हिमंत के बाद अब ममता सरकार भी डाल रही राहुल की यात्रा में बाधा? सिलीगुड़ी में क्या हुआ, जानिए

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Bharat Jodo Nyay Yatra: पश्चिम बंगाल में कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस(TMC) एकबार फिर से आमने-सामने है. इस बार के टकराव की वजह इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस (INDIA)अलायंस में सीटों का बंटवारा नहीं, बल्कि राहुल गांधी हैं. राहुल गांधी ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ पर निकले हुए हैं. पूर्वोत्तर के मणिपुर से शुरू हुई यह यात्रा 25 जनवरी को पश्चिम बंगाल में प्रवेश कर चुकी है. पिछले दिनों यात्रा जब असम में थी, तो वहां के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और राहुल गांधी के बीच भिड़ंत देखी गई. राहुल गांधी के खिलाफ तो असम में केस भी हुआ और हिमंत ने चुनाव बाद उन्हें गिरफ्तार करने की बात तक कह दी. अब यात्रा के बंगाल में घुसते ही एक नया मामला सामने आ गया है. प्रदेश प्रशासन ने सिलीगुड़ी में होने वाली राहुल की सभा को इजाजत देने से इनकार कर दिया है.

वैसे 14 जनवरी को मणिपुर से शुरू हुई राहुल गांधी की अगुवाई वाली यह न्याय यात्रा पश्चिम बंगाल में दो दिन के ब्रेक पर है. यात्रा 28 जनवरी को फिर से शुरू होगी.

बंगाल प्रशासन डाल रहा बाधा: अधीर रंजन चौधरी

लोकसभा में विपक्ष के नेता और पश्चिम बंगाल कांग्रेस के अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने शुक्रवार को सिलीगुड़ी में पत्रकारों से बात करते हुए बताया कि, उनकी पार्टी को पश्चिम बंगाल में भारत जोड़ो न्याय यात्रा के तहत कुछ सार्वजनिक बैठकें आयोजित करने की अनुमति नहीं मिल पा रही है. पार्टी बंगाल में कुछ जगहों पर सार्वजनिक बैठकें आयोजित करना चाहती है, लेकिन स्कूल की परीक्षाओं के चलते अनुमति नहीं दी जा रही है.
उन्होंने यह भी कहा कि, हमें लगता था कि बंगाल में न्याय यात्रा में कोई रुकावट नहीं आएगी और सार्वजनिक बैठकों के लिए आसानी से छूट मिलेगी, लेकिन प्रदेश प्रशासन का रवैया हमारे अनुमान के बिल्कुल उलट है.

प्रदेश में प्रशासन सियासी प्रभाव से मुक्त: TMC

वहीं सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने दावा किया है कि पश्चिम बंगाल में प्रशासन राजनीतिक प्रभाव से मुक्त है. TMC सांसद शांतनु ने अधीर रंजन पर ही आरोप मढ़ते हुए ये तक कह दिया कि, पश्चिम बंगाल में INDIA गठबंधन टूटने के लिए अधीर चौधरी जिम्मेदार हैं. साथ ही उन्होंने कहा कि, सभी विपक्षी दल राज्य में कार्यक्रम करते हैं, किसी को कोई समस्या नहीं होती है. इस समय स्कूलों में बोर्ड परीक्षाएं होने के कारण प्रशासन ने यह फैसला लिया होगा.

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यात्रा के बंगाल आने से पहले ही ममता ने कर दिया था बड़ा खेल

सीएम ममता बनर्जी पिछले कुछ दिनों से प्रदेश में बिना किसी गठबंधन के अकेले चुनाव लड़ने की बात कर रही हैं. अकेले चुनाव लड़ने के पीछे उनका तर्क है कि, जहां भी क्षेत्रीय पार्टियां मजबूत हैं, वहां कांग्रेस और अलायंस को दखलंदाजी से बचना चाहिए और क्षेत्रीय दलों को बीजेपी से अकेले मुकाबला करने देना चाहिए. हालांकि ममता, कांग्रेस को 300 सीटों पर चुनाव लड़ने की बात के साथ-साथ ये भी कर रही हैं कि वो INDIA अलायंस के साथ हैं. ममता के इस बयान के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने उनसे बात की है. वैसे अभी तक ममता और कांग्रेस के बीच बात बनती कुछ खास नजर नहीं आ रही है.

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