कार्यक्रम में नहीं आईं तो कट जाएगा नाम... लाड़ली बहना योजना को लेकर मंत्री करण सिंह वर्मा का बड़ा, VIDEO वायरल

मध्य प्रदेश के सीहोर के धामंदा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मंत्री करण सिंह वर्मा ने लाड़ली बहना योजना की लाभार्थी महिलाओं की कम मौजूदगी पर नाराजगी जताते हुए कहा कि नहीं आने पर नाम काटे जा सकते हैं.

MP के मंत्री करण सिंह वर्मा
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MP News: मध्य प्रदेश के सीहोर जिले से राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा का एक बयान इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. दरअसल धामंदा गांव में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने लाड़ली बहना योजना का जिक्र करते हुए महिलाओं की उपस्थिति पर सवाल उठा दिया. 

मंत्री वर्मा ने मंच से कहा कि इलाके की 894 महिलाओं को योजना का लाभ मिल रहा है लेकिन कार्यक्रम में उनकी संख्या कम दिखाई दी. इस पर उन्होंने अधिकारियों को निर्देश देने की बात कही और कहा कि सभी लाभार्थियों को बुलाया जाएगा और अगर वे नहीं आतीं तो उनके नाम लिस्ट से हटा दिए जा सकते हैं. उन्होंने ये तक कह दिया कि इसकी रिपोर्ट भेज दी जाएगी.

योजनाओं को गिनवाने लगें मंत्री 

अपने संबोधन में मंत्री ने सरकार की योजनाओं को गिनाते हुए बताया कि किसानों को सम्मान निधि दी जा रही है, हर महीने राशन उपलब्ध कराया जा रहा है और लाड़ली बहनों के खातों में पैसे भेजे जा रहे हैं. विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने सवाल किया कि क्या पहले ऐसी सुविधाएं मिलती थीं? उन्होंने लोगों से अपील की कि जो सरकार काम कर रही है उसकी सराहना भी होनी चाहिए. 

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मंत्री ने क्षेत्र में हो रहे विकास कार्यों का भी जिक्र करते हुए कहा भोपाल और इंदौर की तरह यहां भी सड़कों का निर्माण कराया जा रहा है. साथ ही सरकारी धन के दुरुपयोग पर कड़ा संदेश देते हुए कहा कि सरकारी पैसे का एक रुपया भी गलत तरीके से खर्च करना बेहद गंभीर बात है. 

लोकार्पण के कार्यक्रम में पहुंचे थें मंत्री करण सिंह वर्मा

दरअसल, गुरुवार को मंत्री करण सिंह वर्मा ने ग्राम नापलाखेड़ी में करीब 56.09 लाख रुपये की लागत से बने उप स्वास्थ्य केंद्र और धामंदा में लगभग 65 लाख रुपये से तैयार आयुष्मान आरोग्य मंदिर का लोकार्पण किया. इसी कार्यक्रम के दौरान दिया गया उनका बयान अब चर्चा का विषय बना हुआ है और इंटरनेट पर जमकर शेयर किया जा रहा है.

मंत्री का यह बयान सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है. समर्थक इसे सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाला बयान बता रहे हैं जबकि विरोधी इसे सख्त और दबाव बनाने वाला रुख मान रहे हैं. फिलहाल, वायरल वीडियो को लेकर बहस जारी है.

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