सवाई माधोपुर में बवाल: डूंगरी बांध के विरोध में उग्र हुए ग्रामीण, पुलिस पर भयंकर पथराव और ट्रैक्टर चढ़ाने की कोशिश
Sawai Madhopur violence: राजस्थान के सवाई माधोपुर में डूंगरी बांध परियोजना के विरोध में निकाला गया आंदोलन हिंसक हो गया. ट्रैक्टर रैली के दौरान ग्रामीणों और पुलिस के बीच जबरदस्त झड़प हुई, जिसमें पुलिस पर पथराव किया गया और ट्रैक्टर चढ़ाने की कोशिश तक की गई. कई पुलिसकर्मी घायल हुए और सरकारी वाहनों को नुकसान पहुंचा. जानिए पूरे बवाल की वजह.

राजस्थान के सवाई माधोपुर में डूंगरी बांध परियोजना के विरोध में निकाला जा रहा आंदोलन हिंसक हो गया. ट्रैक्टर रैली के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हुई, जिसके बाद उपद्रवियों ने पुलिस पर पथराव कर दिया. हालात इतने बेकाबू हो गए कि कुछ लोगों ने पुलिसकर्मियों पर ट्रैक्टर चढ़ाने तक की कोशिश की. इस घटना में कई पुलिसकर्मियों को चोटें आई हैं और सरकारी वाहनों को भी नुकसान पहुंचा है.
डूंगरी बांध के विरोध में निकली थी विशाल ट्रैक्टर रैली
पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ERCP) के तहत प्रस्तावित डूंगरी बांध को रद्द करने की मांग को लेकर 'डूंगरी बांध रद्द करो आंदोलन समिति' ने ट्रैक्टर रैली का आह्वान किया था. सैकड़ों ट्रैक्टरों पर सवार होकर किसान अजनोटी गांव के पास मैदान में महापंचायत के लिए एकत्र हुए थे. ग्रामीणों का आरोप है कि यदि यह बांध बना तो उनके पुरखों की जमीन और कई गांव जलमग्न हो जाएंगे, जिससे उनका अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा.
पुलिस पर हमला और हालात बेकाबू
महापंचायत के दौरान अचानक माहौल तनावपूर्ण हो गया और प्रदर्शनकारियों ने कानून हाथ में ले लिया. जब पुलिस ने उग्र भीड़ को रोकने की कोशिश की, तो उपद्रवियों ने दनादन पत्थर बरसाने शुरू कर दिए. चश्मदीदों के मुताबिक, स्थिति इतनी गंभीर थी कि पुलिस वालों को अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागना पड़ा. आंदोलनकारी नेताओं का आरोप है कि कुछ 'सरकार के दलालों' ने आंदोलन को बदनाम करने के लिए भीड़ में घुसकर हिंसा भड़काई है.
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प्रशासन की सख्त चेतावनी, जांच के आदेश
घटना के बाद मौके पर भारी पुलिस जाब्ता तैनात कर दिया गया है. एसडीएम गौरव जिंदल और पुलिस के आला अधिकारियों ने घटनास्थल का जायजा लिया. प्रशासन ने साफ कर दिया है कि किसी भी उपद्रवी को बख्शा नहीं जाएगा और वीडियो फुटेज के आधार पर दोषियों की पहचान की जा रही है. एसडीएम ने बताया कि ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है, जिसे उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा, लेकिन हिंसा करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
"चाहे मर जाएंगे, पर विस्थापित नहीं होंगे"
आंदोलनकारी अपनी मांग पर अड़े हुए हैं. ग्रामीणों का कहना है कि सरकार उन्हें गुमराह कर रही है और अब तक बांध को लेकर कोई स्पष्ट डीपीआर (DPR) या लिखित सूचना नहीं दी गई है. उनका कहना है कि वे किसी भी कीमत पर अपनी जमीन छोड़कर विस्थापित नहीं होंगे. आंदोलन समिति ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और भी उग्र रूप धारण करेगा. सवाई माधोपुर में फिलहाल तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और पुलिस की गश्त बढ़ा दी गई है.










