Shesh Bharat: कौन हैं कृष्णा प्रसाद टेनेटी? DGP से सांसद बने टेनेटी क्यों अचानक छा गए राष्ट्रीय चर्चा में?
बापटला से टीडीपी सांसद और पूर्व आईपीएस कृष्णा प्रसाद टेनेटी लोकसभा में हंगामे के दौरान मार्शल की तरह डटकर खड़े होने के कारण चर्चा में हैं. पीठासीन सभापति के रूप में उन्होंने विपक्षी सांसदों को सदन की मर्यादा सिखाई.

लोकसभा में 3 फरवरी को हुए हंगामे के बीच एक चेहरा अचानक राष्ट्रीय चर्चा में आ गया- बापटला से टीडीपी सांसद कृष्णा प्रसाद टेनेटी. छोटे से पॉलिटिकल करियर में पहला मौका है जब इतनी चर्चा हो रही है.
3 फरवरी को लोकसभा में जब कांग्रेस के 8 सांसद स्पीकर की चेयर की ओर बढ़ रहे थे, तब इस पूर्व IPS अधिकारी ने वो किया जो अक्सर मार्शल करते हैं. विवाद शुरू हुआ राहुल गांधी को चीन सीमा पर बोलने से रोकने पर. कांग्रेस सांसदों ने कागज फाड़े और सेक्रेटरी जनरल की टेबल पर चढ़ने की कोशिश की. इसी दौरान टेनेटी अपनी सीट से उठे और संसद के मार्शल की तरह दीवार बनकर खड़े हो गए. उन्होंने न केवल सदन की मर्यादा बचाई, बल्कि विपक्षी सांसदों को अनुशासन का ऐसा पाठ पढ़ाया कि सत्ता पक्ष ने खड़े होकर तालियां बजाईं. DGP से सांसद बने टेन्नेटी ने सदन की मर्यादा और सुरक्षा को लेकर जो स्टैंड लिया, उसने सरकार को फैन बना दिया. चंद्रबाबू नायडू ने फोन कर शाबाशी दी.
लोकसभा में हंगामा
बजट पेश होने के बाद लोकसभा में दो तरह का हंगामा हुआ. राहुल गांधी ने जनरल नरवणे की विवादित किताब पढ़ने की कोशिश तो स्पीकर ओम बिरला से भिड़ंत हुई. भाषण नहीं हो पाया तो राहुल के समर्थन में कांग्रेस के सांसदों ने मोर्चा संभाला तब स्पीकर की कुर्सी पर बैठे थे Presiding Officer पीठासीन सभापति कृष्णा प्रसाद टेनेटी. पीठासीन सभापति वो होते हैं जो स्पीकर की गैरमौजूदगी में सदन चलाने के लिए नियुक्त होते हैं. आम तौर पर पीठासीन सभापति का फोकस केवल सदन चलाने पर होते हैं. सांसदों पर एक्शन या डांट-फटकार से बचते हैं.
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कागज वाला एंबियंस
ओम बिरला की गैरमौजूदगी में सदन चलाते हुए कृष्णा प्रसाद टेनेटी ने ऐसे सदन चलाया कि हंगामा और बढ़ गया. उनके सीट पर होते हुए सांसदों ने कागज उछाले. कृष्णा प्रसाद ने कुछ नहीं किया लेकिन स्पीकर ने किसी ने यार कहकर पुकार दिया तो फिर उन्होंने आपा खो दिया. यार किस सांसद ने कहा, इसकी पुष्टि नहीं हो पाई लेकिन कृष्णा प्रसाद ने केसी वेणुगोपाल को रगड़ दिया. कृष्णा प्रसाद के ब्रेक लेने के बाद सीट पर आए बीजेपी के दिलीप सैकिया ने 8 सांसदों को पूरे सत्र के लिए सस्पेंड करके बवाल मचा दिया.
