Gold Silver Price update: मिडिल ईस्ट की टेंशन ने निवेशकों में बढ़ाई जोरदार हलचल, सोने-चांदी के भाव में उछाल का फ्यूचर क्या होगा?
ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच सोने और चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड तोड़ उछाल! 6 मार्च को MCX पर सोना ₹1,200 और चांदी ₹6,000 से ज्यादा महंगी हुई. मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण निवेशकों ने सुरक्षित निवेश (Safe Haven Asset) के रूप में सोने की ओर रुख किया है. जानें लेटेस्ट रेट्स और सोने-चांदी के भाव को लेकर एक्सपर्ट की राय.

ईरान-इजरायल संघर्ष सातवें दिन और ज्यादा तेज हो गया है। मिडिल ईस्ट में बढ़े तनाव ने एक बार फिर निवेशकों को डरा दिया है…इसका सीधा असर सोने चांदी की कीमतों पर पड़ा है. सोने चांदी में बड़ा खेल हो गया है. जब भी दुनिया डरती है, तो निवेशक अक्सर एक ही चीज की तरफ भागते हैं और वो है सोना. सोना चांदी में हम आपको इसी पूरे मामले के बारे में विस्तार के साथ बताने जा रहे हैं.
सबसे पहले बात कर लेते हैं सोने चांदी की कीमतों के बारे में. 6 मार्च को सुबह-सुबह सोना और चांदी में तेजी आ गई. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर सोना करीब 1,200 रुपये उछल गया. वहीं चांदी में 6,000 रुपये से ज्यादा की तेजी आई. ये तेजी मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के कारण सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने से आई है. वहीं कमजोर अमेरिकी डॉलर के कारण भी सोने की कीमतों को सपोर्ट मिला. शुक्रवार सुबह 9:30 बजे अप्रैल डिलीवरी वाला सोना तेजी के साथ 1,60,880 रुपये पर कारोबार कर रहा था. वहीं चांदी प्रति किलोग्राम 5,703 रुपये के उछाल के साथ 2,67,894 रुपये पर थी.
अंतरराष्ट्रीय बाजार की बात करें तो स्पॉट गोल्ड करीब 0.8% बढ़कर 5,117 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया. इससे पहले पिछले सत्र में सोने की कीमतों में 1% से ज्यादा गिरावट आई थी. लेकिन जैसे ही मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा, निवेशकों ने फिर से सोना खरीदना शुरू कर दिया. सोने को हमेशा से Safe Haven Asset यानी सुरक्षित निवेश माना जाता है. इसका मतलब है कि जब युद्ध, आर्थिक संकट या अनिश्चितता बढ़ती है, तो निवेशक सोने की तरफ जाते हैं.
मिडिल ईस्ट का संघर्ष और हुआ डेंजर, अब सोने-चांदी का क्या होगा?
मिडिल ईस्ट में चल रहा संघर्ष अब और गंभीर होता जा रहा है. ईरान ने इजरायल, संयुक्त अरब अमीरात और कतर पर हमले किए. दूसरी तरफ अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई भी जारी है. अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सेनाओं के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा है कि अमेरिका के पास इतनी सैन्य ताकत है कि वह लंबे समय तक कार्रवाई जारी रख सकता है. ऐसे माहौल में निवेशकों के मन में डर बढ़ गया है और इसका सीधा फायदा सोने को मिला है.
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सोने की कीमतों में तेजी की एक और वजह रही अमेरिकी डॉलर की कमजोरी. जब डॉलर कमजोर होता है, तो दूसरे देशों के निवेशकों के लिए सोना खरीदना सस्ता हो जाता है. इससे सोने की मांग बढ़ जाती है और कीमतों में उछाल आता है. अगर पूरे साल की बात करें तो सोना पहले ही करीब 18% तक बढ़ चुका है. भू-राजनीतिक तनाव, महंगाई और आर्थिक अनिश्चितता की वजह से सोने ने इस साल कई बार रिकॉर्ड हाई भी बनाया है.
हालांकि इस हफ्ते सोने की कीमतों में थोड़ी कमजोरी भी देखी गई. अब तक इस सप्ताह सोना लगभग 3% तक गिर चुका है, क्योंकि ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद थोड़ी कम हुई है और ऊर्जा कीमतों में उछाल से महंगाई की चिंता बढ़ गई है.
अब आगे क्या होगा?
अब बात करते हैं कि आगे क्या हो सकता है. मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि आने वाले समय में सोने की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक सोने का सपोर्ट लेवल 5,040 डॉलर के आसपास है जबकि रेजिस्टेंस 5,280 डॉलर पर माना जा रहा है. अगर यह रेजिस्टेंस टूटता है, तो सोने की कीमत 5,448 डॉलर तक भी जा सकती है.
दिलचस्प बात यह है कि भारत में इस हफ्ते फिजिकल गोल्ड की मांग थोड़ी कमजोर रही. कारण है कि कीमतों में ज्यादा उतार-चढ़ाव देखा गया. जब कीमतें बहुत तेजी से बदलती हैं, तो आम खरीदार खरीदारी से थोड़ा रुक जाते हैं. लेकिन चीन में निवेश की मांग मजबूत बनी हुई है, जिसकी वजह से वहां गोल्ड प्रीमियम स्थिर रहे.
सोने के अलावा दूसरी कीमती धातुओं में भी तेजी
सोने के साथ-साथ दूसरे कीमती धातुओं में भी तेजी देखने को मिली. चांदी 2.4% बढ़कर 84 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच गई. प्लैटिनम करीब 1.4% बढ़ा जबकि पैलेडियम में 2% की तेजी आई. अब निवेशकों की नजर अमेरिका की रोजगार रिपोर्ट पर है, जो जल्द जारी होने वाली है. यह रिपोर्ट तय करेगी कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था कितनी मजबूत है और ब्याज दरों को लेकर फेडरल रिजर्व आगे क्या फैसला ले सकता है.
कुल मिलाकर तस्वीर साफ है. मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव, डॉलर की कमजोरी और वैश्विक अनिश्चितता...इन सबका फायदा फिलहाल सोने को मिल रहा है. अब देखना ये होगा कि युद्ध कितना लंबा चलता है और इससे बाजार पर कितना असर पड़ता है.










