अमेरिका के आगे झुके मोदी, देश का स्वाभिमान गिरवी रखा- संजय सिंह
संजय सिंह ने मोदी सरकार पर अमेरिका के आगे सरेंडर का आरोप लगाया. रूस से तेल बंद, महंगा अमेरिकी तेल और कृषि आयात पर शून्य शुल्क से किसान व जनता पर महंगाई का खतरा.

आम आदमी पार्टी की वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने मंगलवार को एक बयान जारी करते हुए कहा कि आज का दिन भारत के करोड़ों किसानों और आम जनता के लिए काला दिन है. आज नरेंद्र मोदी सरकार ने देश को विश्वास में लिए बिना अमेरिका के आगे सरेंडर कर दिया है और महंगाई व किसान बर्बादी की नींव रख दी है. हैरानी की बात यह है कि इस फैसले की जानकारी भारत सरकार ने नहीं, बल्कि अमेरिका के राष्ट्रपति ने ट्वीट करके दी, जो यह साबित करता है कि भारत की अर्थव्यवस्था और नीतिगत फैसले अब वॉशिंगटन से तय हो रहे हैं.
संजय सिंह ने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति ने सार्वजनिक रूप से बताया कि अब भारत रूस से तेल नहीं खरीदेगा, बल्कि अमेरिका और वेनेजुएला से तेल खरीदेगा. यह फैसला देशहित के खिलाफ है. वेनेजुएला का तेल घटिया गुणवत्ता वाला होता है, जिसे रिफाइन करना बेहद महंगा पड़ता है, जबकि अमेरिका का तेल रूस की तुलना में कहीं ज्यादा महंगा है. इसका सीधा असर भारत की जनता पर पड़ेगा और पेट्रोल-डीजल से लेकर हर जरूरी चीज महंगी होगी. उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किस दबाव में आकर देश को महंगाई की आग में झोंक दिया?
उन्होंने कहा कि इससे भी ज्यादा खतरनाक फैसला किसानों के खिलाफ लिया गया है. मोदी सरकार ने अमेरिका से आने वाले सभी कृषि उत्पादों पर शून्य शुल्क लगाने का निर्णय किया है. इसका मतलब है कि अमेरिका से आने वाला कपास, गेहूं, सब्जियां और अन्य कृषि उत्पाद टैक्स फ्री होंगे. इससे अमेरिकी कृषि उत्पाद भारतीय बाजार में सस्ते बिकेंगे और भारतीय किसानों की फसल कोई खरीदने वाला नहीं रहेगा. यह फैसला देश के करोड़ों किसानों को बर्बादी की ओर धकेलने वाला है.
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संजय सिंह ने कहा कि देश की 70 से 80 करोड़ आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से खेती पर निर्भर है. भारतीय किसान आज भी देश का पेट भरता है और अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, लेकिन नरेंद्र मोदी सरकार ने किसान की पीठ और पेट दोनों पर छुरा घोंप दिया है. यह वही विश्वासघात है जो तीन काले कृषि कानूनों के जरिए किया गया था और अब अमेरिका को खुली छूट देकर किसानों को दोबारा कुचलने की साजिश रची गई है.
उन्होंने कहा कि अब गोदी मीडिया इस फैसले को भी उपलब्धि बताकर ढोल पीटेगा. कल तक यही मीडिया दावा कर रहा था कि भारत अमेरिका को जवाब दे रहा है, और आज वही मीडिया बताएगा कि प्रधानमंत्री ने कितना बड़ा फैसला लिया. लेकिन सच्चाई यह है कि भारत के फैसले अब अमेरिकी राष्ट्रपति के ट्वीट से सामने आ रहे हैं, चाहे वह सीजफायर का दावा हो या भारत की ट्रेड डील.
संजय सिंह ने कहा कि अमेरिका की एग्रीकल्चर सेक्रेटरी का बयान सामने आया है, जिसमें वह इस डील पर खुशी जताते हुए ट्रंप को बधाई दे रही हैं. यह साफ है कि यह समझौता अमेरिका के किसानों और कॉरपोरेट्स के लिए फायदेमंद है, भारत के किसानों के लिए नहीं. उन्होंने प्रधानमंत्री को चेतावनी देते हुए कहा कि देश के किसानों की ताकत को कम मत आंकिए और देश को महंगाई की आग में मत झोंकिए.
उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऐसी कौन-सी मजबूरी है कि वह बार-बार भारत के स्वाभिमान, सम्मान और हितों को अमेरिका के हाथों बेचते जा रहे हैं. संजय सिंह ने कहा कि हाल ही में एप्स्टीन फाइल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम का जिक्र हुआ है और अडानी को अमेरिका से घपला-घोटाले के मामले में सम्मन भेजा गया है. क्या यही दबाव है, जिसके चलते भारत का कृषि बाजार अमेरिका के लिए खोल दिया गया और महंगा तेल खरीदने का फैसला लिया गया?
संजय सिंह ने साफ शब्दों में कहा कि देश यह जानना चाहता है कि प्रधानमंत्री पर ऐसा कौन-सा दबाव है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यह ट्रेड डील वापस नहीं ली गई और किसानों व आम जनता के खिलाफ लिए गए फैसले रद्द नहीं किए गए, तो सड़क से लेकर संसद तक मोदी सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन खड़ा होगा.










