पहले सहमति से बनाए शारीरिक संबंध, फिर नहीं हुई शादी तो युवती ने दर्ज कराया रेप का केस, अब कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि लंबे समय तक आपसी सहमति से बने शारीरिक संबंधों के बाद यदि विवाह नहीं हो पाता, तो इसे दुष्कर्म नहीं माना जाएगा. अदालत ने कहा कि महज शादी का वादा पूरा न कर पाना अपराध नहीं है, जब तक कि धोखा देने की मंशा न हो.
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उत्तराखंड हाईकोर्ट का अहम फैसला
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने आपसी सहमति से बने शारीरिक संबंधों को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. अदालत ने साफ कहा है कि अगर दो बालिग व्यक्ति लंबे समय तक आपसी रजामंदी से रिश्ते में रहते हैं और बाद में किन्हीं कारणों से शादी का वादा टूट जाता है तो इसे दुष्कर्म या बलात्कार की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता. जस्टिस आशीष नैथानी की एकल पीठ ने एक मामले में सुनावाई के दौरान ये बात कही. साथ ही कोर्ट ने आरोपी के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही और चार्जशीट को रद्द करने का आदेश जारी किया.