28 साल बाद लालू की विरासत होगी खत्म, तेजस्वी संभाल सकते हैं राजद की कमान? 25 जनवरी की कार्यकारिणी बैठक की इनसाइड स्टोरी

RJD Leadership Change: 25 जनवरी को होने वाली राजद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में बड़ा फैसला संभव है. 28 साल बाद लालू प्रसाद यादव पार्टी की कमान छोड़ सकते हैं और तेजस्वी यादव को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जा सकता है. जानिए बैठक की इनसाइड स्टोरी, वजहें और बिहार राजनीति पर इसका असर.

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तेजस्वी यादव को मिल सकती है राजद की कमान
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बिहार की राजनीतिक गलियारों में विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल ने एक बार फिर गरमा दिया है. इस बार वजह सत्ता की कमान और उसे संभालने वाले सिपाही को लेकर हो रही चर्चा है. राष्ट्रीय जनता दल यानी राजद ने 25 जनवरी को पटना में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बहुत महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है. कहा जा रहा है कि इस बैठक में पार्टी अब अपने वाले समय के लिए दिशा तय करेगी, जिसके लिए बड़े स्तर पर फेरबदल होंगे. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इस बैठक में लालू यादव अपने छोटे बेटे को राजद की कमान सौंप देंगे यानी लालू यादव की जगह राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव बनाए जा सकते है. आइए विस्तार से समझते हैं पूरी कहानी.

तेजस्वी को मिल सकती है कमान

पार्टी सूत्रों की मानें तो 25 तारीख को होने वाली बैठक काफी महत्वपूर्ण बैठक है. इसी बैठक में तेजस्वी यादव को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष घोषित किया जा सकता है. अगर तेजस्वी को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जाता है तो उन्हें पार्टी के सभी बड़े और जरूरी फैसले लेने का अधिकार मिल जाएगा. इससे वे भविष्य में पार्टी हित में कोई भी फैसला ले सकते है.

तेजस्वी का ही नाम आगे क्यों?

अब एक सवाल आता है कि तेजस्वी यादव को ही यह मौका क्यों मिल रहा और किसी को क्यों नहीं? तो इसके भी कई कारण सामने आए है:

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1. लालू यादव की ढलती उम्र

1977 में राजद पार्टी के बनने के बाद से अब तक कमान लालू प्रसाद यादव के हाथ में है. लेकिन बीते कुछ सालों में जिस तरीके से उनका स्वास्थ्य खराब हो रहा है इसे लेकर पार्टी के कार्यकर्ता काफी चिंतित रहते है. किडनी ट्रांसप्लांट और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के कारण वह सक्रिय राजनीति से काफी हद तक दूर हैं. सूत्रों के मुताबिक साथ ही लालू यादव अब अपने ढलते उम्र के साथ खुद चाहते हैं कि पार्टी की रोजमर्रा की जिम्मेदारियां एक मजबूत, सक्रिय और स्वीकार नेतृत्व के हाथों में हो.

2. तेजस्वी यादव की सक्रियता

तेजस्वी यादव बीते कुछ सालों से राजद का अनौपचारिक रुप से नेतृत्व करते आ रहें है. लालू प्रसाद यादव भी उनके साथ सलाह-मशवरा करके सारे फैसले लेते है, जिससे की उनकी सक्रियता साफ दिखाई देती है. इसके अलावा वे सरकार से सीधा सवाल पूछते है और साथ ही नेता प्रतिपक्ष भी है. इसलिए तेजस्वी यादव अपने पिता के बाद अब विरासत को संभालने वाले हर कसौटी पर खरे उतरते है.

3. तेज प्रताप घर और पार्टी से बाहर

तेजस्वी यादव को चुनने की तीसरी वजह यह भी तेज प्रताप यादव अभी घर और पार्टी से बाहर है. 25 मई को लालू यादव ने उन्हें अनुष्का के साथ रिलेशनशिप वाले कांड के बाद घर और पार्टी से 6 साल बाहर निकाल दिया था. अब जब तेजस्वी यादव के अलावा पार्टी के पास दूसरा कोई ऑप्शन भी नहीं है.

4. राजद को राष्ट्रीय पार्टी बनाने का मकसद

राजद अब धीरे-धीरे अपनी राजनीति को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पार्टी खुद को अब राष्ट्रीय स्तर पर प्रेजेंट करना चाहती है और इसके लिए तेजस्वी एक बेहतर ऑप्शन भी है. जैसे ही तेजस्वी यादव को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जाएगा, वैसे उन्हें सहयोगी पार्टी तवज्जो देगी और वे पार्टी को और आगे लेकर जाएंगे. साथ ही पार्टी के भीतर अब अधिकांश वरिष्ठ नेता तेजस्वी यादव को नए नेतृत्व के रुप में स्वीकार कर चुके हैं.

चुनाव में हार के बाद बदलाव की तैयारी

कहा जा रहा है कि जिस तरीके से 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में राजद की हार हुई है तो अब भविष्य को बनाने के लिए बदलाव काफी जरूरी है. इसलिए ही तेजस्वी यादव को नई जिम्मेदारी सौंपा जा सकता है ताकि चीजें सही ढंग से हो. राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में लगभग 200 नेता शामिल होंगे.

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