पटना हॉस्टल कांड के बाद 'बिहार तक' की ग्राउंड रिपोर्ट: अंदर से कैसा होता है गर्ल्स हॉस्टल? लड़कियों ने बताई सुरक्षा और व्यवस्था की सच्चाई

Patna Hostel Ground Report: पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल कांड के बाद बिहार तक की ग्राउंड रिपोर्ट में जानिए कि गर्ल्स हॉस्टल के अंदर सुरक्षा व्यवस्था कैसी होती है. बोरिंग रोड स्थित निजी गर्ल्स हॉस्टल में छात्राओं की एंट्री-एग्जिट रजिस्टर, सीसीटीवी निगरानी, वार्डन की भूमिका, रहने की सुविधा और छात्राओं के अनुभव क्या कहते हैं. लड़कियों ने बताया कि वे हॉस्टल को क्यों मानती हैं दूसरा घर और कितनी सुरक्षित महसूस करती हैं. पूरी रिपोर्ट पढ़ें.

Patna girls hostel case
पटना हॉस्टल कांड के बाद ग्राउंड रिपोर्ट
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Patna Hostel Ground Report: राजधानी पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में नीट छात्रा की संदिग्ध मौत के बाद शहर के तमाम हॉस्टलों की सुरक्षा और व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं. इस घटना के बाद छात्राओं और उनके अभिभावकों के मन में डर का माहौल है और सभी अपने बच्चों को लेकर काफी चिंतित है. इसी कड़ी में बिहार तक की टीम ने पटना के पॉश इलाके बोरिंग रोड स्थित एक निजी गर्ल्स हॉस्टल पहुंची और वहां कि स्थिति का जायजा लिया. इस दौरान टीम ने वहां मौजूद लड़कियों से लेकर हॉस्टल संचालक तक से बातचीत की, जिसमें सामने आया कि आखिर हॉस्टल के बंद दरवाजों के पीछे लड़कियां कितनी सुरक्षित हैं और उन्हें कैसा माहौल मिलता है?

सुरक्षा के कड़े इंतजाम और रजिस्टर मेंटेनेंस की प्रक्रिया

हॉस्टल के भीतर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर काफी गंभीरता देखने को मिली. वार्डन और प्रबंधन ने बताया कि छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए डबल लेयर चेकिंग की जाती है. यदि कोई छात्रा बाजार या कोचिंग क्लास के लिए बाहर जाती है, तो उसे बाकायदा एक रजिस्टर में जाने का समय दर्ज करना होता है और वापसी पर साइन के साथ समय बताना होता है. 

वहीं, अगर कोई छात्रा अपने घर (गांव) जाना चाहती है, तो हॉस्टल मैनेजमेंट पहले उसके माता-पिता को फोन कर कंफर्म करता है और उनकी सहमति के बाद ही छात्रा को बिल्डिंग से बाहर जाने की अनुमति मिलती है. सुरक्षा के लिहाज से पूरे परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और किसी भी बाहरी पुरुष का ऊपर जाना पूरी तरह वर्जित है.

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अंदरूनी बनावट और छात्राओं के रहने की व्यवस्था

हॉस्टल के भीतर की बनावट छात्राओं की प्राइवेसी और जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है. यहां एक बड़े हॉल को पलाई की दीवारों के जरिए छोटे-छोटे केबिन जैसे कमरों में बदला गया है. मैनेजमेंट यहां तीन तरह के विकल्प देता है: सिंगल, डबल और ट्रिपल शेयरिंग बेड. 

सिंगल रूम उन छात्राओं के लिए है जो अकेले में पढ़ाई करना चाहती हैं, जबकि ट्रिपल रूम उन छात्राओं के लिए है जो बजट को ध्यान में रखते हुए सहेलियों के साथ रहना पसंद करती हैं. हर  छात्रा के लिए अलग बेड और सामान रखने की जगह दी गई है. छात्राओं ने बताया कि वे अपनी सुविधा के अनुसार इन कमरों का चुनाव करती हैं और यहां पढ़ाई के लिए पर्याप्त माहौल उपलब्ध कराया जाता है.

"हॉस्टल नहीं, यह हमारा दूसरा घर है"

हॉस्टल में बीपीएससी और ग्रेजुएशन की तैयारी कर रही छात्राओं ने अपनी सुरक्षा को लेकर खुलकर बात की. उन्होंने बताया कि शंभू हॉस्टल वाली घटना के बाद उनके माता-पिता जरूर थोड़े घबराए हुए हैं और बार-बार फोन कर हालचाल लेते हैं, लेकिन इस हॉस्टल में उन्हें किसी भी तरह का डर महसूस नहीं होता. छात्राओं का कहना है कि यहां की वार्डन और संचालक उनके साथ एक बड़े भाई या गार्जियन की तरह पेश आते हैं और वे अपनी छोटी से छोटी समस्या भी उनसे साझा कर लेती हैं. उन्होंने खाने की गुणवत्ता और हॉस्टल के फ्रेंडली माहौल को अपनी सफलता के लिए जरूरी बताया और कहा कि कुछ बुरे लोगों की वजह से पूरे हॉस्टल सिस्टम को गलत कहना सही नहीं होगा.

हॉस्टल संचालक ने बताई ये बात

हॉस्टल संचालक कृष्णा कुमार सिंह ने बताया कि उन्होंने अपनी मां के निधन के बाद उनकी याद में इस संस्थान की शुरुआत की थी, इसीलिए इसका नाम भी 'माई गर्ल्स हॉस्टल' रखा गया है. उन्होंने कहा कि वे इसे एक व्यापार के बजाय सेवा के रूप में देखते हैं और छात्राओं को घर जैसा सुरक्षित माहौल देने की कोशिश करते हैं. उनका मानना है कि हॉस्टल कभी असली घर की जगह नहीं ले सकता, लेकिन एक अच्छी कोशिश के जरिए छात्राओं के लिए एक सुरक्षित भविष्य की नींव जरूर रखी जा सकती है. उन्होंने यह भी बताया कि उनका संस्थान हर साल कुछ जरूरतमंद बच्चों को मुफ्त शिक्षा और रहने की सुविधा देने का संकल्प भी लेता है.

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