UP Panchayat Election: पंचायत चुनाव में क्यों हो सकती है देरी? हाईकोर्ट पहुंचा मामला, अब ऐसे तय होगा सीटों का आरक्षण
UP Panchayat Election Update: उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. सीटों के आरक्षण को लेकर मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच तक पहुंच गया है, जिससे चुनाव में देरी की संभावना जताई जा रही है. समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन के बाद ही ओबीसी आरक्षण तय होगा. जानें पूरी डिटेल.

उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की आहट के बीच एक बड़ा अपडेट सामने आया है. जहां एक ओर भावी प्रधान और प्रत्याशी चुनाव प्रचार में व्यस्त हैं, वहीं दूसरी ओर कानूनी दांव-पेच के कारण चुनाव में देरी की संभावना जताई जा रही है. मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच तक पहुंच गया है, जिससे सीटों के आरक्षण की प्रक्रिया पर संशय के बादल मंडरा रहे हैं. आइए विस्तार से जानते है पूरी कहानी.
हाईकोर्ट में याचिका और पिछड़ा वर्ग आयोग का पेच
पंचायत चुनाव में देरी की मुख्य वजह 'समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग' (Dedicated OBC Commission) का गठन है. हाईकोर्ट में वकील मोतीलाल यादव द्वारा दायर एक जनहित याचिका में सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेशों का हवाला दिया गया है. याचिका के अनुसार, पिछड़ा वर्ग आयोग का कार्यकाल अक्टूबर 2025 में ही समाप्त हो चुका है.
नियमों के मुताबिक, ओबीसी सीटों का आरक्षण तय करने के लिए एक वैध आयोग का होना अनिवार्य है. आयोग ही सर्वे के आधार पर यह तय करता है कि कौन सी सीट ओबीसी के लिए आरक्षित होगी और कौन सी नहीं. हाईकोर्ट ने 4 फरवरी को सरकार से पूछा है कि वह नए आयोग का गठन कब करेगी.
यह भी पढ़ें...
क्या चुनाव टल जाएंगे?
सरकार ने कोर्ट में हलफनामा दिया है कि पहले पिछड़ा वर्ग आयोग बनेगा और उसके बाद ही चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी. इससे यह कयास लगाए जा रहे हैं कि आरक्षण सूची जारी होने में वक्त लग सकता है. हालांकि, पंचायत राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर का दावा है कि चुनाव समय पर ही होंगे. उनके मुताबिक, अप्रैल से जुलाई के बीच चुनाव निपटा दिए जाएंगे और जिलों को जरूरी निर्देश भी भेज दिए गए हैं.
आरक्षण सूची पर टिकी सबकी नजरें
गांव की सरकार बनाने का सपना देख रहे प्रत्याशियों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि उनकी सीट इस बार सामान्य (General) रहेगी, ओबीसी (OBC) होगी या अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित हो जाएगी. नए पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन के बाद ही सीटों की श्रेणी स्पष्ट हो पाएगी.
प्रत्याशियों के लिए सुझाव
भले ही कानूनी प्रक्रियाओं के कारण कुछ दिनों की देरी की संभावना हो, लेकिन जानकारों का कहना है कि चुनाव तो होकर ही रहेंगे. प्रत्याशियों को सलाह दी गई है कि वे अपनी तैयारी और जनसंपर्क जारी रखें. जैसे ही नया आयोग गठित होगा, आरक्षण की नई सूची जारी कर दी जाएगी.