1986 बैच के IPS अधिकारी रहे
कृष्णा प्रसाद 2020 में तेलंगाना के DGP के पद से रिटायर हुए. करीब 35 साल की पुलिस सर्विस से रिटायर होकर उन्होंने राजनीति में कदम रखा. चंद्रबाबू नायडू के साथ उन्होंने लंबे समय तक काम किया और करीबी अफसरों में भी रहे. 2023 में बीजेपी में शामिल हुए लेकिन 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए उन्हें पार्टी बदलनी पड़ी. आंध्र की बापतला बीजेपी-टीडीपी अलायंस में टीडीपी के हिस्से में गई. कृष्णा प्रसाद को लड़ाने में दोनों पार्टियों का इंटरेस्ट था. चंद्रबाबू नायडू को बापटला रिजर्व सीट के लिए एक ऐसे चेहरे की तलाश थी जो न केवल पढ़ा-लिखा हो, बल्कि जिसकी छवि 'क्लीन' हो. नायडू ने पर्सनली कृष्ण प्रसाद को टीडीपी ज्वाइन करने और बापटला से लड़ने का न्योता दिया. चुनाव में चंद्रबाबू नायडू ने कृष्णा प्रसाद का खूब डंका पीटा कि उनके जैसे लोग राजनीति में आएंगे, तभी सिस्टम सुधरेगा.
इसलिए उन्होंने बीजेपी छोड़ी और टीडीपी में आए
कृष्णा प्रसाद पहला चुनाव जीतकर सांसद बन गए. उन्होंने वाईएसआर कांग्रेस (YSRCP) के मजबूत उम्मीदवार नंदिगराम सुरेश को 2 लाख से ज्यादा वोटों के भारी अंतर से हराया. यह जीत केवल एक राजनीतिक जीत नहीं थी, बल्कि एक रिटायर्ड अधिकारी की ईमानदारी पर जनता की मुहर थी. पहले टर्म में ही उन्हें स्पीकर के पैनल में शामिल किया गया. नायडू उन्हें संसद में टीडीपी के उन चेहरों के रूप में देखते हैं जो पार्टी की बौद्धिक (Intellectual) छवि को राष्ट्रीय स्तर पर पेश करते हैं. चंद्रबाबू नायडू अक्सर उन्हें "एकेडेमिकली सबसे मजबूत सांसद कहकर संबोधित करते हैं. दोनों के बीच रिश्ता एक बॉस और अधिकारी का नहीं, बल्कि दो विजनरी दोस्तों जैसा माना जाता है. नायडू ने infrastructure FDI जुटाने आंध्र प्रदेश इंन्फास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट का ईडी भी बनाया.
दलित परिवार में जन्में कृष्णा प्रसाद ने 1986 में आईपीएस बनने से पहले खूब पढ़ाई की. N I.T. Warangal से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया. I.I.M. Ahmedabad से एमबीए किया. इतना करने के बाद उस्मानिया यूनिवर्सिटी से LLB भी किया. फिर पहले अटेम्ट में सिविल सर्विसेज क्रैक करके आईपीएस बन गए. अभी भी सस्टेनेबल अर्बन मोबिलिटी में PhD कर रहे हैं. शुरुआत में वे आंध्र प्रदेश कैडर में थे, लेकिन 2014 के विभाजन के बाद तेलंगाना कैडर में चले गए. आंध्र में एंटी नक्सल ऑपरेशंस को लीड करते हुए न केवल 700 नक्सलियों का सरेंडर कराया बल्कि socio-economic rehabilitation strategies के तहत Three Tent और संजीवनी मिशन के जरिए मुख्य धारा में लाए. पुलिस अफसर रहते हुए मलुपु Malupu नाम कार्यक्रम चलाया जो चमड़ा कारीगरों की मदद के लिए था. इससे उन्हें खूब वाहवाही मिले. उन्हें "बापटला का रक्षक कहा जाने लगा. President’s Police Medal for Distinguished Service भी पाए कृष्णा प्रसाद.
NGO चलाते हैं कृष्णा प्रसाद
कृष्णा प्रसाद फाउंडेशन नाम का एक NGO चलाते हैं. जिसने कोविड के दिनों में अमेरिकन इंडिया फाउंडेशन के साथ मिलकर ऑक्सीजन सिलेंडर, वेंटिलेटर, कंसंट्रेटर और मॉनिटर जैसी मेडिकल सुविधाएं डोनेट की. उन्होंने तेलंगाना के विकाराबाद जिले के येर्रावल्ली गांव को गोद लिया हुआ है, जहां उन्होंने लड़कियों को उच्च शिक्षा हासिल करने में मदद करने के लिए साइकिलें दान कीं. 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए चुनाव आयोग को दिए गए हलफनामे (Affidavit) के अनुसार, बापटला सांसद कृष्ण प्रसाद टेन्नेटी की कुल संपत्ति लगभग ₹15.6 करोड़ से ज्यादा है. पत्नी डॉ. टी. सीमा प्रैक्टिशिंग डॉक्टर है. हालांकि परिवार के बारे में ज्यादा जानकारी सार्वजनिक नहीं है.










