बिहार की 'स्नेक लेडी': पलक झपकते ही जहरीले सांपों को वश में कर लेती हैं जानकी देवी, हिम्मत ऐसी कि कोबरा भी पड़ जाए ढीला

वाल्मीकि नगर की जानकी देवी, जिन्हें लोग प्यार से ‘स्नेक लेडी’ कहते हैं, बचपन से अब तक हजारों जहरीले सांप बिना डर पकड़कर सुरक्षित जगह छोड़ चुकी हैं और इसके बदले कभी पैसा नहीं लेतीं.

स्नेक लेडी
स्नेक लेडी
social share
google news

बिहार के वाल्मीकि नगर क्षेत्र में एक ऐसी महिला है जिसके नाम से जहरीले सांप भी थर-थर कांपते हैं. इंडो-नेपाल बॉर्डर से सटे इस इलाके में लोग जानकी देवी को प्यार और सम्मान से 'स्नेक लेडी' के नाम से बुलाते हैं. कोबरा हो, किंग कोबरा हो या विशालकाय अजगर, जानकी देवी बिना किसी डर के इन्हें सुरक्षित पकड़ लेती हैं.

बचपन से है सांपों से नाता

जानकी देवी को सांप पकड़ने का हुनर विरासत में मिला है. उन्होंने महज 7 साल की उम्र से ही सांपों को पकड़ना शुरू कर दिया था. हालांकि वे पढ़ी-लिखी नहीं हैं, लेकिन सांपों की पहचान करने और उनके व्यवहार को समझने में वे किसी विशेषज्ञ से कम नहीं हैं. पिछले कई सालों से वे लगातार सांपों का रेस्क्यू कर रही हैं. [01:36]

हैरतअंगेज दावा- "सांप मुझे काटता है तो वह खुद मर जाता है"

जानकी देवी का दावा है कि उन्हें अब तक 50 से ज्यादा बार जहरीले सांप डस चुके हैं, लेकिन उन पर जहर का कोई गंभीर असर नहीं हुआ. उन्होंने एक हैरतअंगेज दावा करते हुए कहा कि अगर कोई सांप उन्हें काट ले, तो वह खुद ही मर जाता है, जबकि उन्हें कुछ नहीं होता. गांव वाले भी उनके इस 'चमत्कारिक' हुनर पर आंख बंद कर भरोसा करते हैं.

यह भी पढ़ें...

नि:स्वार्थ समाज सेवा

जानकी देवी के काम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वे सांप पकड़ने के बदले किसी से एक रुपया भी नहीं लेतीं. लोग उन्हें फोन करके या साइकिल से बुलाने आते हैं और वे तुरंत निकल पड़ती हैं.

विदेशी चैनल का ऑफर ठुकराया: करीब 15 साल पहले एक विदेशी चैनल ने उनके हुनर को देखकर उन्हें नौकरी का बड़ा ऑफर दिया था, लेकिन उन्होंने अपने गांव और परिवार की सेवा को प्राथमिकता देते हुए उसे ठुकरा दिया. 

हजारों सांपों का रेस्क्यू: वे अब तक हजारों सांपों को पकड़कर सुरक्षित जंगलों में छोड़ चुकी हैं या वन विभाग को सौंप चुकी हैं. 

विपरीत परिस्थितियों में भी नहीं टूटा हौसला

कोरोना काल के दौरान जानकी देवी ने अपने जवान बेटे को खो दिया था. इस दुख ने उन्हें झकझोर कर रख दिया, लेकिन उन्होंने समाज सेवा का अपना रास्ता नहीं बदला. आज भी जब किसी घर में सांप निकलता है, तो लोग सबसे पहले 'जानकी दीदी' को ही याद करते हैं. 

ये भी पढ़ें: बिहार में दही-चूड़ा भोज ने गरमाई पॉलिटिक्स, लालू की तरह ही तेज प्रताप ने किया आयोजन, नीतीश-तेजस्वी को भी न्योता

    follow on google news