महाराष्ट्र में बीएमसी चुनाव से पहले ठाकरे ब्रदर्स आए साथ, राजनीति में सियासी हलचल, बीजेपी की बढ़ी टेंशन
बीएमसी चुनाव से पहले महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है. उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) और राज ठाकरे की मनसे ने नगर निगम चुनाव के लिए गठबंधन का ऐलान किया. इससे अब सियासी हलचल तेज हो गई है.

BMC Election News: बीएमसी चुनाव से पहले महाराष्ट्र की राजनीति में एक अहम घटनाक्रम सामने आया है. उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) और राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने नगर निगम चुनाव के लिए गठबंधन का ऐलान किया है. इस गठबंधन को इसलिए खास माना जा रहा है क्योंकि इसके साथ ही लंबे समय बाद ठाकरे परिवार के दोनों प्रमुख चेहरे एक साथ राजनीतिक मंच पर नजर आए. इस मौके पर मुंबई के दादर स्थित शिवसेना भवन में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई, जिसमें उद्धव ठाकरे, राज ठाकरे और संजय राउत मौजूद रहे. खास बात यह रही कि राज ठाकरे करीब 20 साल बाद शिवसेना भवन पहुंचे, जो अपने आप में एक राजनीतिक संकेत माना जा रहा है.
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राज ठाकरे ने शिवसेना भवन से जुड़े अपने पुराने अनुभव साझा किए. उन्होंने कहा कि इस जगह से उनकी कई पुरानी यादें जुड़ी हैं और उन्हें याद करने में लंबा वक्त लग सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि 1977 में शिवसेना भवन बनने के बाद किस तरह उस दौर में राजनीतिक संघर्ष हुआ करता था. राज ठाकरे की इन बातों को उनके राजनीतिक सफर और शिवसेना से जुड़ाव के संदर्भ में देखा जा रहा है, जो यह दिखाता है कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद भावनात्मक जुड़ाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ था. उद्धव ठाकरे ने गठबंधन को लेकर कहा कि दोनों दलों का साथ आना महाराष्ट्र के लिए सकारात्मक है. उन्होंने संयुक्त घोषणापत्र को जनता के सामने रखते हुए कहा कि इसे जनता के चरणों में समर्पित किया गया है.
राजनीतिक हालात पर चिंता और बीजेपी पर गंभीर आरोप
उन्होंने मौजूदा राजनीतिक हालात पर चिंता जताते हुए लोकतंत्र और चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए और बीजेपी पर आरोप लगाए कि सत्ता के दुरुपयोग के जरिए उम्मीदवारों को निर्विरोध जिताने की कोशिशें हो रही हैं. उद्धव ठाकरे ने विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर की भूमिका पर भी सवाल उठाए. उन्होंने निर्विरोध चुने गए उम्मीदवारों के मामलों में दोबारा चुनाव कराने और रिटर्निंग अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की. मुंबई के मेयर को लेकर उद्धव ठाकरे ने कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि मुंबई का मेयर मराठी ही होगा.
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बीजेपी के लिए बढ़ी चुनौती, मराठी वोटों के एकजुट होने की उम्मीद
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दोनों नेताओं ने बीजेपी और मौजूदा सरकार की नीतियों की आलोचना की. मुंबई कोस्टल रोड प्रोजेक्ट को लेकर चल रहे श्रेय विवाद पर उद्धव ठाकरे ने तंज कसते हुए कहा कि हर परियोजना का श्रेय लेने की होड़ मची हुई है. राज ठाकरे ने कहा कि सत्ता अस्थायी होती है और मौजूदा सत्ताधारी दलों को भविष्य के बारे में सोचना चाहिए. उन्होंने महाराष्ट्र की पहचान को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि राज्य को यूपी-बिहार जैसा बनाने की कोशिशें ठीक नहीं हैं.राजनीतिक तौर पर यह गठबंधन बीजेपी के लिए चुनौती माना जा रहा है, खासकर मुंबई और शहरी इलाकों में.
बीएमसी चुनाव से पहले बदली महाराष्ट्र की राजनीति की तस्वीर
शिवसेना (यूबीटी) और मनसे के साथ आने से मराठी वोटों के बिखराव को रोकने में मदद मिल सकती है. साथ ही, ठाकरे भाइयों का एक मंच पर आने से ये माना जा रहा है कि बीएमसी चुनाव के जरिए दोनों दल सिर्फ़ सीटों की लड़ाई नहीं लड़ रहे, बल्कि अपने राजनीतिक आधार को फिर से मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं. बीएमसी चुनाव से पहले ठाकरे ब्रदर्स का साथ आना महाराष्ट्र की राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव है. यह गठबंधन आने वाले चुनावों में क्या असर दिखाएगा, यह देखना बाकी है, लेकिन इतना तय है कि इस कदम ने राज्य की राजनीति में नई चर्चा को जन्म दिया है.
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