काशीपुर: किसान सुखवंत सिंह ने क्यों दी जान? वीडियो वायरल होते ही मचा हड़कंप तो प्रशासन ने पूरी पुलिस चौकी कर दी सस्पेंड

Uttarakhand News: काशीपुर के किसान सुखवंत सिंह जान देने वाले मामले में प्रशासन ने किसानों की मांगें मान ली हैं. प्रशासन ने पैगा चौकी के पूरे स्टाफ को सस्पेंड कर दिया है. इसके साथ ही एक करोड़ रुपये की रिकवरी के बाद परिजनों ने शव का अंतिम संस्कार किया. हालांकि, किसान संगठन ने 19 तारीख तक पूरी कार्रवाई न होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है.

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Kashipur Farmer Death Case : उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले में किसान सुखवंत सिंह की जान देने के बाद उपजे जनाक्रोश ने प्रशासन की नींद उड़ा दी. किसान की मौत के बाद भड़के गुस्से को शांत करने के लिए शासन और प्रशासन को तत्काल कड़े कदम उठाने पड़े. किसानों की प्रमुख मांगों को स्वीकार करते हुए प्रशासन ने पैगा चौकी के पूरे स्टाफ को सस्पेंड कर दिया और आईटीआई थाना प्रभारी को लाइन हाजिर कर दिया. इसके साथ ही विवादित जमीन के सौदे में डूबी रकम में से एक करोड़ रुपये की मौके पर रिकवरी कराई गई. इसके बाद परिजन मृतक के अंतिम संस्कार के लिए राजी हुए.

क्या था मामला?

दरअसल, काशीपुर के पैगा निवासी किसान सुखवंत सिंह ने हल्द्वानी के एक होटल में खुदकुशी करने से पहले एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया था. वीडियो में उन्होंने जमीन के नाम पर खुद के साथ हुई 4 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की बात कही थी. मृतक ने वीडियो में कहा था कि माफियाओं और पुलिस की मिलीभगत के कारण उनकी सुनवाई नहीं हुई. ऐसे मे इससे परेशान होकर वो ये कदम उठा रहा है. इस बीच युवक ने जान दे दी. जब साेशल मीडिया पर इसका वीडियो वायरल हुआ तो ही पुलिस प्रशासन में बीच हड़कंप मच गया. इस बीच युवकी की माैत के बाद परिजनों के साथ ही किसान संगठनों ने मोर्चा खोल दिया.

करोड़ों की रिकवरी और पुलिस पर एक्शन

मामले को देखते हुए प्रशासन हरकत में आया और स्थिति को संभालने के लिए घर के आसपास भारी पुलिस बल तैनात कर दिया. इस बीच किसान नेता जितेंद्र सिंह जीतू और प्रशासन के बीच बातचीत होने के बाद ठगी गई राशि में से लगभग 1 करोड़ रुपये बरामद कर परिजनों को सौंप दिए गए. इसके साथ ही वीडियो में जिन आरोपियों के नाम थे उनपर भी मुकदमा दर्ज कर लिया गया है. वहीं, मुख्यमंत्री ने मामले की जांच कुमाऊं कमिश्नर को सौंपी दी है.

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विपक्ष ने उठाए कानून व्यवस्था पर सवाल

वहीं अब इस घटना के बाद राजनीति भी गरमा गई है. उपनेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी और कांग्रेस विधायक आदेश चौहान ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की. भुवन कापड़ी ने सरकार को घेरते हुए कहा कि प्रदेश में अपराधियों और पुलिस के बीच साठगांठ बढ़ रही है. इससे अपराध का ग्राफ ऊपर जा रहा है. उन्होंने मांग की कि वीडियो में जिन भी अधिकारियों के नाम आए हैं उन पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि जनता का कानून पर विश्वास बना रहे.

किसान संगठन की उग्र आंदोलन की चेतावनी

भारतीय किसान यूनियन के युवा विंग के प्रदेश अध्यक्ष जितेंद्र सिंह जीतू ने प्रशासन को कड़ा अल्टीमेटम दिया है. उन्होंने कहा कि अभी सिर्फ 1 करोड़ रुपये की रिकवरी हुई है. बाकी के 2 करोड़ 80 लाख रुपये 19 तारीख यानी भोग से पहले वापस मिलने चाहिए. जीतू ने चेतावनी दी है कि अगर तय समय सीमा के भीतर सभी आरोपियों की गिरफ्तारी और पूरी रकम की रिकवरी नहीं हुई तो किसान सभी हाईवे जाम कर उग्र आंदोलन करेंगे.

वहीं, अपर पुलिस अधीक्षक काशीपुर स्वपन किशोर सिंह ने बताया कि मृतक के परिजनों से बातचीत कर उन्हें भरोसा दिलाया गया है कि प्रशासन उनकी पीड़ा में उनके साथ खड़ा है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने मामले का तुरंत संज्ञान लेते हुए कुमाऊं कमिश्नर को जांच सौंपी है. इसके साथ ही संबंधित चौकी इंचार्ज को लाइन हाजिर कर दिया गया है. मृतक के परिजनों की ओर से दी गई तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है.

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