फिर Zomato के फाउंडर तक जानें दीपिंदर गोयल का सफर

Charchit Chehra: जोमैटो के फाउंडर दीपिंदर गोयल ने CEO पद से इस्तीफा दे दिया है, लेकिन पूरी तरह कंपनी से अलग नहीं होंगे. उनके पीछे की वजह टेंपल डिवाइस हो सकती है. IIT दिल्ली से ग्रेजुएट दीपिंदर ने 2008 में Foodiebay शुरू किया और इसे Zomato में बदला. ब्लिंकिट के takeover और गिग वर्कर्स सुरक्षा पर उनकी राय ने सुर्खियां बटोरी हैं.

Deepinder Goyal
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Deepinder Goyal Story: तू जानता है तेरा बाप कौन है... ये बात आज से लगभग 17 साल पहले एक पिता ने अपने बेटे से कही थी, क्योंकि बेटा स्टार्टअप शुरू करना चाहता था... लेकिन वो इतने साधारण से परिवार से ताल्लुक रखता था कि उसके पिता को इस बात का यकीन ही नहीं था कि उनका बेटा स्टार्टअप की शुरुआत कर भी सकता है... लेकिन आज यही बेटा अपने काम और तरक्की के लिए खबरों की हैडलाइन में अक्सर छाया रहता है.. ये बेटा कोई और नहीं बल्कि जोमैटो के फाउंडर दीपिंदर गोयल हैं, आज इन पर नाज पिता तो करते ही हैं देश के प्रधानमंत्री तक इनके लिए लंबे पोस्ट लिख डालते हैं, वो भी तब जब सफर फर्श से अर्श तक का तय किया हो... स्कूल के दौरान ही आप पहले छठी और फिर ग्यारहवीं में फेल हुए हों और फिर IIT दिल्ली यानी देश के उस संस्थान में दाखिला पाया जहां पहुंचना लोगों का सपना भर रह जाता है... जोमैटो की शुरूआत की कहानी से अब तक दीपिंदर ने बहुत कुछ किया... कभी फूड डिलीवरी ब्वॉय बनकर लोगों को खाना देने पहुंच जाते हैं तो कभी माथे पर डिजीटल चिप लगाकर लोगों को चौंका देते हैं... आज चर्चित चेहरा में इनकी चर्चा इसलिए क्योंकि जोमैटो की शुरूआत साल 2008 से करने के बाद बड़ा फेरबदल होने जो रहा है क्योंकि दीपिंदर गोयल ने जोमेटो के सीईओ पद से अचानक इस्तीफा दे दिया है, इस रिपोर्ट में बताएंगे दीपिंदर गोयल से जुड़ी पूरी जानकारी, कैसे कैंटीन की लंभी लाइन देखकर आया वेबसाइट पर मेन्यू कार्ड डालने का आइडिया, कैसे IIT दिल्ली से M.Tech की पढ़ाई करने वाले दीपिंदर ने दुनिया में किया पिता का नाम रौशन और कैसे आया जोमैटो की शुरूआत का आइडिया... बताएंगे सब चर्चित चेहरा के इस एपिसोड में तो बने रहें वीडियो के आखिर तक...

स्टार्टअप आडिया और पिता के साधारण बैकग्राउंड की बात

अंग्रजी में एक बड़ी ही फेमस कहावत है, Winners don't do different things, they do things differently... यानी जीतने वाले लोग अलग काम नहीं करते, वो हर काम अलग तरीके से करते हैं... दीपिंदर गोयल ने भी इसी कहावत को सही साबित करके दिखाया... बहुत पुरानी बात नहीं जब दीपिंदर ने जोमैटो की शुरूआत से पहले अपने पिता के साथ हुई बातचीत का किस्सा बताया था... जब वह उनके सपने हौसलों की उड़ान भर रहे थे, वह स्टार्टअप शुरू करना चाहते थे, लेकिन उनके पिता को लगता था कि साधारण बैकग्राउंड होने की वजह से वह यह नहीं कर पाएंगे. उन्होंने बेटे से ये तक कह दिया कि तू जानता है, तेरा बाप कौन है... लेकिन उन्होंने ये कर दिखाया..

