DIG से सम्मान पा चुकीं झांसी की पहली महिला ऑटोरिक्शा ड्राइवर अनीता चौधरी की मिली लाश, परिजनों ने जताई हत्या की आशंका
Jhansi News: झांसी की पहली महिला ऑटो चालक बनकर मिसाल कायम करने वाली अनीता चौधरी की मौत ने पूरे शहर को झकझोर दिया है. ऑटो लेकर निकली अनीता घर नहीं लौटीं और उनका शव खून से लथपथ मिला. पुलिस इसे हादसा बता रही है, जबकि परिजन हत्या और लूट की आशंका जता रहे हैं.

Anita Chaudhary death case: कभी ऑटोरिक्शा पर फर्राटे भरने वाली अनीता चौधरी लोगों के लिए कौतूहल बनीं. चर्चा इतनी हुई कि सोशल मीडिया पर छा गईं. हर किसी ने इनके जज्बे की सराहना फिर डीआईजी से सम्मान भी मिला. अब उसी अनीता चौधरी की खूब से लथपथ मिले शव ने लोगों शॉक्ड कर दिया है. अनीता अपने घर से ऑटोरिक्शा लेकर तो निकली थीं पर लौटीं नहीं. उनका शव शव सुकुवां-ढुकुवां के कॉलोनी के पास मिला. इनका ऑटोरिक्शा भी कुछ दूरी पर पलटा हुआ मिला.
पुलिस का मानना है कि ये हत्या नहीं बल्कि सड़क हादसा है. परिजन ये मानने को तैयार नहीं हैं. उनका कहना है कि अनीता के केवन सिर में चोट आई है. यदि ऑटोरिक्शा पलटा होता तो शरीर के अन्य हिस्सों में भी चोट आती. अनीता के शरीर से उनका मंगलसूत्र, कान-नाक के गहने, पायल और मोबाइल सब गायब है. परिजन इसे मर्डर और लूटपाट के एंगल से देख रहे हैं. पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. पुलिस आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है.
क्या है अनीता चौधरी की पूरी कहानी?
40 वर्षीय अनीता चौधरी नवाबाद थाना क्षेत्र के तालपुरा स्थित अंबेडकर नगर में रहती थीं. वह झांसी में पहली महिला ऑटो चालक बनीं. इससे पहले वो 15 साल तक नौकरी करती रहीं. 2020 में उनकी सुपरवाइजर से कहासुनी हो गई. सुपरवाइजर ने गुस्से में कहा- कल से मत आना. ये बात अनीता को लग गई और उसने नौकरी छोड़ दी. मैनेजर से लेकर अन्य अधिकारियों के कॉल आए, मगर अनीता ने वापस नौकरी जॉइन नहीं की.
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अनीता ने ऑटोरिक्शा चलाने को कहा तो पति ने किया विरोध
अनीता के पति द्वारका चौधरी बस स्टैंड के पास ठेला लगाते है. इससे घर का खर्चा नहीं चलता. तब अनीता बच्चों को लेकर महाराष्ट्र चली गई. 10-15 दिन ही हुए थे कि कोरोना की वजह से लॉकडाउन लगने की चर्चा होने लगी. वहां नौकरी भी नहीं मिली थी. अनीता को वापस आना पड़ा. महाराष्ट्र से लौटने के बाद अनीता के घर के हालत और बिगड़ गए. तब फाइनेंस पर ऑटो लेकर चलाने का प्लान बनाया. कोई बैंक लोन देने को तैयार नहीं था. एक निजी बैंक ने लोन देने की हामी भरी. बैंक अधिकारी घर आए तो पति ने आधार कार्ड और अपना बैंक खाता देने से मना कर दिया.
जिद थी...नौकरी नहीं खुद का काम करना है
घर वाले अनीता के ऑटो चलाने का विरोध कर रहे थे. अनीता ने किसी तरह काजगात पूरे किए. 18 फरवरी 2021 को फाइनेंस पर नई ऑटो खरीदी. अनीता को ऑटो चलाना नहीं आता था. पड़ोसी ऑटो ड्राइवर ने अनीता को ऑटोरिक्शा चलाना सिखाया. इस तरह अनीता झांसी की पहली ऑटो ड्राइवर बन गईं.
दिन में घर का काम, सुबह और रात में चलाती थीं ऑटोरिक्शा
उनकी बहन विनीता चौधरी ने बताया कि वे सुबह और रात को ऑटो चलाती थीं. दिन में घर का काम करती थीं. इसी से वह अपने परिवार का भरण पोषण करती थी. रविवार रात 9:30 बजे वह घर से ऑटो चलाने निकली थीं. देर रात करीब 1:30 बजे फोन आया कि स्टेशन रोड पर सुकुवां-ढुकुवां कॉलोनी के पास अनीता लहूलुहान हालत में पड़ी हैं.तब परिवार के लोग मौके पर पहुंचे. वहां ऑटो पलटी हुई थी और अनीता की मौत हो चुकी थी. परिजनों ने हत्या और लूट की बात कह न्याय की गुहार लगाई है.










