हिमंता से तंग मिया मुसलमान...ओवैसी के एक दांव ने उड़ाई सबकी नींद! असम में कांग्रेस-बीजेपी की बढ़ सकती है टेंशन

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी के बीच सियासी जंग तेज हो गई है. विवाद एक एनिमेटेड वीडियो को लेकर शुरू हुआ, जिसमें कथित तौर पर मुसलमानों को निशाना बनाया गया था. ओवैसी ने सरमा के खिलाफ FIR दर्ज कराई है.

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असदुद्दीन ओवैसी हैदराबाद से मुसलमानों के हक की राजनीति करते हैं. बिहार चुनाव AIMIM को मिली जीत के बाद ओवैसी का राजनीतिक कद और ऊंचा हो गया है. देश में मुसलमानों के सबसे बड़े नेता बनकर उभरे हैं. हिमंता बिस्वा बीजेपी में हिंदुत्व की राजनीति करने वाले नेता हैं, जिनकी खुली नफरती लाइन है मिया मुसलमानों के खिलाफ. किसी न किसी दिन तो ओवैसी और हिमंता का टकराव होना ही था. वो दिन आ चुका है. देश की राजनीति में हिमंता के एनिमेटेड वीडियो ने ऐसी आग सुलगाई है, जिसकी तपिश हैदराबाद से लेकर दिल्ली और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची है. 

ओवैसी का आरोप है कि वीडियो में हिमंता बिस्वा सरमा को मुस्लिम वेशभूषा वाले लोगों पर 'प्वाइंट ब्लैंक' रेंज से गोली चलाते हुए दिखाया गया है. वीडियो में "कोई दया नहीं" (No Mercy) जैसे स्लोगन का इस्तेमाल किया गया, जिसे ओवैसी ने 'नरसंहार के लिए उकसाने वाला' (Genocidal Incitement) करार दिया है. हल्ला मचते ही वीडियो हटा लिया गया. हिमंता इतने बैकफुट पर आए कि कहने लगे कि उन्होंने ऐसा कोई वीडियो देखा नहीं. हिमंता अरसे से लगातार मियां और मुसलमानों के खिलाफ बोल रहे थे लेकिन मुसलमानों को गोली मारने के एनिमेटेड का ताप झेल नहीं पाए. साफ मुकर गए. लेकिन तब तक देर चुकी थी. 

हिमंता बिस्वा सरमा के खिलाफ एफआईआर

AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने हैदराबाद में हिमंता बिस्वा सरमा के खिलाफ एफआईआर करा दी. हैदराबाद पुलिस कमिश्नर से मांग की है कि सरमा के खिलाफ कार्रवाई हो. दूसरी तरफ दिल्ली के एलजी रहे नजीब जंग समेत 12 जानी-मानी हस्तियों ने सुप्रीम कोर्ट में PIL लगाकर शिकायत की है. मांग की है कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के 'हेट स्पीच' के खिलाफ सख्त गाइडलाइंस बनाई जाएं. जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी की याचिका पहले ही सुप्रीम कोर्ट में लग चुकी है जो हेट स्पीच के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में सुने जा रहे केस के साथ क्लप हुई. कुछ दिन पहले मौलाना मदनी ने भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके शिकायत की थी कि  हिमंता के बयान मुसलमानों को निशाना बना रहे हैं. लेफ्ट पार्टियों ने भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाकर हिमंता के मामले में इंसाफ की मांग की है. चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने फिलहाल इतना ही कहा कि लगता है चुनाव का एक हिस्सा सुप्रीम कोर्ट में ही लड़ा जाना लगता है.

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हिमंता खुद को हिंदुत्व के कट्टर रक्षक और घुसपैठ के खिलाफ लड़ने वाले नेता के रूप में पेश करते हैं, वहीं ओवैसी उन्हें संविधान विरोधी और सांप्रदायिक नफरत फैलाने वाला बताते हैं. अब चुनाव आया तो ओवैसी ने हिमंता को सबक सिखाने की ठानी है. कुछ दिन पहले हिमंता ने मियां मुसलमानों को परेशान करने और मुस्लिम ऑटो चालकों को किराया कम देने की बात कही थी. इस पर पलटवार करते हुए ओवैसी ने उन्हें 2 रुपये का भिखारी कहा और  भीख के तौर पर सिक्का दिखाते हुए उनके खाते में पैसे भेजने का मजाक उड़ाया था लेकिन ओवैसी बस प्रेस कॉन्फ्रेंस तक नहीं रूके. 

