Shesh Bharat: तमिलनाडु BJP में बड़ा उलटफेर: 'सिंघम' अन्नामलाई ने चुनाव से पहले छोड़ी बड़ी जिम्मेदारी!

तमिलनाडु बीजेपी के कद्दावर नेता अन्नामलाई ने चुनाव से ठीक पहले इलेक्शन इंचार्ज की जिम्मेदारी छोड़ दी है. उन्होंने बीमार पिता की देखभाल का हवाला देकर चुनावी ड्यूटी से नाम वापस लिया है, हालांकि, पार्टी के भीतर गुटबाजी और नए अध्यक्ष से अनबन की चर्चाएं भी तेज हैं.

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कर्नाटक पुलिस का वो जांबाज अफसर जिसे सिंघम कहा जाता था वो आज तमिलनाडु की राजनीति का सबसे चर्चित चेहरा बन चुका है. वह शख्स, जिसने खाकी वर्दी को त्यागकर भगवा चोला ओढ़ा और द्रविड़ राजनीति के गढ़ में अपनी एक अलग पहचान बनाई.  कुछ ही वक्त में अन्नामलाई तमिलनाडु में इतनी बड़ी उम्मीद बन गए तो बीजेपी ने सोच लिया कि अब तमिलनाडु दूर नहीं लेकिन ऐसा हुआ नहीं. अब विधानसभा चुनाव आया तो अन्नामलाई को ताबड़तोड़ ऐसी खबरें आ रही हैं जो बीजेपी के लिए कोई अच्छा संकेत नहीं हैं.

अचानक बम फोड़ते हुए अन्नामलाई से पार्टी से मिली Election In-charge की जिम्मेदारियां छोड़ने का एलान कर दिया है. उन्होंने पार्टी से कहा कि उनके प्रभार वाली 6 विधानसभा सीटों सिंगानल्लूर, मदुरै दक्षिण, विरुगंबाक्कम, कराईकुडी, श्रीवैकुंठम और पद्मनाभपुरम के लिए किसी और को नियुक्त किया जाए. जब चुनाव एकदम सिर पर है तो अन्नामलाई ने कहा कि उन्होंने कहा कि उनके लिए बीमार पिता की देखभाल पहले जरूरी है. कोयम्बटूर में ही रहकर पिता का केयर करेंगे. वो अभी ट्रैवल करने या पार्टी का बेसिक वर्क करने की स्थिति में नहीं हैं. अब तक अन्नामलाई कोयम्बटूर में ससुराल वाले घर में रह रहे थे. उन्होंने अब किराए का मकान लिया है. इससे पिता की सेवा भी होगी और लोगों के साथ संपर्क भी बना रहेगा.

6 सीटों की मिली थी जिम्मेदारी

इन 6 सीटों में एक सीट कोयम्बटूर की सिंगानल्लूर सीट है जहां से अन्नामलाई के चुनाव लड़ने की चर्चा चल रही है. अन्नामलाई ने न केवल अपनी सीट की जिम्मेदारी छोड़ी बल्कि चुनाव लड़ने पर भी सस्पेंस पैदा किया है. ये चर्चा तेज है कि अन्नामलाई विधानसभा चुनाव लड़े ही नहीं. अगर ऐसा सच में हुआ तो मुहर लग जाएगी कि बीजेपी और अन्नामलाई में तो कुछ तो चल रहा है.

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तमिलनाडु चुनाव में बीजेपी ने AIADMK के साथ एनडीए अलायंस बनाया है. बीजेपी ने वो 41 सीटें अपने लिए छांटी हैं जिन पर वो लड़ेगी. उन 41 में से 6 सीटें की जिम्मेदारी अन्नामलाई को दी गई. अन्नामलाई ने फैमिली फर्स्ट बोलते हुए प्रदेश अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन को पार्टी से मिला काम लौटा  दिया. हालांकि उन्होंने कहा है कि वो पार्टी का काम और प्रचार करते रहेंगे. बाकी एक महीने में कोई बड़ा अनाउंसमेंट करते रहेंगे. 

BJP-AIADMK गठबंधन की पृष्ठभूमि

तमिलनाडु बीजेपी में अन्नामलाई फ्रंट पर रहे. फिर धीरे-धीरे बैक डोर में जाते गए. उनके प्रदेश अध्यक्ष बनने पर AIADMK से अलायंस टूटा. रिश्ते खराब हुए. अलायंस टूटने के बाद लोकसभा चुनाव में बीजेपी-AIADMK दोनों की हार हुई. अन्नामलाई को AIADMK ने विलेन माना. अन्नामलाई की अग्रेसिव पॉलिटिक्स से DMK तो परेशान हुई बीजेपी-AIADMK के साथ भी दरार पैदा कर दी. द्रविड़ दिग्गजों सी.एन. अन्नादुरै और जयललिता के बारे में दी गई उनकी विवादास्पद टिप्पणियों ने तमिलनाडु की राजनीति में भूचाल ला दिया. नाराज होकर AIADMK ने बीजेपी के साथ दशकों पुराना गठबंधन तोड़ दिया.  AIADMK से अलायंस करने के लिए बीजेपी ने सबसे पहले अन्नामलाई की बलि दी. उन्हें प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाया. हालांकि पार्टी में उनका कद नहीं हुआ. अब चुनाव आया तो उन्होंने एक तरह से चुनावी ड्यूटी से मना करके भूचाल मचा दिया है.