PM मोदी की पोस्ट और दीपिंदर गोयल का इस्तीफा

यही किस्सा उन्होंने बताया तो इसे खुद केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने एक्स अकाउंट पर शेयर किया था, जिसे रिपोस्ट करते हुए तारीफ के पुल पीएम मोदी ने भी बांधे... आज इन्हीं दीपिंदर गोयल ने इटरनल के ग्रुप CEO की पोस्ट से इस्तीफा दे दिया है, जिन्हें नहीं पुता उन्हें बता दें कि इटरनल जोमैटो और ब्लिंकिट की पैरेंट कंपनी है... उनकी जगह ब्लिंकिट के CEO अलबिंदर ढींडसा को इटरनल का नया Group CEO अपॉइंट किया गया है, ये बदलाव 1 फरवरी 2026 से लागू होगा... ऐसा इसलिए क्योंकि दीपिंदर डेली रूटीन वाले कामों से हटकर नए प्लान पर काम करना चाहते हैं.. हालांकि, वो कंपनी से पूरी तरह अलग नहीं होंगे, बोर्ड और शेयरहोल्डर्स की मंजूरी के बाद गोयल इटरनल के Vice Chairman का रोल संभाले रहेंगे.

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क्या है टेंपल डिवाइस जिस वहज से सुर्खियों में आए दीपिंदर

दीपिंदर के अचानक हुए इस इस्तीफे से पीछे एक वजह उनके टेंपल डिवाइस भी हो सकता है, जिसे लेकर वो बीते दिनों चर्चा में भी रहे हैं... दरअसल, दीपिंदर गोयल का हाल ही में राज शमानी के साथ एक पॉडकास्ट आया था, जिसमें वो आंख के पास एक डिवाइस लगाए नजर आए... इस डिवाइस को उन्होंने टेंपल नाम दिया, जिसे उन्होंने एक एक्सपेरिमेंट्ल डिवाइस बताया था... दीपिंदर ने इस डिवाइस को लेकर बताया था कि ये डिवाइस दिमाग में होने वाले फ्लो को सटीक और रियल-टाइम जानकारी देता है. इसे उन्होंने अपनी Gravity Ageing Hypothesis से जुड़ी एक रिसर्च के दौरान डेवलप किया है, जिसका काम आपको पोस्चर, एक्टिविटी और लाइफस्टाइल से आपके दिमाग पर क्या असर पड़ रहा है, ये रिकॉर्ड करना है... इस डिवाइस के लिए पहले ही दीपिंदर अपनी एक पोस्ट में लिख चुके हैं कि कमिंग सून, इसका मतलब है कि यह जल्द ही ये डिवाइस मार्केट में आएगा लेकिन इसका लॉन्चिंग टाइम क्या होगा कह नहीं सकते... गोयल ने टेंपल के इंस्टाग्राम पेज को टैग किया था, जिसपर अभी सिर्फ एक ही पोस्ट है... आने वाले दिनों में इस डिवाइस की और भी डिटेल्स का खुलासा होगा.

कैसे बना भारत का बड़ा फूड टेक प्लेटफॉर्म

जिस जोमैटो की इतनी चर्चा हो रही है उसके बारे में भी आपको आसान भाषा में बता दें वैसे तो आप में से ज्यादातर लोग जानते ही हैं और जो नहीं जानते वो अब जान जाएंगे... दरअसल जोमैटो एक फूल डिलिवरी प्लेटफॉर्म है, जहां रेस्टोरेंट के साथ पार्टनरशिप करती है लोग इसी जोमैटो को यूज करके फूड ऑर्डर करते हैं, जिसके बाद डिलिवरी पार्टनर वो फूड रेस्टोरेंट से सीधे आपके घर पर डिलिवर करते हैं... अब इसकी शुरूआत कैसे हुई ये किस्सा भी कम मजेदार नहीं है... पंजाब में श्री मुक्तसर साहिब शहर में जन्में शिक्षक माता-पिता के घर जन्में दीपिंदर अच्छे फैमिली बैकग्राउंड से आते हैं.. उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा चंडीगढ़ के डीएवी कॉलेज से पूरी की है.. इसके बाद साल 2005 में IIT दिल्ली से मैथमैटिक्स और कंप्यूटिंग में ग्रेजुएशन पूरी की, जिसके बाद उन्हें Bain & Company जैसी मशहूर मैनेजमेंट कंसल्टिंग कंपनी में नौकरी मिल गई... यहां काम करते हुए दीपिंदर ने बिजनेस की बारीकियां समझीं लेकिन इसी नौकरी के दौरान उन्हें एक दिलचस्प बात देखने को मिली कि ऑफिस में लोग अक्सर खाने की बातें करते थे और कैंटीन में मेन्यू ढूंढते थे, जिसके बाद ऑर्डर देने में अलग परेशानी महसूस करते थे.

