क्या है F&O ट्रेडिंग जिससे पैसे गंवा रहे इन्वेस्टर्स? 10 में से 9 इन्वेस्टर्स को फकीर बनाने वाले खेल पर शिकंजा

क्या आप भी 5,000 रुपए को रातों-रात 50,000 रुपए बनाने के चक्कर में ऑप्शन ट्रेडिंग में कूद रहे हैं? रुकिए! आज 1 फरवरी 2026 के बजट और सेबी के नए नियमों ने खेल पूरी तरह बदल दिया है.

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बजट पेश होते ही शेयर बाजार हुआ धड़ाम.
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बजट पेश होने पर शेयर बाजार का रिएक्शन इस बात का सबूत बनता है कि बजट अच्छा आया है या नहीं. जिस बजट को निर्मला सीतारामन विकसित भारत का बजट कहा उसे शेयर बाजार ने सलामी नहीं दी. बजट स्पीच खत्म होते ही बाजार ने बड़ी गुलाटी मार दी. बाजार को मिला कुछ नहीं बल्कि एक फैसले से कमर और टूट गई.

वित्त मंत्री निर्मला सीताराम ने ऑप्शन ट्रेडिंग यानी एफ एंड ओ पर शिकंजा कसते हुए टैक्स बढ़ा दिया. सरकार ने F&O पर STT यानी Securities Transaction Tax  बढ़ाकर ये साफ कर दिया है कि वो शेयर बाजार में सट्टेबाजी के खेल को महंगा बनाना चाहती है ताकि रिटेल निवेशकों की मेहनत की कमाई सुरक्षित रहे. बजट में F&O पर टैक्स और STT को बढ़ाया गया है ताकि शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग कम हो. ये सजा इसलिए पसंद नहीं आई क्योंकि शेयर बाजार को लगा इससे लोग ट्रांजेक्शन से बचेंगे जो उसके हित में नहीं.   

टैक्स बढ़ने से छोटा मुनाफा भी टैक्स की भेंट चढ़ेगा

ऑप्शन प्रीमियम पर टैक्स 0.1% से बढ़कर 0.15% होने का मतलब है कि अब आपको हर ट्रेड पर पहले से ज्यादा शुल्क देना होगा. सेबी की रिपोर्ट के अनुसार, औसत घाटा झेलने वाले ट्रेडर्स पहले से ही नुकसान का करीब 28% हिस्सा केवल ट्रांजेक्शन कॉस्ट के रूप में दे रहे थे, जो अब और बढ़ जाएगा. टैक्स बढ़ने से छोटा मुनाफा भी टैक्स की भेंट चढ़ जाएगा. एक रिटेल ट्रेडर सालाना औसत 1.25 रुपए लाख गंवा रहा है.  नुकसान का 25-30% हिस्सा टैक्स और ब्रोकरेज में चला जाता है. 

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शेयर बाजार को यही नागवार गुजरा

यही टैक्स लोड शेयर बाजार को नागवार गुजरा. हालांकि वित्त मंत्री ने ऑप्शन ट्रेडिंग पर टैक्स बढ़ाकर उन लोगों को बचाने की कोशिश की जो ऑप्शन ट्रेडिंग करके मोटा नुकसान करा रहे हैं. सरकार और सेबी (SEBI) ऑप्शन ट्रेडिंग को इसलिए हतोत्साहित कर रहे हैं क्योंकि ये इन्वेस्टमेंट से ज्यादा सट्टा बनता जा रहा है. भारत में 10 में से 9 ऑप्शन ट्रेडर्स अपना पैसा गंवा रहे हैं. सेबी की रिपोर्ट के अनुसार, 2024-25 में रिटेल ट्रेडर्स ने एक लाख करोड़ से ज्यादा का भारी नुकसान उठाया है. लोग फटाफट अमीर बनने की लालच में अपने पैसे गंवा रहे हैं. 

ऑप्शन ट्रेडिंग है क्या? 

ऑप्शन ट्रेडिंग बिल्कुल एक बयाना यानी Token Money  देने जैसा है. इसे जमीन के उदाहरण से समझते हैं. मान लीजिए एक प्लॉट की कीमत 10 लाख रुपये है. खरीदने वाले को लगता है कि अगले हफ्ते यहां से हाईवे निकलेगा और इस प्लॉट की कीमत 12 लाख हो जाएगी. ऑप्शन यानी टोकन लेकर जमीन के मालिक के पास जाते हैं. 20,000 रुपये यानी Premium देते हैं. आप शर्त रखते हैं कि अगले गुरुवार तक मैं ये प्लॉट 10 लाख में ही खरीदूंगा. मालिक ने शर्त लगाई कि या तो गुरुवार तक खरीद लो. नहीं तो बयान भी नहीं दूंगा. अगर गुरुवार तक प्लॉट 12 लाख का हो गया, तो सिर्फ 20 हजार लगाकर 2 लाख का मुनाफा कमा लिया. अगर हाईवे नहीं निकला और प्लॉट की कीमत गिर गई, तो आप प्लॉट नहीं खरीदेंगे. आपका दिया गया 20 हजार का बयाना यानी टोकन भी डूब जाएगा. 