बीजेपी के भीतर छिड़ी 'वर्चस्व की जंग'

तमिलनाडु बीजेपी में एक चर्चा अरसे से रही है कि उनकी प्रदेश अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन से पट नहीं रही. अन्नामलाई के बाद अप्रैल 2025 में नागेंद्रन प्रदेश अध्यक्ष बने लेकिन पार्टी के भीतर वर्चस्व का कोल्ड वॉर होता रहा.  नागेंद्रन ने पद संभालते ही अन्नामलाई के दौर में बने 'वॉर रूम' कल्चर को खत्म करने की कोशिश की है. उन्होंने 'मीडिया एम्पॉवर नेटवर्क' (MEN) नाम से एक नई कमेटी बनाई है जो पार्टी के सोशल मीडिया हैंडल की निगरानी करती है. नागेंद्रन का आरोप है कि अन्नामलाई समर्थक कुछ सोशल मीडिया हैंडल पार्टी के नए सहयोगी AIADMK और खुद उनके खिलाफ पोस्ट कर रहे हैं. नैनार का कद इसलिए भी बढ़ा कि उन्होंने AIADMK से रिश्ता सुधारकर अलायंस पक्का करा लिया. अन्नामलाई के करीबी वफादारों को साइड लाइन करने से भी विवाद बढ़ा है. नागेंद्रन की लाइन है कि पार्टी में व्यक्तिगत वफादारी नहीं चलेगी. काम टीम वर्क से ही काम करना होगा. 

IPS से राजनीति तक का सफर

2011 बैच के IPS अधिकारी अन्नामलाई का पुलिस करियर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है. कर्नाटक के उडुपी और चिक्कमगलुरु में SP के तौर पर उनकी तूती बोलती थी. छात्रों के मसीहा की इमेज बनाई. उडुपी में छात्रों की समस्याओं को सुलझाने के लिए इतने लोकप्रिय हुए कि उनके ट्रांसफर पर लोग सड़कों पर उतर आए थे. 2019 में अचानक उनका मन बदला. आईपीएस की नौकरी छोड़कर राजनीति में आ गए. बीजेपी ज्वाइन कर ली. 2020 में अन्नामलाई भाजपा में शामिल हुए और महज एक साल के भीतर वे तमिलनाडु भाजपा के सबसे युवा अध्यक्ष बन गए. अन्नामलाई ने अपनी 'एन मन, एन मक्कल' (मेरी मिट्टी, मेरे लोग) पदयात्रा के जरिए राज्य के हर कोने में जनाधार मजबूत करने की कोशिश की.

अन्नामलाई बीजेपी को चर्चा में लाए लेकिन वोट नहीं दिला पाए. दशकों तक तमिलनाडु की राजनीति DMK और AIADMK के इर्द-गिर्द सिमटी रही है, जहां कांग्रेस-बीजेपी जैसी नेशनल पार्टियां किसी न किसी द्रविड़ पार्टी की पिछलग्गू बनकर रहीं.  अन्नामलाई ने ये स्थिति बदलने की कोशिश की लेकिन पूरे कामयाब नहीं रहे. 

लोकसभा चुनाव में ऐतिहासिक वोट शेयर

हालांकि बीजेपी ने 2024 में बिना किसी बड़े द्रविड़ पार्टनर के अकेले चुनाव लड़कर 11 से ज्यादा ऐतिहासिक वोट शेयर हासिल किया. 2019 के 3.58% के मुकाबले तीन गुना था. राज्य की 39 सीटों में से 11 पर बीजेपी दूसरे नंबर पर रही. चेन्नई जैसे कोयंबटूर) में बीजेपी ने AIADMK को तीसरे स्थान पर धकेल कर दूसरे नंबर की पार्टी का दावा किया. इसका श्रेय काफी हद तक अन्नामलाई को दिया जाता है. अन्नामलाई खुद कोयंबटूर सीट से चुनाव हार गए, लेकिन उन्होंने 32 से ज्यादा वोट हासिल करके बीजेपी के लिए उम्मीद जगाई. 

आज भी पार्टी इतनी कॉन्फिडेंट नहीं कि अन्नामलाई की लाइन पर अकेले लड़ने का साहस कर दिखाए. विजय की एंट्री के बाद पार्टी के लिए क्राइसिस और चैलेंज और बढ़ा है. तमिलनाडु में बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चुनौती 'सीटों' में वोट शेयर को बदलना है. हालांकि वोट बढ़ रहे हैं, लेकिन अलायंस की राजनीति के बिना बहुमत हासिल करना अब भी एक पहाड़ जैसी चुनौती है.

 

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