Shesh Bharat: जयललिता के सिपहसालार दिनाकरन की NDA में वापसी, क्या तमिलनाडु में बदलेगा सत्ता का समीकरण?
Shesh Bharat: तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा बदलाव आया है. पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की करीबी रहीं शशिकला के भतीजे टीटीवी दिनाकरन एक बार फिर बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए (NDA) गठबंधन में शामिल हो गए हैं.

Shesh Bharat: दक्षिण भारत की राजनीति हमेशा देश के बाकी हिस्सों से अलग रही है. यहां नेता सिर्फ सत्ता का चेहरा नहीं, बल्कि भावनाओं का केंद्र होते हैं. इसी राजनीति में एक बार फिर चर्चा में हैं टीटीवी दिनाकरन. अम्मा जयललिता के करीबी रहे दिनाकरन अब दोबारा बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन का हिस्सा बन गए हैं.
दिल्ली से चेन्नई पहुंचे केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल की मौजूदगी में यह सियासी समझौता तय हुआ. इससे पहले दिनाकरन कुछ महीनों तक एनडीए से बाहर थे, लेकिन विधानसभा चुनाव की आहट के बीच उन्होंने फिर गठबंधन का रास्ता चुना.
गांवों की राजनीति में बीजेपी को चाहिए मजबूत सहारा
तमिलनाडु में बीजेपी की पकड़ शहरी इलाकों तक सीमित मानी जाती है. ग्रामीण क्षेत्रों में पार्टी को अब भी जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों से जूझना पड़ता है. ऐसे में बीजेपी स्थानीय प्रभाव रखने वाले नेताओं को अपने साथ जोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है.
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दिनाकरन इसी रणनीति का अहम हिस्सा बनकर उभरे हैं. उनकी पार्टी AMMK का चुनाव चिन्ह 'कुकर' है, जो अब एनडीए के चुनावी अभियान में कमल के साथ नजर आएगा.
थेवर समुदाय में मजबूत पकड़
टीटीवी दिनाकरन दक्षिण तमिलनाडु के प्रभावशाली थेवर समुदाय के बड़े नेता माने जाते हैं. 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें भले ही जीत न मिली हो लेकिन उनकी सीटों पर 15 से 20 प्रतिशत तक वोट शेयर रहा. यही आंकड़ा उन्हें राजनीतिक रूप से प्रासंगिक बनाए रखता है.
बीजेपी के लिए यह वोट बैंक आने वाले विधानसभा चुनावों में अहम साबित हो सकता है.
जयललिता से राजनीति की शुरुआत
दिनाकरन की पहचान तब बनी जब वे जयललिता के चेन्नई स्थित पोएस गार्डन आवास के आंतरिक सर्कल में शामिल हुए. वे AIADMK के कोषाध्यक्ष भी रहे और कई बार संसद तथा विधानसभा तक पहुंचे.
शशिकला के रिश्तेदार होने के कारण पार्टी में उनका प्रभाव मजबूत था, लेकिन 2011 में भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद जयललिता ने उन्हें और शशिकला दोनों को पार्टी से बाहर कर दिया.
वापसी, टूट और नई पार्टी का गठन
जयललिता के निधन के बाद शशिकला ने कुछ समय के लिए पार्टी की कमान संभाली और दिनाकरन की वापसी कराई. उन्हें उप-महासचिव बनाया गया, लेकिन आय से अधिक संपत्ति मामले में शशिकला के जेल जाने के बाद पार्टी फिर टूट गई.
ई. पलानीस्वामी के नेतृत्व में AIADMK ने शशिकला और दिनाकरन दोनों को बाहर का रास्ता दिखा दिया. इसके बाद 2018 में दिनाकरन ने AMMK नाम से नई पार्टी बनाई.
आरके नगर चुनाव से बदली पहचान
2017 में आरके नगर उपचुनाव में दिनाकरन ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर AIADMK और DMK दोनों को हराकर जीत दर्ज की. यह जीत तमिलनाडु की राजनीति की सबसे चौंकाने वाली घटनाओं में गिनी जाती है.
हालांकि इसके बाद भी वे राज्य की राजनीति में बड़ी ताकत के रूप में खुद को स्थापित नहीं कर पाए.
विवादों से भी रहा नाता
दिनाकरन का नाम दिल्ली के ठग सुकेश चंद्रशेखर मामले में भी सामने आया. आरोप लगे कि AIADMK का चुनाव चिन्ह पाने के लिए रिश्वत की साजिश रची गई थी, लेकिन अदालत में आरोप साबित नहीं हो सके.
टूटे धड़ों को जोड़ने की बीजेपी की कोशिश
लोकसभा चुनाव में हार के बाद AIADMK के कई नेता एनडीए से अलग हो गए थे. विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने फिर से टूटे हुए गुटों को जोड़ने की कोशिश शुरू की.
इसी रणनीति के तहत दिनाकरन की वापसी कराई गई है. राजनीतिक संकेत यह भी हैं कि आगे चलकर शशिकला और ओ. पन्नीरसेल्वम जैसे नेता भी एनडीए के करीब आ सकते हैं.
तमिलनाडु में नया सियासी मोर्चा
DMK और AIADMK के दशकों पुराने दबदबे को चुनौती देने के लिए बीजेपी और AMMK की जोड़ी एक नया राजनीतिक विकल्प पेश कर रही है. यह देखना दिलचस्प होगा कि यह गठबंधन सिर्फ चुनावी प्रयोग बनता है या राज्य की राजनीति में स्थायी बदलाव की शुरुआत.
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