Bihar: चोरी पकड़ने गई थी पुलिस, खुद बन गई लुटेरी! रेड के बाद घर से गायब हो गए लाखों और सोना

Bihar Crime News: बिहार में चोरी का माल बरामद करने गई पुलिस टीम पर ही करीब 60 लाख रुपये कैश और 2 किलो सोना गायब करने का गंभीर आरोप लगा है. एसपी ने लापरवाही और नियम तोड़ने के चलते थानाध्यक्ष और दरोगा को सस्पेंड कर दिया है और अब अब हाई लेवल इंक्वाएरी चल रही है.

बिहार पुलिस के अजब गजब कारनामें
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बिहार पुलिस की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है. इस बार मामला वैशाली जिले के लालगंज थाना क्षेत्र का है जहां चोरी का माल बरामद करने गई पुलिस टीम पर ही लाखों की नकदी और भारी मात्रा में सोना-चांदी गायब करने का आरोप लगा है. मामले के सामने आते ही जिले के एसपी ने थानाध्यक्ष समेत दो अफसरों को सस्पेंड कर दिया है.

कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?

लालगंज थाना पुलिस को सूचना मिली थी कि बिलनपुर गांव में रामप्रीत सहनी के घर चोरी का सामान छिपाकर रखा गया है. इसी इनपुट पर थानाध्यक्ष संतोष कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम ने छापेमारी की.

छापे के दौरान कुछ लोग मौके से फरार हो गए, जबकि घर में मौजूद आरोपी की पत्नी को हिरासत में लिया गया. शुरुआत में मामला सामान्य लग रहा था लेकिन कहानी ने तब नया मोड़ लिया जब घरवालों और ग्रामीणों ने पुलिस पर ही सनसनीखेज आरोप जड़ दिए.

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परिजनों का आरोप

रामप्रीत सहनी के परिजनों और गांव वालों का कहना है कि छापेमारी के दौरान पुलिस टीम घर से करीब 50 से 60 लाख रुपये नकद, लगभग 2 किलो सोना और करीब 6 किलो चांदी अपने साथ लेकर चली गई.

सबसे हैरानी की बात यह रही कि पुलिस ने जो जब्ती सूची बनाई उसमें इन कीमती सामानों का कहीं कोई जिक्र ही नहीं है. ग्रामीणों का दावा है कि उन्होंने खुद पुलिसकर्मियों को कैश और गहने उठाकर ले जाते हुए देखा था.

जब्ती सूची में सिर्फ टीवी और मोबाइल

पुलिस रिकॉर्ड में बरामदगी के नाम पर केवल कुछ टीवी, मोबाइल फोन और कारतूस दिखाए गए हैं. जिन लाखों की नकदी और सोने-चांदी की बात परिजन कर रहे हैं, वह कहीं दर्ज नहीं है. यहीं से शक और गहरा गया.

एसपी की सख्त कार्रवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए वैशाली के एसपी ललित मोहन शर्मा ने तुरंत कदम उठाया. लालगंज थाने के थानाध्यक्ष संतोष कुमार और दरोगा सुमन जी झा दोनों को सस्पेंड कर लाइन हाजिर कर दिया गया है.

एसपी ने बताया कि छापेमारी के दौरान वीडियो रिकॉर्डिंग नहीं की गई, जबकि यह नियमों के मुताबिक अनिवार्य है. इसी बड़ी लापरवाही के आधार पर कार्रवाई की गई है.

अब कौन करेगा जांच?

पूरे मामले की गहराई से जांच के लिए एडिशनल एसपी (ट्रैफिक) को जिम्मेदारी सौंपी गई है. अब यही टीम यह पता लगाएगी कि सच में कैश और सोना-चांदी बरामद हुए थे या नहीं और अगर हुए थे तो वे कहां गायब हो गए.

जनता में गुस्सा

इस घटना के बाद इलाके में पुलिस की छवि को गहरा झटका लगा है. लोगों का कहना है कि अगर चोरी पकड़ने गई पुलिस पर ही लूट का शक होने लगे, तो आम आदमी किस पर भरोसा करे? फिलहाल सभी की नजरें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं जो तय करेगी कि यह सिर्फ आरोप हैं या फिर सच में खाकी ने कानून को शर्मसार किया है.

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