देहरादून: स्कूल में छात्रा से बात कर रही रेशमा को समझा किडनैपर, लेकिन पुलिस जांच में ऐसे पलट गई पूरी कहानी

देहरादून में स्कूली बच्चे के अपहरण की वायरल खबर से शहर में दहशत फैल गई थी. मामले में अब पुलिस जांच में चौंकाने वाला सच सामने आया है. घटना में महिला निर्दोष निकली और पूरा मामला बच्चों की गलतफहमी और सोशल मीडिया अफवाह साबित हुआ.

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Dehradun Kidnapping Rumor: देहरादून में पिछले दिनों एक स्कूली बच्चे के अपहरण की कोशिश की खबर ने पूरे शहर को दहशत में डाल दिया था. सोशल मीडिया पर देखते ही देखते पोस्ट वायरल होने लगी कि शहर में बच्चों को निशाना बनाने वाला कोई गैंग सक्रिय है. लेकिन जब पुलिस प्रशासन ने इस मामले की तह तक जाकर जांच की तो सच्चाई कुछ और ही निकली. पुलिस की जांच में ये पूरा मामला एक अफवाह निकला. घटना के पीछे बच्चों की गलतफहमी सामने आई. इस बीच अब पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और बिना सोचे समझे किसी भी खबर को शेयर न करें.

क्या था मामला?

दरअसल, बीते मंगलवार देहरादून के एक प्रतिष्ठित स्कूल का है. यहां एक रेशमा नामक एक महिला पर बच्चों से बातचीत कर रही थी. लेकिन कुछ लागों ने उसे किडनेपर समझ लिया. इसका पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया. इसमें दावा किया गया कि एक गैंग स्कूली बच्चों को निशाना बना रहा है. इसके बाद शहर भर में हड़कंप मच गया. सूचना पर पहुंची पुलिस ने आनन फानन में जांच शुरू की.

पुलिस ने तुरंत लिया एक्शन

मामले में एसएसपी अजय सिंह ने तुरंत एक्शन मोड में आ गए.  इसके बाद एक विशेष टीम गठित की गई. इसमें सिटी मजिस्ट्रेट और इंटेलिजेंस अधिकारियों को शामिल किया गया. पुलिस टीम ने  स्कूल पहुंचकर प्रबंधन से बातचीत की और उस कथित अनजान महिला की तलाश शुरू की गई. स्कूल परिसर और उसके आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज चेक की गई. इसमें एक महिला अपने पति और एक छोटे बच्चे के साथ दिखाई दी.

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CCTV वीडियो में सामने आया सच

इस दौरान पुलिस ने देखा कि महिला के पास न तो कोई हथियार था और न ही कोई संदिग्ध वस्तु. उसके हाथ में बस एक मेडिकल सिरिंज दिखी.  जांच में पता चल कि इसे लेकर ही सोशल मीडिया पर गलत दावे किए जा रहे थे. जांच में वीडियो से साफ हो गया कि वहां स्कूल में अपहरण जैसी कोई गतिविधि नहीं हो रही थी.

गलतफहमी ने ऐसे लिया अफवाह का रूप

मामले में इसके बाद पुलिस ने उन बच्चों से भी बात की जिन्होंने महिला को संदिग्ध बताया था. पूछताछ में सामने आया कि अनजान लोगों को पास देखकर बच्चे घबरा गए थे. बच्चों के इसी डर और गलतफहमी ने धीरे धीरे अपहरण की कोशिश की कहानी का रूप ले लिया. इस बीच  बिना सच जाने ही लोगों ने इस खबर को सोशल मीडिया पर फैलाना शुरू कर दिया.

पीड़ित महिला की दर्दभरी दास्तां

इस पूरे मामले में अपहरणकर्ता बताए जाने वाली महिला की पहचान रेशमा प्रवीन के रूम में हुई है. रेशमा ने एसएसपी ऑफिस पहुंचकर बताया कि उनके पति का गांधी शताब्दी अस्पताल में इलाज चल रहा है. वाे दवाइयां और इंजेक्शन लेकर लौट रही थीं.  उनके हाथ में मौजूद सिरिंज उनके बीमार पति के इलाज के लिए थी. रेशमा का आरोप है कि इस गलत खबर ने उनकी और उनके परिवार की जिंदगी बर्बाद कर दी है. अब उन्हें पड़ोसियों के ताने और बच्चों को स्कूल में अपमान सहना पड़ रहा है.

एसएसपी की चेतावनी और जनता से अपील

एसएसपी अजय सिंह ने कहा है कि देहरादून में अपहरण का कोई गैंग एक्टिव नहीं है. उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर बिना सोचे समझे किसी भी खबर को शेयर न करें. पुलिस ने चेतावनी दी है कि शहर का माहौल बिगाड़ने और झूठी अफवाहें फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने लोगों से जिम्मेदार नागरिक बनने और पुलिस पर भरोसा रखने की बात कही है.

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