'ठाकुर हूं मैं...' कहने वाली आस्था सिंह की खुली पोल? पीड़ित पक्ष ने बताया 31 दिसंबर की रात का वो खौफनाक सच
HDFC Viral Video Controversy: एचडीएफसी बैंक की रिलेशनशिप मैनेजर आस्था सिंह के 'मैं ठाकुर हूं' वायरल वीडियो विवाद में अब पीड़ित पक्ष सामने आया है. ऋतु मिश्रा और उनके परिवार ने बैंक प्रबंधन, कार्यस्थल के दबाव और 31 दिसंबर की रात की घटना को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं. जानिए इस पूरे बैंक विवाद और वायरल वीडियो केस की पूरी कहानी.

सोशल मीडिया पर 'मैं ठाकुर हूं' कहकर सुर्खियां बटोरने वाली एचडीएफसी बैंक की रिलेशनशिप मैनेजर आस्था सिंह के दावों पर अब दूसरे पक्ष ने गंभीर आरोप लगाए हैं. जिस महिला को ठाकुर बताकर आस्था सिंह हड़का रही थीं, उन्होंने सामने आकर पूरी कहानी बयां की है. इस विवाद की जड़ महज एक 'वॉशरूम का दरवाजा' नहीं, बल्कि बैंक के भीतर चल रहा तनाव और कर्मचारियों के साथ होने वाला दुर्व्यवहार बताया जा रहा है. आइए जानते हैं पूरी बात.
विवाद की असली वजह: वॉशरूम या इस्तीफा?
वायरल वीडियो में आस्था सिंह जिस व्यक्ति से उलझती दिख रही हैं, उनका नाम ऋषि मिश्रा है. ऋषि की पत्नी ऋतु मिश्रा उसी बैंक में बतौर कैशियर काम करती थीं और 6 जनवरी को अपना इस्तीफा देने गई थीं. ऋतु ने बताया कि सुबह 9:00 बजे से वे इस्तीफे के लिए बैठी थीं, लेकिन बैंक प्रबंधन इसे स्वीकार नहीं कर रहा था. इसी दौरान उनकी ननद वॉशरूम गईं, जहां आस्था सिंह पहले से मौजूद थीं. दरवाजा खुला होने के कारण ननद ने टोक दिया, जिससे विवाद शुरू हो गया.
'मैं तुम्हारी गर्मी निकाल दूंगा...', दावों पर सफाई
आस्था सिंह ने आरोप लगाया था कि ऋषि मिश्रा ने उनसे कहा, 'मैं तुम्हारी गर्मी निकाल दूंगा.' इस पर ऋषि मिश्रा ने कड़ी सफाई देते हुए कहा, 'मैंने ऐसा कभी नहीं कहा. आस्था सिंह ने मेरी बहन से बदतमीजी की थी. अगर मेरे शब्दों पर शक है, तो बैंक के सीसीटीवी फुटेज चेक कर लिए जाएं, सब सच सामने आ जाएगा.'
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31 दिसंबर की रात: 11:30 बजे महिला कर्मचारी को छोड़ा
ऋतु मिश्रा ने बैंक मैनेजर सुमित सिंह पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने बताया कि 31 दिसंबर 2024 की रात को उनकी 8 महीने की बच्ची घर पर अकेली थी, इसके बावजूद उन्हें रात 11:00 बजे तक बैंक में रोके रखा गया. ऋतु के अनुसार, बैंक में काम के घंटों का कोई ठिकाना नहीं रहता और विरोध करने पर मैनेजर 'छोड़ने' की बात कहकर टोंट मारते थे. इन्हीं प्रताड़नाओं से तंग आकर उन्होंने इस्तीफा देने का फैसला किया था.
जातिगत रंग और बैंक की साख
आस्था सिंह के 'मैं ठाकुर हूं' वाले बयान पर ऋतु ने कहा कि हमने कभी उनकी जाति नहीं पूछी थी, उन्होंने खुद ही अपनी जाति का रौब झाड़ना शुरू कर दिया. ऋतु ने मांग की है कि आस्था सिंह को तुरंत बैंक से टर्मिनेट किया जाना चाहिए क्योंकि किसी भी बैंक कर्मचारी को ग्राहक या सहकर्मी से ऐसी 'गाली-गलौज' और 'लैपटॉप फेंककर मारने' जैसी अभद्र भाषा का प्रयोग करने का अधिकार नहीं है.