सरकार इसे बढ़ावा क्यों नहीं देना चाहती?  

इसके पीछे 3 बड़े कारण हैं. इससे पारिवारिक बचत पर संकट आया है. सरकार की चिंता है कि बिना जानकारी शेयरों पर दांव खेलने से घरों की बचत खत्म हो रही है. सरकार चाहती है कि लोग लंबी अवधि के लिए 'कैश मार्केट' या 'म्युचुअल फंड' में निवेश करें ताकि देश की अर्थव्यवस्था को वास्तविक पूंजी मिले, न कि लोग सिर्फ एक्सपायरी के दिन लॉटरी की तरह दांव लगाएं. छोटे ट्रेडर्स अक्सर अपनी क्षमता से ज्यादा रिस्क लेते हैं. इसीलिए सेबी ने नवंबर 2024 से साप्ताहिक एक्सपायरी कम कर दी है और कॉन्ट्रैक्ट साइज 5 लाख रुपए से बढ़ाकर 15 लाख रुपए कर दिया है ताकि कम पूंजी वाले ट्रेडर्स इस जोखिम से दूर रहें.

अब हर कोई इसमें हाथ नहीं आजमा सकता. सेबी ने एक कॉन्ट्रैक्ट की कीमत ₹15 लाख कर दी है। यानी अब आपको एक लॉट खरीदने के लिए भी पहले से 3 गुना ज्यादा पूंजी और अनुशासन चाहिए। इसका मतलब एंट्री बैरियर जो पहले 5 लाख था वो 15 लाख हो गया. मकसद  गंभीर और बड़े निवेशक ही दांव खेलने आगे रहें.

जब लगता है कि बाजार या किसी शेयर की कीमत बढ़ने वाली है, तब लोग कॉल ऑप्शन खरीदते हैं. जब आपको लगता है कि बाजार या किसी शेयर की कीमत गिरने वाली है, तब पुट ऑप्शन खरीदते हैं. इससे गिरते हुए बाजार में भी ऊंचे दाम पर शेयर बेचने का मौका मिलता है.  लेकिन जानकारी की कमी में लोग ऐसे मौकों पर अक्सर धोखा खा रहे हैं. हर ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट की एक अंतिम डेट यानी एक्सपायरी होती है. उस डेट के बाद वो  कॉन्ट्रैक्ट शून्य या अमान्य हो जाता है. पैसे कमा लिए तो ठीक नहीं तो मोटा घाटा. इसमें कम वक्त में ज्यादा मुनाफा और ज्यादा नुकसान तेजी से हो सकता है. 

क्या चाहती है सरकार? 

सरकार की थ्योरी कि टैक्स बढ़ाकर ट्रेडर्स को सजा नहीं दे रही, बल्कि कैश मार्केट लंबे समय के लिए शेयर खरीदना का रास्ता दिखा रही है. जब तक लोग ऑप्शन ट्रेडिंग को बिजनेस के बजाय किस्मत का खेल समझेंगे, तब तक नुकसान होता रहेगा. अगर एक्सपायरी डेट तक अनुमान सही नहीं हुआ, तो आपके लगाए हुए पैसे जीरो  हो जाएंगे. 

ऑप्शन ट्रेडिंग कैसे होता है?  

ऑप्शन ट्रेडिंग शुरू करने के लिए आपको मुख्य रूप से एक डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट की आवश्यकता होती है जिसमें F&O (Derivatives) सेगमेंट सक्रिय (Activate) हो। सबसे पहले किसी सेबी (SEBI) रजिस्टर्ड ब्रोकर (जैसे Zerodha, Upstox, या Angel One) के साथ अकाउंट खोल सकते हैं. ऑप्शन ट्रेडिंग के लिए आपको पिछले 6 महीने का बैंक स्टेटमेंट, लेटेस्ट सैलरी स्लिप या ITR रिटर्न जमा करना होता है।SEBI के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, ब्रोकर आपकी वित्तीय क्षमता की जांच कर सकता है.  

शेयर बाज़ार में निवेश या ट्रेडिंग करना बहुत जोखिम भरा हो सकता है. यह महत्वपूर्ण है कि आप पूरी जानकारी प्राप्त करें और किसी भी निवेश से पहले जोखिमों को समझें. जानकार एक्सपर्ट की सलाह लेकर ट्रेडिंग करें. 

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