कैंटीन की लाइन से स्टार्टअप आइडिया तक की कहानी

यहीं से उनके दिमाग में एक सवाल उठा कि अगर रेस्टोरेंट का पूरा मेन्यू एक ही जगह, ऑनलाइन मिल जाए तो कितना आसान हो जाएगा... इसी सोच से दीपिंदर ने कुछ नया करने का ठानी और अपनी अच्छी-खासी नौकरी छोड़ने का फैसला कर लिया... दोस्त पंकज चड्ढा के साथ मिलकर उन्होंने साल 2008 में Foodiebay नाम से एक स्टार्टअप शुरू किया.. शुरुआत में यह प्लेटफॉर्म एक वेबसाइट के जरिए रेस्टोरेंट के मेन्यू और खाने की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध कराता था... उनके आइडिया में दम था, इसलिए इन्फो एज इंडिया लिमिटेड के फाउंडर संजीव बिखचंदानी ने उन्हें शुरुआती फंडिंग के रूप में 1 मिलियन डॉलर का इन्वेस्टमेंट दिया... साल 2010 में Foodiebay रीब्रांड करके इसका नाम जोमैटो कर दिया गया, इसके बाद कंपनी ने तेजी से तरक्की की... धीरे-धीरे जोमैटो भारत के साथ कई देशों में एक बड़ा फूड-टेक ब्रांड बन गया... समय के साथ जोमैटो ने फूड डिलीवरी, रेस्टोरेंट रिव्यू और ऑनलाइन ऑर्डरिंग को आसान बना दिया.. जोमैटो ने आगे चलकर ब्लिंकिट का टेकओवर किया, जिससे कंपनी ने क्विक-कॉमर्स सेगमेंट में भी मजबूत पकड़ बना ली.

IIT में पढ़ाई और पर्सनल लाइफ

दीपिंदर की पर्सनल लाइफ की बात करें तो उन्होंने 2008 में कंचन जोशी से शादी की थी, दोनों की पहली मुलाकात IIT दिल्ली में पढ़ाई के दौरान हुई थी.. इस शादी से दोनों की एक बेटी है सितारा, 2013 में बेटी के जन्म के बाद रिश्तों में खटास आनी शुरू हो गई थी जिसके बाद दोनों ने तलाक ले लिया.. 2024 में दीपिंदर ने मेक्सिको की रहने वाली ग्रेसिया मुनोज़ से शादी कर ली, जिन्होंने शादी के बाद अपना नाम बदलकर जिया गोयल कर लिया... यह जोड़ा हाल ही में गुरुग्राम में जोमैटो डिलीवरी एजेंट के रूप में काम करते हुए नजर आया था.

10 मिनट डिलीवरी विवाद पर दीपिंदर का जवाब

बीते दिनों गिग वर्कर्स को लेकर चल रहे विवाद में भी दीपिंदर का बयान खूब सुर्खियां बटोरता नजर आया था... जब चर्चा हो रही थी कि 10 मिनट की डिलीवरी ब्वॉज के लिए असुरक्षित है.. इस पर दीपिंदर ने एक लंबा पोस्ट लिखते हुए सफाई दी और लिखा कि 10 मिनट की डिलीवरी का मतलब यह नहीं कि डिलीवरी पार्टनर तेज गाड़ी चलाने को मजबूर होते हैं. यह मॉडल लोगों के घरों के पास बने छोटे-छोटे स्टोर्स की वजह से काम करता है. ऑर्डर मिलने के बाद सामान करीब 2.5 मिनट में पैक हो जाता है और डिलीवरी पार्टनर औसतन 2 किलोमीटर से भी कम दूरी तय करता है. इस दौरान उनकी एवरेज स्पीड करीब 15 किलोमीटर प्रति घंटा रहती है, जो किसी भी तरह से खतरनाक नहीं मानी जा सकती. गिग वर्कर्स की सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों पर उन्होंने कहा कि हादसे या हेल्थ से जुड़ी किसी भी समस्या में उन्हें यह सुरक्षा दी जाती है. यह दावा गलत है कि गिग वर्कर्स को कोई सामाजिक सुरक्षा नहीं मिलती.

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