संसद के बाहर राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री रवनीत बिट्टू में हो गई जुबानी जंग, गद्दार दोस्त...देश का दुश्मन फिर हैंडशेक से इनकार
संसद बजट सत्र के छठे दिन मकर द्वार पर राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के बीच तीखी जुबानी जंग हो गई. हाथ मिलाने से इनकार, 'देश का दुश्मन' और गद्दार दोस्त जैसे बयान से बढ़ा विवाद. वीडियो वायरल हो गया है और सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई है.

संसद के बजट सत्र के छठवें दिन मकर द्वार पर अलग नजारा देखने को मिला. यहां प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस सांसदों के सामने से केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू गुजर रहे थे. जैसे ही उनपर राहुल गांधी की नजर पड़ी तो उन्होंने कुछ ऐसा कह दिया कि दोनों में जुबानी जंग हो गई. राहुल गांधी ने रवनीत सिंह बिट्टू को देखते ही कहा- ''हैलो ब्रदर, माई ट्रेटर फ्रेंड, डोंट वरी, यू विल कम बैक''. यानी हैलो भाई...मेरा गद्दार दोस्त...चिंता मत करो...तुम वापस आओगे.
ये कहकर राहुल गांधी ने रवनीत सिंह बिट्टू की तरफ हाथ बढ़ाया. रवनीत बिट्टू ने राहुल गांधी और दूसरे कांग्रेस सांसदों की तरफ देखते हुए उन्हें 'देश का दुश्मन' कहते हुए हाथ मिलाने से इनकार कर दिया. उन्होंने ये भी का कि देश के दुश्मनों से मेरा कोई लेना-देना नहीं है. वे मुस्कुराते हुए आगे बढ़े...कांग्रेस सांसदों ने सरेंडर...सरेंडर बोला. इसपर रवनीत सिंह बिट्टू राहुल गांधी तरफ ऊंगली दिखाते हुए... देश के दुश्मन...देश के दुश्मन... बोलते हुए चले गए.
जब राहुल गांधी और बिट्टू के बीच जुबानी जंगी हुई उस वक्त लुधियाना लोकसभा सीट से कांग्रेस पार्टी के सांसद अमरिंदर राजा वारिंग भी मौजूद थे. उन्होंने मामले पर अपना रिएक्शन देते हुए कहा- ''राहुल गांधी ने इस देश में उनको (बिट्टू) पहचान दी है. राहुल गांधी जी ने उनको संसद में आने का मौका दिया. फिर यहां पर आकर उन्होंने सौदेबाजी शुरू कर ली. ये तो पता नहीं कि देश का दुश्मन कौन है. ये तो देश की जनता बताएगी कि देश का दुश्मन वो हैं जिनके परिवार जनों ने इस देश के लिए अपनी जाने कुर्बान दी है या वो लोग हैं जो धोखा करते हैं. पीठ में छुरा मारते हैं.''
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मामले पर बिट्टू का भी आ गया रिएक्शन
मामले पर रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा- ''वो समझते हैं कि सबसे बड़े देश भक्त वही हैं. उनके पिताजी ने शहादत दी है. मेरी लड़ाई पार्टी में यही थी कि मेरे दादा जी सरदार बेअंत सिंह...पंजाब में गांधी फैमिली और कांग्रेस ने आग लगाई थी. हमारे सबसे बड़े पवित्र गुरुद्वारा के ग्रंथ साहिब जी के अंगों में गोली लगी. हजारों सिक्खों और पंजाबियों को निशाना बनाकर इन्होंने कत्ल कराया. यदि राजीव गांधी का नाम शहीद के रूप में लेना पड़ता है तो साथ में शहीद-ए-आजम सरदार बेअंत सिंह कहना पड़ता है क्योंकि मैं उनका पोता हूं यही उनकी तकलीफ है.''
राहुल गांधी अपने आप को समझते क्या हैं?- बिट्टू
रवनीत सिंह बिट्टू ने आगे कहा- ''ये अपने आप को समझते क्या हैं? वे ये चीजें कहके हाथ आगे कर रहे हैं जैसे कोई शहंशाह होंं. वे समझते हैं कि मालिक हैं इस दुनिया के. हाथ बढ़ाने पर मैंने कहा- आपलोग तो देश के गद्दार हो...देश के दुश्मन है...जो रोज फौज के और देश के अगेंस्ट में बात करते हो.''
इसलिए नहीं मिलाया हाथ
राहुल गांधी से हाथ नहीं मिलाने पर केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा- 'ये हाथ पंजाबी का है. गांधी परिवार जो सिक्खों का कातिल है उस परिवार के वारिस के साथ ये हाथ नहीं मिल सकता है.''
कौन हैं रवनीत सिंह बिट्टू?
रवनीत बिट्टू पंजाब के पूर्व सीएम बेअंत सिंह के पोते हैं. महज 11 साल के बिट्टू ने अपने पिता को खो दिया. 20 साल की उम्र में इनके दादा बेअंत सिंह की 31 अगस्त 1995 को चंडीगढ़ में खालिस्तान समर्थक आतंकवादियों ने हत्या कर दी. रवनीत खालिस्तान समर्थक कट्टरपंथी आवाजों के मुखर आलोचक माने जाते हैं.
राजनीति में एंट्री
साल 2007 में बिट्टू की राहुल गांधी से मुलाकात हुई और उन्होंने सियासत में एंट्री ली. इसके बाद ये लगातार 3 बार कांग्रेस पार्टी से सांसद चुने गए. वर्ष 2024 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले बिट्टू ने कांगेस का हाथ छोड़ दिया और BJP में शामिल हो गए. बिट्टू इससे पहले 2009 में आनंदपुर साहिब, 2014 और 2019 में लुधियाना से लोकसभा का चुनाव जीत चुके थे.
2024 में वे पंजाब कांग्रेस के चीफ अमरिंदर सिंह राजा वारिंग के खिलाफ लुधियाना लोकसभा सीट पर लड़े जहां 20 हजार वोटों से चुनाव हार गए. चुनाव हारने के बावजूद इन्हें मंत्रिमंडल में जगह मिला और केंद्रीय रेल तथा खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री की जिम्मेदारी दी गई.
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