'आपको पूजना है तो पूजें...', विधानसभा में शंकराचार्य विवाद पर योगी आदित्यनाथ ने माता प्रसाद पांडे को दिया करारा जवाब

Yogi Adityanath statement: उत्तर प्रदेश विधानसभा में माघ मेले के दौरान हुए विवाद पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडे को कड़ा जवाब दिया. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़े कथित विवाद पर सीएम ने कहा कि कानून का शासन सर्वोपरि है और धार्मिक मर्यादाओं का पालन अनिवार्य है. जानिए विधानसभा में क्या हुआ और क्यों गरमाई यूपी की राजनीति.

UP political debate
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उत्तर प्रदेश विधानसभा में माघ मेले के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और प्रशासन के बीच हुए विवाद का मुद्दा गरमा गया है. नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडे द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया. उन्होंने दो टूक कहा कि हर व्यक्ति केवल शंकराचार्य लिख लेने से शंकराचार्य नहीं हो जाता और धार्मिक मर्यादाओं का पालन करना सभी के लिए अनिवार्य है.

माता प्रसाद पांडे ने लगाया अपमान का आरोप

सदन में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडे ने शंकराचार्य के साथ हुई कथित बदसलूकी का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि सनातन धर्म नफरत की बात नहीं करता, लेकिन माघ मेले में शंकराचार्य के शिष्यों और बटुकों के साथ अधिकारियों ने मारपीट की. पांडे ने कहा कि शंकराचार्य खुद को अपमानित महसूस कर रहे हैं और यह सनातन की उदारता के खिलाफ है. उन्होंने मुख्यमंत्री को नसीहत देते हुए कहा कि अगर आप सनातनी हैं, तो सनातन के मूल्यों के अनुरूप प्रदेश चलाएं.

सीएम योगी का पलटवार: 'कानून का शासन सर्वोपरि'

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इन आरोपों का जवाब देते हुए कानून और मर्यादा की बात की. उन्होंने कहा कि माघ मेले में जहां करोड़ों श्रद्धालु आए हों, वहां सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करना जरूरी है. सीएम ने कहा कि एग्जिट गेट (निकास द्वार) से जबरन प्रवेश करने का प्रयास भगदड़ को जन्म दे सकता है और श्रद्धालुओं के जीवन के साथ खिलवाड़ है. उन्होंने कहा कि एक जिम्मेदार और मर्यादित व्यक्ति कभी इस तरह का आचरण नहीं कर सकता.

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सपा पर कसा तंज

मुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी पर तंज कसते हुए कहा, 'अगर सपा के लोगों को उन्हें पूजना है तो पूजें, लेकिन हम मर्यादित लोग हैं और कानून का शासन जानते हैं.' योगी ने सपा के पुराने कार्यकाल की याद दिलाते हुए पूछा कि अगर वे (अविमुक्तेश्वरानंद) शंकराचार्य थे, तो आपके समय में वाराणसी में उन पर लाठीचार्ज क्यों हुआ था और एफआईआर क्यों दर्ज हुई थी? 

क्या था पूरा विवाद?

यह विवाद माघ मेले में मौनी अमावस्या के स्नान के दौरान शुरू हुआ था. प्रशासन का आरोप है कि शंकराचार्य जबरन पालकी पर बैठकर प्रतिबंधित मार्ग से गंगा स्नान के लिए जाना चाहते थे, जिससे सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही थी. वहीं, शंकराचार्य का आरोप है कि पुलिस और प्रशासन ने उनके और उनके बटुकों के साथ मारपीट की और उनके बाल खींचे. विधानसभा में सीएम योगी के इस कड़े रुख के बाद अब इस मुद्दे पर उत्तर प्रदेश की राजनीति और तेज होने के आसार हैं.

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