मिथ को तोड़ने की कोशिश

लंबे वक्त से असदुद्दीन ओवैसी पर आरोप लगता है कि वो बीजेपी की बी टीम हैं लेकिन अब उन्होंने इस मिथ को तोड़ने की कोशिश की है कि वो बीजेपी की बी टीम नहीं, बीजेपी के खिलाफ अपने मुसलमान भाइयों के लिए लड़ रहे हैं. हिमंता जैसे बड़े बीजेपी कद के नेता के खिलाफ एफआईआर कराना कोई दिखावा नहीं हो सकता क्योंकि आगे चलकर ये हिमंता के लिए बड़ी मुश्किल हो सकती है.  असदुद्दीन ओवैसी की भी मजबूरी है कि अगर मियां की गाली देने वाले हिमंता पर शिकंजा नहीं कसेंगे तो किस मुंह से असम में चुनाव लड़ने उतरेंगे, किस मुंह से मिया मुसलमानों से वोट की उम्मीद करेंगे. असम विधानसभा चुनाव 2026 के लिए असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने एक सोची-समझी रणनीति तैयार की है, जिसके फोकस में हैं मियां मुसलमान.

2011 की जनगणना के अनुसार, असम की कुल 3.12 करोड़ की आबादी में मुसलमानों की हिस्सेदारी 34.22% या करीब 1.07 करोड़ थी. अनुमानों लगाया जाता है कि  2021 तक आबादी 40 परसेंट बढ़कर एक करोड़ 40 लाख तक हो गई. मुस्लिम आबादी का एक बड़ा हिस्सा बंगाली भाषी है, जिन्हें मिया कहा जाता है. ऐसे ही मियां मुसलमान हिमंता के टारगेट पर हैं. 

Delimitation से पहले, मुस्लिम वोटर करीब 35 विधानसभा सीटों और 14 लोकसभा सीटों में से 6 पर निर्णायक भूमिका निभाते थे. 2023 के Delimitation के बाद,करीब 25 सीटें ऐसी हैं जहां मिया मुसलमान बहुमत में हैं. असम के 35 जिलों में से कम से कम 11 जिले मुस्लिम बाहुल्य हैं. यकीनन ये किसी भी चुनाव में बड़ा वोट बैंक है जिस पर बीजेपी की नजर नहीं है लेकिन कांग्रेस, ओवैसी और बदरुद्दीन अजमल की सबसे ज्यादा नजर है. 

AIUDF-AIMIM के साथ गठबंधन की बातचीत

ऐसी चर्चा है कि मौलाना बदरुद्दीन अजमल की पार्टी AIUDF ओवैसी की AIMIM के साथ गठबंधन के लिए बातचीत कर रही है. AIUDF भी मुसलमानों की राजनीति करती है और मुसलमान बहुल 35 सीटों पर मजबूती से लड़ने की तैयारी में हैं. 2021 के विधानसभा चुनावों में कुल 31 मुस्लिम विधायक चुने गए थे, जिनमें से 16 कांग्रेस से और 15 AIUDF से थे. वोटिंग पैटर्न: ऐतिहासिक रूप से, बंगाली भाषी मुस्लिम मतदाताओं का झुकाव मौलाना बदरुद्दीन अजमल की पार्टी AIUDF और कांग्रेस की ओर रहा है. 2014 के आंकड़ों के अनुसार, लगभग 45% बंगाली मुसलमानों ने AIUDF को और 36% ने कांग्रेस को वोट दिया था.

अजमल और ओवैसी का साथ गेम-चेंजर साबित हो सकता है. इसमें कांग्रेस के लिए चुनौती ये है कि AIMIM और AIUDF का संभावित गठबंधन कांग्रेस के लिए बड़ी मुसीबत बन सकता है. कांग्रेस को डर है कि ये दोनों मुस्लिम वोटों का बंटवारा करेंगे, जिससे सीधा फायदा बीजेपी को मिल सकता है. असम में विधानसभा चुनाव होने हैं. हिमंता एक तरफ कांग्रेस और गौरव गोगोई से मुकाबला कर रहे हैं तो दूसरी ओर हिंदु वोटों को एकजुट करने के लिए मियां मुसलमानों पर ताबड़तोड़ हमले कर रहे हैं. ये उनकी राजनीति के लिए मुश्किल भी है, यूएसपी भी. बीजेपी हिमंता के लिए फ्रंटफुट पर बैटिंग भी नहीं कर रही तो उनके खिलाफ एक्शन भी नहीं ले रही है. ऐसा लगता है जैसे जो कर रहे हैं उसमें पार्टी की सहमति भी होगी. 

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