गाजियाबाद लोनी कांड: 'मैं खेत में गिर गया था, फिर भी पुलिस लाठियां बरसाती रही...' वायरल वीडियो वाले युवक ने सुनाई आपबीती
Ghaziabad protest news: गाजियाबाद के लोनी इलाके में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के विरोध में प्रदर्शन के दौरान पुलिस और ग्रामीणों के बीच झड़प का वीडियो वायरल हो गया है. मीरपुर हिंदू गांव में हुए इस विवाद में एक युवक ने पुलिस पर लाठीचार्ज और मारपीट के गंभीर आरोप लगाए हैं. प्रशासन का कहना है कि केवल हल्का बल प्रयोग किया गया, जबकि ग्रामीण प्लांट से स्वास्थ्य और खेती पर खतरे की बात कह रहे हैं. जानिए पूरा मामला.

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित लोनी इलाके के मीरपुर हिंदू गांव में एक सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट (कूड़ा घर) के विरोध में चल रहा प्रदर्शन हिंसक झड़प में बदल गया. पुलिस और ग्रामीणों के बीच हुए इस टकराव का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें पुलिसकर्मी एक युवक को घेरकर बेरहमी से पीटते नजर आ रहे हैं. अब इस मामले में पीड़ित युवक ने खुद कहानी बताई है. आइए जानते हैं पूरा मामला.
'हल्का बल प्रयोग' के दावे पर उठे सवाल
पुलिस प्रशासन का दावा है कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए केवल 'हल्का बल प्रयोग' किया गया था. हालांकि, वायरल वीडियो में दिखने वाले युवक चिराग त्यागी ने कैमरे पर आकर पुलिस के इन दावों की पोल खोल दी है. चिराग, जो एमसीए (MCA) फाइनल ईयर का छात्र है, ने बताया कि जब वह विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस से बचने की कोशिश कर रहा था, तो वह खेत में गिर गया. उसके गिरने के बाद भी पुलिसकर्मियों ने उसे चारों तरफ से घेर लिया और लाठियों से बुरी तरह पीटना शुरू कर दिया.
'सिर बचाने के लिए हाथ लगाया तो वह भी सूझ गया'
चिराग त्यागी ने कैमरे के सामने अपनी चोटें दिखाते हुए पुलिस की बर्बरता का पूरा ब्योरा साझा किया. उन्होंने बताया कि पुलिस के हमले के दौरान उनके शरीर का कोई हिस्सा नहीं बचा, उनकी पीठ, पैरों और हाथों पर लाठियों के गहरे निशान और नील साफ तौर पर पुलिसिया कार्रवाई की गवाही दे रहे हैं. चिराग का गंभीर आरोप है कि पिटाई के दौरान पुलिसकर्मी न केवल उन पर लाठियां बरसा रहे थे, बल्कि उन्हें भद्दी-भद्दी गालियां भी दे रहे थे और यहां तक कह रहे थे कि 'आज तुझे मार ही देंगे.'
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चिराग ने आगे बताया कि पुलिस का यह रवैया केवल युवाओं तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने छोटे बच्चों और बुजुर्गों को भी नहीं बख्शा. घटना स्थल पर मौजूद 'गोल्डी' नाम के एक छोटे बच्चे ने भी कैमरे पर अपनी चोट दिखाते हुए इस बात की पुष्टि की कि पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान मासूमों पर भी बल प्रयोग किया.
क्यों हो रहा है विरोध?
ग्रामीणों और किसानों के इस उग्र विरोध की मुख्य वजह निर्माणाधीन सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट (कूड़ा घर) से होने वाले दूरगामी नुकसान हैं. पीड़ित युवक चिराग त्यागी ने इसके पीछे के तकनीकी और स्वास्थ्य कारणों को गिनाते हुए बताया कि चार गांवों के बीचों-बीच इस प्लांट के बनने से स्थानीय निवासियों में कैंसर और चर्म रोग जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा पैदा हो जाएगा.
साथ ही, लगभग 125 बीघा जमीन पर फैलने वाले इस कूड़ा घर की वजह से आसपास के लहलहाते खेतों की उर्वरता पूरी तरह नष्ट होने की कगार पर है. ग्रामीणों का यह भी पुरजोर दावा है कि प्रशासन यहां नियमों का खुला उल्लंघन कर रहा है, क्योंकि यह पूरा इलाका बाढ़ क्षेत्र में आता है जहां नियमानुसार कूड़ा घर नहीं बनाया जा सकता. इसके अतिरिक्त, यह प्लांट रिहायशी बस्तियों से तय की गई अनिवार्य दूरी के मानकों को भी पूरा नहीं करता, जिससे भविष्य में यहाँ रहना दूभर हो जाएगा.
किसानों का ऐलान: 'झुकेंगे नहीं, मरेंगे या मिटेंगे'
भले ही पुलिस ने लाठीचार्ज कर प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने की कोशिश की हो, लेकिन ग्रामीणों का हौसला नहीं टूटा है. चिराग और अन्य ग्रामीणों का कहना है कि वे किसी भी कीमत पर यहां कूड़ा घर नहीं बनने देंगे. किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि काम नहीं रुका, तो वे पहले से भी बड़ा और उग्र आंदोलन करेंगे.










